POCSO केस में अपील से पहले पीड़ित को देना होगा नोटिस : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
समझें क्या है पूरा मामला
- POCSO केस में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
- अपील से पहले पीड़ित को देना होगा नोटिस
- पीड़ित को कानूनी मदद का अधिकार सुरक्षित
- कोर्ट ने पुलिस को दी नई जिम्मेदारी
- अगली सुनवाई में पीड़ित रख सकेगा पक्ष
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि किसी भी अपील की सुनवाई शुरू करने से पहले पीड़ित बच्चे या उसके माता-पिता को इसकी जानकारी देना जरूरी होगा। बिना नोटिस दिए अपील पर सुनवाई आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।
हाई कोर्ट ने यह आदेश अजय मिरी बनाम छत्तीसगढ़ शासन मामले में सुनवाई करते हुए दिया है। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास और जस्टिस सुधीर कुमार की डिवीजन बेंच ने कहा कि पॉक्सो कानून पीड़ित बच्चे को कानूनी सहायता पाने का अधिकार देता है। इसलिए उसे अदालत की कार्रवाई की जानकारी मिलना जरूरी है।
पीड़ित को कानूनी मदद का अधिकार
मामले की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि पॉक्सो एक्ट में अपील की सुनवाई से पहले पीड़ित को नोटिस देने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसलिए पीड़ित की अनुपस्थिति में भी अदालत अपील पर फैसला कर सकती है।
इस दलील का शासन की ओर से विरोध किया गया। सरकारी पक्ष ने कहा कि अगर पीड़ित को जानकारी नहीं दी जाएगी तो वह अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाएगा। पॉक्सो एक्ट की धारा 40 पीड़ित बच्चे और उसके परिवार को अपनी पसंद के वकील से सहायता लेने का अधिकार देती है।
हाई कोर्ट ने बताई पुलिस की जिम्मेदारी
हाई कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट की धारा 40 और पॉक्सो नियम 2020 के नियम 4(13) का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी है कि पीड़ित बच्चे उसके माता-पिता या अभिभावक को केस से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराए।
इसमें आरोपी की गिरफ्तारी कोर्ट में दाखिल आवेदन और अन्य न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी देना शामिल है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित को जानकारी मिलने से वह अपनी बात रखने के लिए कानूनी सहायता ले सकता है।
रजिस्ट्री को नोटिस जारी करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने मामले में रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि संबंधित थाना प्रभारी के माध्यम से पीड़ित शिकायतकर्ता या उसके अभिभावक को नोटिस भेजा जाए। उन्हें अगली सुनवाई की जानकारी दी जाए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़ित पक्ष खुद अदालत में उपस्थित होकर या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की मदद से अपना पक्ष रख सकता है। इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या हाई कोर्ट सहायता केंद्र के माध्यम से भी अपनी बात रखी जा सकती है।
अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी
इस मामले में हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 3 नवंबर 2026 तय की है। कोर्ट के इस फैसले के बाद पॉक्सो मामलों में अपील प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।
अब ऐसे मामलों में आरोपी की अपील पर सुनवाई से पहले पीड़ित पक्ष को सूचना देना जरूरी होगा। इससे पीड़ित को न्यायिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी का अवसर मिलेगा।
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