छत्तीसगढ़ में पहली महिला ओपन जेल, दिन में करेंगी काम, शाम को लौटेंगी जेल
Arun Tiwari | Sept 26, 2026, 14:51 IST
छत्तीसगढ़ में पहली महिला ओपन जेल
छत्तीसगढ़ में महिला बंदिनियों के पुनर्वास के लिए पहली महिला खुली जेल की शुरुआत रायपुर केंद्रीय जेल में की गई है। यहां 25 महिला बंदिनियों के रहने की व्यवस्था है।
छत्तीसगढ़ में महिला बंदिनियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल की गई है। केंद्रीय जेल रायपुर में राज्य की पहली महिला खुली जेल की शुरुआत की गई है।
छत्तीसगढ़ में पहली बार महिलाओं के लिए इस तरह की खुली जेल की व्यवस्था शुरू की गई है। इसका उद्देश्य केवल महिला बंदिनियों को जेल परिसर में रखने के बजाय उन्हें नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण में रोजगार से जोड़ना और आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराना है। इसके तहत चयनित महिला बंदिनियों को दिन के समय जेल की निर्धारित सीमाओं से बाहर जाकर काम करने की अनुमति होगी और शाम को उन्हें वापस जेल परिसर में लौटना होगा।
रायपुर केंद्रीय जेल में उपलब्ध अधोसंरचना का उपयोग करते हुए महिला ओपन जेल विकसित की गई है। इसमें फिलहाल 25 महिला बंदिनियों के रहने की व्यवस्था की गई है। यहां रहने वाली बंदिनियां सुबह निर्धारित समय पर अपने कार्यस्थल के लिए जेल से बाहर निकलेंगी। दिनभर काम करने के बाद वे शाम को जेल में वापस लौटेंगी।
जेल में लॉकअप की प्रक्रिया शुरू होने से पहले सभी बंदिनियों की वापसी सुनिश्चित की जाएगी।खुली जेल की व्यवस्था में बंदिनियों को अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्र वातावरण में रहने और काम करने का अवसर मिलेगा, लेकिन इसके साथ निर्धारित नियमों और अनुशासन का पालन भी जरूरी होगा। इस व्यवस्था के माध्यम से बंदिनियों को जिम्मेदारी के साथ काम करने और सामान्य जीवन की ओर लौटने के लिए तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।
महिला बंदिनियों को जेल की ऊंची दीवारों के भीतर सीमित रखने के बजाय उन्हें कौशल आधारित कार्यों से जोड़ने की योजना बनाई गई है। केंद्रीय जेल रायपुर परिसर में मंदिर के पास स्थित परिसर में उनके लिए सिलाई सेंटर, ब्यूटी पार्लर और जेल उत्पादों के बिक्री केंद्र की व्यवस्था की गई है। महिला बंदिनियां इन केंद्रों में काम कर सकेंगी।
सिलाई से जुड़े कार्यों के साथ ही ब्यूटी पार्लर और जेल में तैयार किए जाने वाले विभिन्न उत्पादों की बिक्री से उन्हें काम का अनुभव मिलेगा। इसके अलावा उनके लिए रोजगार के अन्य वैकल्पिक साधन भी उपलब्ध कराने की योजना है। इससे बंदिनियों को अपनी कार्यक्षमता और रुचि के अनुसार रोजगार का विकल्प चुनने का अवसर मिल सकेगा।
महिला ओपन जेल की शुरुआत को जेल प्रशासन की ओर से बंदिनियों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जेल में रहने के दौरान बंदिनियों को रोजगार और कौशल से जोड़ने से उन्हें भविष्य में सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिल सकती है। रोजगार के माध्यम से वे कामकाजी अनुशासन, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता का अनुभव भी हासिल कर सकेंगी।
इस पहल के पीछे यह विचार है कि जेल की सजा पूरी करने के बाद बंदिनियों के सामने रोजगार और सामाजिक पुनर्वास की चुनौती कम हो। उन्हें काम का अनुभव और कौशल मिलने से रिहाई के बाद अपने पैरों पर खड़े होने के अवसर बढ़ सकते हैं।
महिला खुली जेल में रहने वाली बंदिनियों को जेल प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करना होगा। सुबह काम के लिए बाहर जाने और शाम को वापस जेल आने की व्यवस्था निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार संचालित की जाएगी। इस दौरान सुरक्षा और अनुशासन से जुड़े प्रावधानों का भी पालन कराया जाएगा।
केंद्रीय जेल रायपुर में शुरू हुई यह व्यवस्था छत्तीसगढ़ में महिला बंदिनियों के लिए जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली में एक नए मॉडल की शुरुआत है। आने वाले समय में इसके संचालन और अनुभव के आधार पर महिला बंदिनियों के लिए रोजगार, कौशल विकास और पुनर्वास से जुड़ी अन्य गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।
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छत्तीसगढ़ में पहली बार महिलाओं के लिए इस तरह की खुली जेल की व्यवस्था शुरू की गई है। इसका उद्देश्य केवल महिला बंदिनियों को जेल परिसर में रखने के बजाय उन्हें नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण में रोजगार से जोड़ना और आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराना है। इसके तहत चयनित महिला बंदिनियों को दिन के समय जेल की निर्धारित सीमाओं से बाहर जाकर काम करने की अनुमति होगी और शाम को उन्हें वापस जेल परिसर में लौटना होगा।
25 महिला बंदिनियों के रहने की व्यवस्था:
जेल में लॉकअप की प्रक्रिया शुरू होने से पहले सभी बंदिनियों की वापसी सुनिश्चित की जाएगी।खुली जेल की व्यवस्था में बंदिनियों को अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्र वातावरण में रहने और काम करने का अवसर मिलेगा, लेकिन इसके साथ निर्धारित नियमों और अनुशासन का पालन भी जरूरी होगा। इस व्यवस्था के माध्यम से बंदिनियों को जिम्मेदारी के साथ काम करने और सामान्य जीवन की ओर लौटने के लिए तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।
सिलाई सेंटर और ब्यूटी पार्लर में मिलेगा रोजगार:
सिलाई से जुड़े कार्यों के साथ ही ब्यूटी पार्लर और जेल में तैयार किए जाने वाले विभिन्न उत्पादों की बिक्री से उन्हें काम का अनुभव मिलेगा। इसके अलावा उनके लिए रोजगार के अन्य वैकल्पिक साधन भी उपलब्ध कराने की योजना है। इससे बंदिनियों को अपनी कार्यक्षमता और रुचि के अनुसार रोजगार का विकल्प चुनने का अवसर मिल सकेगा।
आत्मनिर्भरता और पुनर्वास पर जोर:
इस पहल के पीछे यह विचार है कि जेल की सजा पूरी करने के बाद बंदिनियों के सामने रोजगार और सामाजिक पुनर्वास की चुनौती कम हो। उन्हें काम का अनुभव और कौशल मिलने से रिहाई के बाद अपने पैरों पर खड़े होने के अवसर बढ़ सकते हैं।
नियमों के तहत संचालित होगी व्यवस्था:
केंद्रीय जेल रायपुर में शुरू हुई यह व्यवस्था छत्तीसगढ़ में महिला बंदिनियों के लिए जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली में एक नए मॉडल की शुरुआत है। आने वाले समय में इसके संचालन और अनुभव के आधार पर महिला बंदिनियों के लिए रोजगार, कौशल विकास और पुनर्वास से जुड़ी अन्य गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।
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