छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला : फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वालों की खैर नहीं; रुकेगी पेंशन और ग्रेच्युटी
NEWS IN SHORT
- फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर बिलासपुर हाई कोर्ट का कड़ा फैसला
- नियुक्ति के आधार पर पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ पर सवाल
- पीएल. नायक की याचिका को हाई कोर्ट ने किया खारिज
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा है जाति प्रमाण पत्र का महत्व
- फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में 267 अधिकारियों के प्रमाण पत्र रद्द
NEWS IN DETAIL
Bilaspur। CG News :छत्तीसगढ़ के (Bilaspur High Court) बिलासपुर हाई कोर्ट ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी करने वालों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी कर्मचारी या अधिकारी की नियुक्ति फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर हुई है और यह प्रमाण पत्र गलत पाया जाता है, तो वह कर्मचारी पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ का हकदार नहीं होगा।
क्या था मामला?
cg news hindi :रायपुर के कृष्णापुरी, अमलीडीह निवासी पीएल. नायक की नियुक्ति सहायक संचालक के पद पर बंजारा जाति के आधार पर अनुसूचित जाति कोटे से हुई थी। हालांकि, बाद में जांच में यह साबित हो गया कि छत्तीसगढ़ में बंजारा जाति अनुसूचित जाति के तहत नहीं आती, बल्कि यह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में आती है।
नायक को 30 जून 2021 को जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय से डिप्टी डायरेक्टर के पद से रिटायर किया गया था। लेकिन राज्य सरकार ने उनकी पेंशन, ग्रेच्युटी, जीपीएफ और अन्य लाभ रोक दिए। नायक ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराया।
हाई कोर्ट का निर्णय
cg news aaj ki :कोर्ट ने कहा कि पेंशन एक संपत्ति का अधिकार है, ना कि खैरात। यह अधिकार सिर्फ उन्हीं को मिल सकता है, जिनकी नियुक्ति वैध हो। कोर्ट ने नायक की याचिका खारिज करते हुए यह भी कहा कि जाति प्रमाण पत्र की वैधता की जांच किसी भी समय की जा सकती है, यहां तक कि रिटायरमेंट के बाद भी।
क्या कहते हैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले?
सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने कई अहम फैसलों में फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वालों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उदाहरण के तौर पर, माधुरी पाटिल के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हर राज्य में उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति का गठन अनिवार्य किया था। साथ ही, एफसीआई विरुद्ध बलराम बहिरा के मामले में कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी ने अनजाने में भी गलत प्रमाण पत्र पर आरक्षित पद हासिल किया है तो उसे हटाया जाना चाहिए।
फर्जी जाति प्रमाण पत्र की जांच
छत्तीसगढ़ में अब तक 758 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। इनमें से 267 अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रमाण पत्र अमान्य पाए गए हैं। राज्य सरकार ने इन मामलों में जांच के बाद कई कर्मचारियों के जाति प्रमाण पत्र रद्द किए हैं, और कई पर हाई कोर्ट से स्टे भी जारी किया है।
आखिरकार, क्या है सरकार का कदम?
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से अब तक फर्जी जाति प्रमाण पत्र के कुल 758 मामले सामने आए हैं। उच्च स्तरीय छानबीन समिति की जांच में इनमें से 267 अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग ने इन दागी कर्मचारियों की आधिकारिक सूची भी जारी कर दी है, जिसमें मंत्रालय, स्वास्थ्य, राजस्व और खेल विभाग जैसे बड़े विभागों के नाम शामिल हैं। हालांकि, विभाग की इस सख्ती के बावजूद कार्रवाई अटकी हुई है, क्योंकि इनमें से ज्यादातर मामलों में कर्मचारियों ने हाई कोर्ट से Stay Order ले लिया है।
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