जैसलमेर में सेना के आधुनिकीकरण पर मंथन, 2029 तक 3 लाख करोड़ का रक्षा उत्पादन लक्ष्य
देश की सैन्य ताकत को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में राजस्थान के जैसलमेर में मंगलवार को अहम बैठक हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित की गई। इसका मुख्य विषय भारतीय सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण रहा। बैठक में बदलती सुरक्षा चुनौतियों, युद्ध के नए तौर-तरीकों और आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा हुई।
रक्षा निर्यात में भी बड़ा इजाफा हुआ है। साल 2014 में भारत का रक्षा निर्यात 2,000 करोड़ रुपए से कम था। अब यह बढ़कर करीब 40,000 करोड़ रुपए हो गया है। सरकार का लक्ष्य 2029 तक इसे 50,000 करोड़ रुपए तक पहुंचाना है। इसके लिए घरेलू कंपनियों, स्टार्टअप और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
रक्षा बजट बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपए
राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक सेना के लिए पर्याप्त बजट के साथ उसका सही इस्तेमाल भी जरूरी है। सैन्य जरूरतों के हिसाब से हथियारों और उपकरणों की खरीद को प्राथमिकता देनी होगी। आधुनिकीकरण की योजनाओं को तय समय में पूरा करना भी जरूरी है।
Attended the meeting of the Consultative Committee of the Ministry of Defence on ‘Modernisation of Indian Defence Forces’ in Jaisalmer, Rajasthan. The meeting witnessed comprehensive deliberations on the emerging security challenges, warfare paradigms, technological advancements and the imperative of building a future-ready, technologically empowered and operationally agile military.The Government under the leadership of PM Shri @narendramodi has been focused on budgetary support and capital acquisition to meet the modernisation requirements. The adequate financial resources, coupled with effective utilisation and prioritisation of critical needs of the Services, are essential to strengthening military capabilities.https://t.co/GHdTJSDmNJ
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) November 3, 2026
छह मोर्चों पर सेना को मजबूत करने की तैयारी
इसके तहत अगली पीढ़ी के हथियारों और सैन्य प्लेटफॉर्म को तेजी से सेना में शामिल करने की बात कही गई। थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संयुक्त ऑपरेशन और योजना को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने के लिए घरेलू उद्योगों, स्टार्टअप और शिक्षण संस्थानों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वायत्त प्रणालियों, ड्रोन और दूसरे मानवरहित प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और आधुनिक संचार प्रणालियों को भविष्य के युद्ध की अहम जरूरत माना गया।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), तीनों सेनाओं, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों, निजी कंपनियों और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। मकसद शोध और नई तकनीक को सीधे सैन्य जरूरतों से जोड़ना है।
असानी, भैरव और शक्तिबाण प्लाटून का जिक्र
उन्होंने भारतीय सेना के नए फॉर्मेशन असानी, भैरव और शक्तिबाण प्लाटून का भी जिक्र किया। रक्षा मंत्री के मुताबिक, ये फॉर्मेशन आधुनिक युद्धक्षेत्र की जरूरतों के अनुसार काम कर रहे हैं और मौजूदा परिचालन चुनौतियों से निपटने में प्रभावी साबित हो रहे हैं।
सांसदों और वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया हिस्सा
बैठक में आधुनिकीकरण की योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू करने, जरूरी सैन्य क्षमताओं को प्राथमिकता देने और तय लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करने पर जोर दिया गया।
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