राज्यपाल की केंद्र को भेजी रिपोर्ट भी देख सकेंगे RTI कार्यकर्ता, हाई कोर्ट ने राजभवन में दस्तावेजों के निरीक्षण की दी अनुमति
Neel Tiwari | Nov 03, 2026, 22:48 IST
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने RTI कार्यकर्ता अजय दुबे को राजभवन में राज्यपाल की रिपोर्टों से जुड़े दस्तावेजों का निरीक्षण करने की अनुमति दी।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने RTI कार्यकर्ता अजय दुबे की याचिका पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उन्हें राजभवन में रखे राज्यपाल की रिपोर्टों से जुड़े दस्तावेजों का निरीक्षण करने की अनुमति दी है। ये रिपोर्ट वर्ष 2011 से केंद्र सरकार को भेजी गई थीं। इनमें राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति से जुड़ी जानकारी शामिल है। निरीक्षण के बाद वे जरूरी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां भी मांग सकेंगे।
चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने सुनाया फैसला
सुनवाई के दौरान एकल पीठ के पुराने आदेश और सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी पर विचार किया गया। डिवीजन बेंच ने एकल पीठ के आदेश में संशोधन करते हुए प्रथम अपीलीय अधिकारी के पुराने आदेश को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए।
वर्ष 2011 से राज्यपाल की रिपोर्टों से जुड़ा है मामला
इन रिपोर्टों में मध्य प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति से जुड़े महत्वपूर्ण विवरण शामिल होने की बात सामने आई है। हालांकि, आवेदन करने के बावजूद अजय दुबे को मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही थी। इसके बाद उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत उपलब्ध अपीलीय प्रक्रिया का सहारा लिया।
प्रथम अपीलीय अधिकारी ने 2012 में दिया था आदेश
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अब उसी आदेश को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इससे लंबे समय से लंबित सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
पहले रिकॉर्ड देख सकेंगे, फिर मांगेंगे प्रमाणित प्रतियां
निरीक्षण के बाद वे तय कर सकेंगे कि किन दस्तावेजों की प्रतियां प्राप्त करना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी। संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां भी इसी प्रक्रिया के तहत मांगी जा सकेंगी।
इसका मतलब यह है कि निरीक्षण की अनुमति मिलने से सभी दस्तावेजों की प्रतियां अपने आप उपलब्ध नहीं होंगी। इसके लिए आवश्यक आवेदन और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
एकल पीठ के आदेश में क्यों किया गया संशोधन?
इसी आदेश को प्रभावी बनाने के लिए एकल पीठ के पूर्व आदेश में संशोधन किया गया। इससे याचिकाकर्ता को संबंधित रिकॉर्ड का निरीक्षण करने और आवश्यक दस्तावेजों की प्रतियां मांगने की प्रक्रिया अपनाने का अवसर मिलेगा।
सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच के लिहाज से महत्वपूर्ण फैसला
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को सार्वजनिक प्राधिकारियों के पास उपलब्ध सूचनाएं मांगने का कानूनी अधिकार देता है। इसका उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना और सार्वजनिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
हालांकि, इस अधिकार के तहत जानकारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया कानून में निर्धारित प्रावधानों और लागू अपवादों के अधीन रहती है। ऐसे में दस्तावेजों के निरीक्षण और उनकी प्रतियां हासिल करने के बीच कानूनी अंतर भी महत्वपूर्ण है।
अब राजभवन में होगा संबंधित रिकॉर्ड का निरीक्षण
इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए आवेदन किया जा सकेगा। इस आदेश से वर्ष 2011 से लंबित सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है।
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