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NEWS IN SHORT
. छत्तीसगढ़ की आबकारी रिपोर्ट में चौकाने वाले खुलासा
. एक साल में 7 हजार करोड़ की कमाई
. शराब घोटाले की आरोपी तीन कंपनियों से भी खरीदी शराब
. कार्पोरेशन की शुद्ध बजट सिर्फ 14 करोड़ रुपए
. सरकार को सौंपी साल 2024-25 की रिपोर्ट
NEWS IN DETAIL
घोटाले की आरोपी कंपनियों से खरीदी शराब :
छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग ने सरकार को साल 2024-25 की सालाना रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में साल भर में शराब की खरीदी,बिक्री और बचत की पूरी जानकारी दी गई है। शराब का ये पूरा कारोबार छत्तीसगढ़ बेवरेज कार्पोरेशन करता है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि छत्तीसगढ़ में पिछली सरकार के समय हुए 3 हजार करोड़ के शराब घोटाले की आरोपी तीन डिस्टलरी कंपनियों से भी शराब खरीदी है।
यानी एक तरफ तो शराब घोटाले को लेकर पिछली भूपेश सरकार पर भाजपा ने जमकर आरोप लगाए लेकिन बीजेपी की ही सरकार आई तो इस घोटाले की आरोपी कंपनियों से कारोबार जारी रखा।
इन तीन आरोपी कंपनियों से खरीदी शराब :
- विदेशी मदिरा निर्माण और भराई के लिए छत्तीसगढ़ डिस्टलरीज लिमिटेड, इसका प्लांट दुर्ग जिले के कुम्हारी में है।
- विदेशी मदिरा निर्माण और भराई के लिए वेलकम डिस्टलरीज प्रायवेट लिमिटेड, इसका प्लांट बिलासपुर जिले के छेकरबांधा में है।
- विदेशी मदिरा निर्माण और भराई के लिए भाटिया वाइन मर्चेंट प्रायवेट लिमिटेड, इसका मुंगेली के ग्राम धूमा में प्लांट है।
प्रदेश में शराब की इतनी दुकाने :
साल 2021-22 - 662
साल 2022-23 - 671
साल 2023-24 - 672
साल 2024-25 - 674
शराब की दुकानों से इतनी कमाई :
साल 2021-22 - 5110 करोड़ रुपए
साल 2022-23 - 6783 करोड़ रुपए
साल 2023-24 - 8430 करोड़ रुपए
साल 2024-25 - 7300 करोड़ रुपए
66 फीसदी ही लक्ष्य पूरा :
सरकार इस साल 66 फीसदी टारगेट पूरा कर पाई। इस साल 11 हजार करोड़ रुपए कमाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इस 11 हजार करोड़ लक्ष्य के मुकाबले कार्पोरेशन को 7 हजार 3 सौ करोड़ रुपए की ही राजस्व आय हुई। यानी बेवरेज कार्पोरेशन ने 66 फीसदी ही लक्ष्य हासिल करने में सफलता पाई। रिपोर्ट में एक और बात का उल्लेख किया गया है।
इसमें कार्पोरेशन की आर्थिक स्थिति बताई गई है। इसमें शराब के गोदामों का किराया समेत अन्य व्यय शामिल हैं। इसमें बताया गया है कि साल 2025-26 में निगम को शराब से शुद्ध बचत 14 करोड़ रुपए है। हालांकि ये तकनीकी विषय है। कार्पोरेशन अपने फॉर्मूले से आय व्यय का हिसाब किताब निकालता है। लेकिन रिपोर्ट का यह कॉलम नोटिस में तो आता है।
अब आगे क्या :
सरकार अब नई लिकर पॉलिसी ला रही है। यह नई आबकारी नीति 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। इस नीति में भी शराब बेचने का जिम्मा सरकार के बेवरेज कार्पोरेशन के जिम्मे ही रहेगा। इस साल सरकार का टारगेट 11 हजार करोड़ था लेकिन कमाई 7 हजार करोड़ रुपए की ही हुई।
इस नई पॉलिसी में कुछ बदलाव किया जा रहा है जिससे सरकार की कमाई में इजाफा हो और टारगेट पूरा किया जा सके। इसके अलावा दूसरे प्रदेशों से आ रही अवैध और नकली शराब को रोकने के लिए भी सरकार कार्ययोजना बना रही है।
Sootr Knowledge :
छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार में शराब घोटाला हुआ था। यह घोटाला तीन हजार करोड़ रुपए से उपर का है। इस घोटाले में तत्कालीन मंत्री कवासी लखमा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल तक जेल में बंद रह चुके हैं। इनके अलावा कई कारोबारी और अफसर अभी भी जेल में बंद हैं। इस घोटाले में आरोपी कुछ शराब कंपनियों को भी बनाया गया है। लेकिन उनमें से भी कुछ शराब कंपनियां अभी भी सरकार के साथ कारोबार कर रही हैं।
डाक्यूमेंट :
सरकारी रिपोर्ट के दस्तावेज
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निष्कर्ष :
हर सरकार का कामकाज कमाई के मामले में बहुत ज्यादा अलग नजर नहीं आता। शराब और डीजल,पेट्रोल सरकार की कमाई के सबसे बड़े सोर्स हैं। जीएसटी के बाद राज्य सरकार की कमाई के यही साधन रह गए हैं। यही कारण है कि उन लोगों को भी काम मिल रहा है जो शराब घोटाले में आरोपी हैं।
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