राजस्थान पंचायत चुनाव का तीसरा चरण: कांग्रेस के 6 सांसद, 15 विधायक और 9 पूर्व मंत्रियों की साख दांव पर
Jyoti Mahender Bhardwaj | Nov 03, 2026, 16:43 IST
कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के सामने साख बचाने की चुनौती
राजस्थान में पंचायत चुनाव के तीसरे चरण के मतदान के साथ कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी दांव पर लग गई है। प्रदेश के 27 जिलों की 116 पंचायत समितियों के 2 हजार 496 वार्डों में मंगलवार को मतदान हो रहा है। इस चरण में कांग्रेस के 6 लोकसभा सांसद, 15 विधायक और 9 पूर्व मंत्रियों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला होगा। चुनाव परिणाम बताएंगे कि इन नेताओं की अपने क्षेत्रों में जनता के बीच कितनी पकड़ है और वे पार्टी को कितनी बढ़त दिला पाए हैं।
27 जिलों में आज मतदान
मतदान के बाद प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद हो जाएगा। इसके साथ ही कांग्रेस के सांसदों, विधायकों और पूर्व मंत्रियों के राजनीतिक प्रभाव का आकलन भी चुनाव परिणामों से किया जाएगा।
कांग्रेस के इन 6 सांसदों की साख दांव पर
- टोंक-सवाई माधोपुर: सांसद हरीश मीणा के क्षेत्र में बामनवास, बोली, खंडार, मलारना डूंगर, देवली, मालपुरा, पचेवर, पीपलू और उनियारा पंचायत समितियों में मतदान।
- झुंझुनूं: सांसद बृजेंद्र ओला के क्षेत्र में गोठड़ा, गुड़ागौड़जी, नवलगढ़ और उदयपुरवाटी पंचायत समितियों में वोटिंग।
- श्रीगंगानगर: सांसद कुलदीप इंदौरा के क्षेत्र में राजियासर, सूरतगढ़ और विजयनगर पंचायत समितियों में मतदान।
- दौसा: सांसद मुरारीलाल मीणा के क्षेत्र में लालसोट, लवाण, राजावतान, रामगढ़, पचवारा, शिवसिंहपुरा, सिकंदरा और सिकराय में मतदान।
- चूरू: सांसद राहुल कस्वां के क्षेत्र में भानीपुरा, बीदासर, चांदगोठी, राजगढ़, सरदारशहर, सरदारशहर पूर्व, सिद्धमुख और भादरा में वोटिंग।
- धौलपुर-करौली: सांसद भजनलाल जाटव के क्षेत्र में भुसावर, वैर, हिंडौन, सूरौठ और श्रीमहावीरजी में मतदान।
इन 15 विधायकों की प्रतिष्ठा भी चुनाव में दांव पर
इन विधायकों के प्रभाव वाले अंता-केलवाड़ा, तालेड़ा, दौसा, मकराना, परबतसर, धौलपुर, सैपऊ, राजियासर, सूरतगढ़, नोहर, पल्लू, हिंडौन, सूरौठ, महावीरजी, किशनगढ़ बास, नीमराना, बामनवास, दांतारामगढ़, खेरवाड़ा, नयागांव, ऋषभदेव, सरदारशहर और सरदारशहर पूर्व क्षेत्रों में चुनाव हो रहा है।
9 पूर्व मंत्रियों की प्रतिष्ठा का भी होगा फैसला
इन नेताओं के प्रभाव वाले धोरीमन्ना, गिरा, गुड़ामालानी, बागीदौरा, लूणकरणसर, सिकंदरा, सिकराय, नावां, कामां, पहाड़ी, सांचौर, सरवाना, सलूंबर, सेमारी, लालसोट, रामगढ़, शिवसिंहपुरा और नांगल क्षेत्रों में मतदान हो रहा है।
टिकट वितरण से लेकर प्रचार तक नेताओं की रही भूमिका
ऐसे में प्रत्याशियों की जीत और हार का जिम्मा भी काफी हद तक इन्हीं नेताओं के कंधों पर माना जा रहा है। प्रदेश नेतृत्व ने प्रत्याशी चयन के दौरान नेताओं की जिम्मेदारी तय की थी। जीत मिलने पर उन्हें इसका राजनीतिक श्रेय मिलेगा, जबकि हार की स्थिति में उनकी भूमिका पर सवाल उठ सकते हैं।
पंचायत चुनाव को विधानसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट माना जा रहा
यदि उनके क्षेत्र में पार्टी अच्छा प्रदर्शन करती है तो नेताओं का राजनीतिक कद बढ़ सकता है। वहीं, कमजोर प्रदर्शन या हार की स्थिति में उनके जनाधार और राजनीतिक प्रभाव पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
प्रदेश में करीब दो साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव के परिणाम कांग्रेस के सांसदों, विधायकों और पूर्व मंत्रियों की जनता के बीच पकड़ का आकलन करने का अवसर भी बनेंगे।
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