श्रीगंगानगर बॉर्डर पर ड्रोन से RDX की ड्रॉपिंग,पुलिस ने ही वांटेड को दिया मोबाइल; पंजाब के ग्रेनेड हमले से जुड़ा आरोपी
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 21, 2026, 12:02 IST
राजस्थान बॉर्डर पर विस्फोटक मिलने से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
श्रीगंगानगर बॉर्डर के पास ड्रोन से आरडीएक्स, हथियार और कारतूस गिराए जाने के मामले की ATS जांच कर रही है।जांच के मुताबिक, आरोपी सुखविंदर पंजाब के जलालाबाद ग्रेनेड हमले में भी वांटेड है।मोबाइल फोन, सिम कार्ड, स्थानीय संपर्कों और ड्रॉपिंग स्थल की रेकी से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है
राजस्थान के श्रीगंगानगर में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास ड्रोन से आरडीएक्स, हथियार और कारतूस गिराए जाने के मामले में जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस पड़ताल के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में शामिल सुखविंदर पंजाब के जलालाबाद में हुए ग्रेनेड हमले के मामले में भी वांटेड है। जांच में मोबाइल फोन, स्थानीय संपर्कों और ड्रॉपिंग की जगह की रेकी से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल मामले की जांच एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) कर रही है।
12 अक्टूबर की रात श्रीगंगानगर बॉर्डर के पास चक 5 केएनएम इलाके में ड्रोन के जरिए संदिग्ध सामग्री गिराए जाने की घटना सामने आई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, इसमें आरडीएक्स, हथियार और कारतूस शामिल थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई की और आरोपियों की तलाश शुरू की।
पड़ताल के मुताबिक, पंजाब के सुखविंदर ने जिस मोबाइल फोन का इस्तेमाल कथित डील के लिए किया, वह एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के एक मुखबिर के जरिए उस तक पहुंचा था। आरोप है कि इसी फोन से उसने पंजाब के अलीका निवासी हैंडलर कुलवंत से संपर्क किया और पाकिस्तान में अली चाचा के साथ डील की। हालांकि, ANTF का कहना है कि उसे हेरोइन की डील और ड्रॉपिंग से संबंधित इनपुट मिला था।
जांच में सामने आया है कि सुखविंदर पंजाब के जलालाबाद सिटी थाने में 12 सितंबर की रात हुए ग्रेनेड हमले के मामले में भी वांटेड है। पंजाब पुलिस ने भी इस संबंध में पुष्टि की है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बॉर्डर पर ड्रॉपिंग के मामले और ग्रेनेड हमले के बीच क्या संबंध है।
जांच के अनुसार, सुखविंदर और उसका साथी लखविंदर 22 सितंबर को श्रीगंगानगर के 16 बीएलडी गांव पहुंचे थे। बताया गया कि गांव के रघु ने उन्हें अपने परिचित बज्जू के घर ठहराया था। दोनों कथित तौर पर तब से ANTF की निगरानी में थे। ड्रॉपिंग के बाद से दोनों के गायब होने की जानकारी सामने आई है और उनकी तलाश की जा रही है।
जांच में सामने आया कि 12 अक्टूबर की रात करीब 9:14 बजे चक 5 केएनएम में ड्रॉपिंग की घटना के दौरान सुखविंदर, लखविंदर और स्थानीय निवासी रघु मौजूद थे। तीनों दो मोटरसाइकिलों पर पहुंचे थे। एजेंसियों के मौके पर पहुंचने से पहले रघु के बाइक से निकल जाने की बात सामने आई है। बाद में दूसरी बाइक भी मौके से गायब मिली। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि ड्रॉपिंग स्थल की रेकी के लिए इस्तेमाल की गई कार किसकी थी और वह कहां है।
पड़ताल के अनुसार, डील में इस्तेमाल हुआ मोबाइल नंबर कथित तौर पर ANTF के जरिए सुखविंदर तक पहुंचा था। बताया गया कि संबंधित सिम अक्टूबर 2025 में नोहर की एक मोबाइल दुकान से खरीदी गई थी और वह दयानंद नाम के व्यक्ति के दस्तावेजों पर दर्ज थी। जांच एजेंसियां अब सिम कार्ड, कॉल रिकॉर्ड और संबंधित लोगों की पहचान की पुष्टि कर रही हैं।
मामले की जांच अब एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) के पास है। मंगलवार सुबह ATS के डीआईजी राममूर्ति जोशी श्रीगंगानगर पहुंचे। एटीएस के एडीजी दिनेश एमएन के मुताबिक, गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच के दौरान सामने आ रहे अन्य नामों की तलाश की जा रही है। एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि विस्फोटक और हथियार कहां पहुंचाए जाने थे।
इस मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि ड्रॉपिंग में हेरोइन होने की सूचना थी, तो संबंधित हैंडलर और अन्य संपर्कों तक पहुंचने के लिए क्या कदम उठाए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, सुखविंदर और लखविंदर पहले से निगरानी में थे, इसके बावजूद ड्रॉपिंग की घटना हुई। इन सवालों पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई और पूछताछ के नतीजों से आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए गिराए गए हथियार और विस्फोटक
मोबाइल फोन के जरिए हुई थी डील
जलालाबाद ग्रेनेड हमले में भी वांटेड है सुखविंदर
22 सितंबर से श्रीगंगानगर में छिपे थे आरोपी
ड्रॉपिंग के वक्त मौके पर थे तीन लोग
सिम कार्ड और मोबाइल रिकॉर्ड की जांच
ATS कर रही है मामले की जांच
सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
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