छत्तीसगढ़ी भाषा में पढ़ाई पर फैसला नहीं लेने से हाईकोर्ट नाराज, स्कूल शिक्षा सचिव को अवमानना नोटिस
Umeshwari Baghel | Nov 01, 2026, 16:53 IST
छत्तीसगढ़ी में पढ़ाई पर फैसला टालने से हाईकोर्ट नाराज, स्कूल शिक्षा सचिव को अवमानना नोटिस भेजा।
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में छत्तीसगढ़ी भाषा की पढ़ाई का मुद्दा फिर चर्चा में है। हाईकोर्ट ने इस पर राज्य शासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। यह स्कूलों में छत्तीसगढ़ी भाषा। का मामला है। कोर्ट के पहले के आदेश के बावजूद तीन महीने में कोई ठोस फैसला नहीं हुआ, ऐसा याचिकाकर्ता का आरोप है। इसी पर हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- बिलासपुर के शीतल पाटनवर ने जनहित याचिका दाखिल की थी।
- कोर्ट ने शासन को छत्तीसगढ़ी की पढ़ाई पर तीन महीने में फैसला लेने को कहा था।
- याचिकाकर्ता के मुताबिक तय समय के बाद भी ठोस फैसला नहीं हुआ।
- उन्होंने अवमानना याचिका दायर की।
- हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
जनहित याचिका में क्या मांग थी?
साथ ही मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा के महत्व और संविधान के अनुच्छेद 350-क का भी जिक्र हुआ। याचिकाकर्ता का तर्क था कि बच्चों को शुरुआती शिक्षा मातृभाषा में देने की दिशा में सरकार को कदम उठाना चाहिए।
कोर्ट ने पहले क्या निर्देश दिया था?
अवमानना याचिका क्यों लगी?
कोर्ट ने क्या कदम उठाया?
क्या सचिव को दोषी ठहरा दिया गया?
याचिकाकर्ता की और क्या मांगें हैं?
उन्होंने यह भी मांग रखी कि छत्तीसगढ़ी में उच्च शिक्षा या डिग्री पाने वाले युवाओं को रोजगार के मौके मिलें। उनका मानना है कि भाषा के संरक्षण और विकास के लिए पढ़ाई के साथ रोजगार की संभावनाएं भी बनानी होंगी।
अब आगे क्या?
यह खबर क्यों जरूरी है
FAQ
जवाब: स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह को। कोर्ट ने उनसे जवाब मांगा है।
सवाल: ये अवमानना याचिका मामला क्या है?
जवाब: बिलासपुर के शीतल पाटनवर की जनहित याचिका पर कोर्ट ने सरकार को तीन महीने में छत्तीसगढ़ी की पढ़ाई पर फैसला लेने को कहा था। याचिकाकर्ता के मुताबिक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ, इसलिए अवमानना याचिका दाखिल हुई।
सवाल: क्या सचिव को दोषी ठहरा दिया गया है?
जवाब: नहीं। नोटिस जारी होने का मतलब दोषी घोषित करना नहीं है। अंतिम फैसला आगे की कार्यवाही के बाद ही होगा।
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