पाकिस्तान बॉर्डर पर ANTF की कार्रवाई सवालों के घेरे में, कॉन्स्टेबल पर पंजाब के बदमाशों से मिलीभगत के आरोप
Jageshwar Prasad | Oct 24, 2026, 16:28 IST
श्रीगंगानगर RDX केस: ANTF जवान पर मिलीभगत के आरोप, जानें पूरा मामला
श्रीगंगानगर के रावला मंडी इलाके में 12 अक्टूबर को एक बड़ी कार्रवाई हुई थी। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने आरडीएक्स और हथियार पकड़ने का दावा किया था। अब इस कार्रवाई की टाइमिंग और गोपनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के हवाले से टीम के एक कॉन्स्टेबल की भूमिका पर शक जताया गया है। एएनटीएफ आईजी ने इन आरोपों को गलत बताया है और जांच की बात कही है।
12-13 अक्टूबर की रात क्या हुआ?
कार्रवाई के अनुसार उनके पास भारी मात्रा में आरडीएक्स (RDX) था। साथ में तुर्की निर्मित पिस्तौल और 650 से ज्यादा जिंदा कारतूस भी बताए गए। दोनों बदमाशों के नाम लखविंदर और सुखविंदर बताए गए हैं।
सुबह 8 बजे के बाद रावला मंडी थाने में एफआईआर (FIR – First Information Report) दर्ज हुई। इसमें आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ कानून और यूएपीए (UAPA – Unlawful Activities Prevention Act) की धाराएं लगाई गईं। दोपहर बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई।
किन तीन बातों पर उठे सवाल?
दूसरा सवाल स्थानीय पुलिस को लेकर है। आरोप है कि रात 10 बजे रावला थाने के दो कॉन्स्टेबल मौके पर पहुंचे। वहां मौजूद एएनटीएफ टीम ने कोई जानकारी नहीं दी। उन्हें दबाव बनाकर वापस भेजने की बात कही गई है।
तीसरा सवाल दूसरी एजेंसियों से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार आरडीएक्स की ड्रोन सप्लाई का इनपुट था। फिर भी सीमा पर तैनात बीएसएफ (BSF – Border Security Force) को शामिल नहीं किया गया। स्थानीय इंटेलिजेंस और सीआईडी (CID – Crime Investigation Department) को भी सुबह 4 बजे के बाद सक्रिय किया गया।
कॉन्स्टेबल पर क्या आरोप लगे हैं?
आरोप है कि दोनों बदमाश पंजाब के फाजिल्का क्षेत्र के एक ग्रेनेड हमले के मामले में फरार थे। सूत्रों के अनुसार कॉन्स्टेबल ने उन्हें पकड़वाने के बजाय एक वांछित तस्कर की मदद ली। इस तस्कर का नाम रघुवीर सिंह बताया गया है। उसकी मदद से बदमाशों को बज्जू (बीकानेर) में ठिकाना दिलाने की बात कही गई है।
यह भी आरोप है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर से बातचीत जिस फोन से हुई, वह एएनटीएफ के ही एक मुखबिर का था। ये सभी बातें अभी सूत्रों के दावे हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि श्रीगंगानगर चौकी के स्टाफ को रात तक कार्रवाई की भनक नहीं थी। जयपुर से बड़े अधिकारी के आने के बाद 13 अक्टूबर को खुलासा किया गया।
आरडीएक्स को नष्ट करने पर भी सवाल
आईजी विकास कुमार का पक्ष
आईजी ने यह भी बताया कि एटीएस (ATS – Anti Terrorist Squad) भी जांच कर रही है। उनके अनुसार जांच में सब सामने आ जाएगा।
एक्सपर्ट की राय
उनके अनुसार बीएसएफ की इंटेलिजेंस रिपोर्ट पर गृह मंत्रालय ऐसे मामले एनआईए (NIA – National Investigation Agency) को देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि बीएसएफ को सूचना देर से क्यों दी गई। उनका कहना है कि एनआईए या अन्य एजेंसियां इसका पता लगा सकती हैं।
फिलहाल एटीएस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। कार्रवाई पर उठे सवालों की सच्चाई जांच के बाद ही साफ होगी। तब तक सूत्रों के दावे अप्रमाणित माने जाने चाहिए। आईजी का पक्ष भी रिपोर्ट में दर्ज है।
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