एमपी के सरकारी कैलेंडर पर इम्पाला विवाद: हिरण की फोटो से सियासत गरम
Ramanand Tiwari | Feb 28, 2026, 24:04 IST
impala controversy
मध्यप्रदेश सरकार के सरकारी कैलेंडर पर विवाद खड़ा हो गया है। दिग्विजय सिंह ने कैलेंडर पर छपी हिरण की तस्वीर पर सवाल उठाए। उनका दावा है कि यह हिरण नहीं, अफ्रीकी इम्पाला है।
BHOPAL. मध्यप्रदेश सरकार की सरकारी डायरी के बाद अब शासकीय कैलेंडर भी विवादों में है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कैलेंडर पर छपी हिरण की तस्वीर को लेकर सवाल उठाया है। उनका दावा है कि यह इम्पाला है, जो न मध्यप्रदेश में पाया जाता है और न ही भारत में, बल्कि अफ्रीका का वन्यप्राणी है। इस आरोप के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर कैलेंडर की तस्वीर साझा करते हुए मुख्यमंत्री से सवाल किया। उन्होंने लिखा कि जिस हिरण की तस्वीर कैलेंडर पर छपी है, वह भारत का नहीं है। उनके अनुसार यह इम्पाला प्रजाति है, जो अफ्रीकी देशों में पाई जाती है। इस पोस्ट के बाद मामला राजनीतिक मुद्दा बन गया।
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सरकारी कैलेंडर में हिरण की तस्वीर पर विवाद दिग्विजय सिंह का दावा यह अफ्रीकी ‘इम्पाला’ है। कांग्रेस ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताया। सरकार ने विपक्ष पर नकारात्मक राजनीति का आरोप लगाया आधिकारिक स्पष्टीकरण अब भी बाकी मुद्दा सिर्फ फोटो का या प्रक्रिया का? यह विवाद सिर्फ एक तस्वीर तक सीमित नहीं है।
सवाल यह भी है कि सरकारी प्रकाशनों की सामग्री और छवियों की जांच कैसे होती है। अगर तस्वीर वाकई विदेशी प्रजाति की है, तो चयन प्रक्रिया पर पुनर्विचार की जरूरत पड़ सकती है। अब निगाह इस पर है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या स्पष्ट जवाब देती है और भविष्य में ऐसी त्रुटियों से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
अब तक राज्य सरकार की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसी वजह से विपक्ष इसे प्रशासनिक लापरवाही से जोड़कर देख रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि शासकीय प्रकाशनों में तस्वीरों के चयन की प्रक्रिया क्या है और जांच कैसे होती है।
कांग्रेस नेताओं के तीखे बयानपूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने इसे बड़ी त्रुटि बताया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वन्यजीव संपदा के लिए देश में अग्रणी रहा है, ऐसे में बाहरी प्रजाति की तस्वीर छापना गंभीर चूक है। उनका तर्क है कि अगर यह गलती हुई है, तो संबंधित विभाग और अधिकारी जिम्मेदार हैं।
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कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपए खर्च कर शासकीय साहित्य छापा जाता है, लेकिन यह तक नहीं देखा जाता कि उसमें क्या प्रकाशित हो रहा है। उनके अनुसार यह प्रशासनिक अराजकता का संकेत है।
हास्यास्पद कार्यशैली का आरोप लगाते हुए कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई ने कहा कि भारत में शेर, चीता और अन्य वन्यजीवों की भरमार है। इसके बावजूद अफ्रीकी प्रजाति की तस्वीर लगाना हास्यास्पद है। उन्होंने इसे अधिकारियों की लापरवाही बताया। सरकार का पलटवार सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। सरकार की ओर से फिलहाल तस्वीर की प्रामाणिकता पर सीधा जवाब नहीं दिया गया है।
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क्या है पूरा मामला?
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दिग्विजय सिंह ने उठाए सवाल
सवाल यह भी है कि सरकारी प्रकाशनों की सामग्री और छवियों की जांच कैसे होती है। अगर तस्वीर वाकई विदेशी प्रजाति की है, तो चयन प्रक्रिया पर पुनर्विचार की जरूरत पड़ सकती है। अब निगाह इस पर है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या स्पष्ट जवाब देती है और भविष्य में ऐसी त्रुटियों से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
कांग्रेस नेताओं के तीखे बयानपूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने इसे बड़ी त्रुटि बताया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वन्यजीव संपदा के लिए देश में अग्रणी रहा है, ऐसे में बाहरी प्रजाति की तस्वीर छापना गंभीर चूक है। उनका तर्क है कि अगर यह गलती हुई है, तो संबंधित विभाग और अधिकारी जिम्मेदार हैं।
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अधिकारियों को पता ही नहीं क्या छाप रहे
हास्यास्पद कार्यशैली का आरोप लगाते हुए कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई ने कहा कि भारत में शेर, चीता और अन्य वन्यजीवों की भरमार है। इसके बावजूद अफ्रीकी प्रजाति की तस्वीर लगाना हास्यास्पद है। उन्होंने इसे अधिकारियों की लापरवाही बताया। सरकार का पलटवार सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। सरकार की ओर से फिलहाल तस्वीर की प्रामाणिकता पर सीधा जवाब नहीं दिया गया है।
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