स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा रद्द करने के खिलाफ सभी याचिकाएं खारिज, नए सिरे से होगी भर्ती

Harrison Masih | Nov 03, 2026, 12:57 IST
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गड़बड़ियों के फेर में फंसी स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर भर्ती: हाईकोर्ट ने खारिज की याचिकाएं, सरकार को नए सिरे से परीक्षा के निर्देश
गड़बड़ियों के फेर में फंसी स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर भर्ती: हाईकोर्ट ने खारिज की याचिकाएं, सरकार को नए सिरे से परीक्षा के निर्देश

स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर बनने का सपना देख रहे कर्मचारियों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। साल 2021 और 2022 में हुई विभागीय भर्ती परीक्षा को रद्द करने के सरकार के फैसले को हाईकोर्ट ने सही माना है। परीक्षा में गंभीर गड़बड़ियां सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसे निरस्त कर दिया था।

इसके खिलाफ प्रभावित कर्मचारियों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब हाईकोर्ट ने इन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस बीडी गुरु की पीठ ने परीक्षा और उसके आधार पर जारी नियुक्ति आदेशों को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा है। साथ ही सरकार को नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और उसे जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

  • वाणिज्यिक कर विभाग में सहायक ग्रेड-3 कर्मचारियों के लिए स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति के लिए परीक्षा हुई थी।
  • दोनों साल हुई विभागीय परीक्षा में कई कर्मचारी शामिल हुए और सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति भी मिल गई।
  • परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं और गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं।
  • राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई। समिति ने दस्तावेजों की जांच की।
  • जांच में कई खामियां सामने आईं। इसके बाद परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करने का फैसला लिया गया।
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नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) की सहायक फोरमैन भर्ती 2026 को लेकर विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। कंपनी ने परीक्षा के दो केंद्रों पर कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित साधनों का इस्तेमाल करते पाए जाने के बाद पूरी भर्ती परीक्षा रद्द कर दी थी। अब इस फैसले को उन अभ्यर्थियों ने चुनौती दी है, जो परीक्षा में सफल होकर दस्तावेज सत्यापन की सूची में जगह बना चुके थे।
नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) की सहायक फोरमैन भर्ती 2026 को लेकर विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। कंपनी ने परीक्षा के दो केंद्रों पर कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित साधनों का इस्तेमाल करते पाए जाने के बाद पूरी भर्ती परीक्षा रद्द कर दी थी। अब इस फैसले को उन अभ्यर्थियों ने चुनौती दी है, जो परीक्षा में सफल होकर दस्तावेज सत्यापन की सूची में जगह बना चुके थे।

सरकार ने 11 सितंबर 2026 को रद्द की थी परीक्षा

जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद वाणिज्यिक कर विभाग ने कार्रवाई की। विभाग ने 11 सितंबर 2026 को भर्ती परीक्षा रद्द करने का आदेश जारी किया। इसके साथ ही परीक्षा के आधार पर जारी नियुक्ति आदेशों को भी निरस्त कर दिया गया।

सरकार के इस फैसले से उन कर्मचारियों को झटका लगा, जिन्हें परीक्षा में सफल होने के बाद स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर बनाया गया था। प्रभावित कर्मचारियों ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका कहना था कि परीक्षा में चयनित होने के बाद उन्हें नियुक्ति दी गई थी। ऐसे में भर्ती रद्द करने से उनके हित प्रभावित हो रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं ने सरकार के फैसले को अवैधानिक बताया। उन्होंने कोर्ट से भर्ती निरस्त करने के आदेश को रद्द करने की मांग की थी।

10-20 साल की नौकरी के बाद भी नियमितीकरण नहीं, हाईकोर्ट ने 350 संविदा कर्मचारियों की 13 याचिकाएं खारिज कीं | No regularization even after 10-20 years of service, High Court dismisses 13 petitions of 350 contract employees
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से करीब 350 संविदा कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने नियमितीकरण की मांग से जुड़ी 13 याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इनमें मनरेगा और मध्य प्रदेश पुलिस आवास एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम के कर्मचारी शामिल थे। ये कर्मचारी उप इंजीनियर के पदों पर कार्यरत हैं।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से करीब 350 संविदा कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने नियमितीकरण की मांग से जुड़ी 13 याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इनमें मनरेगा और मध्य प्रदेश पुलिस आवास एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम के कर्मचारी शामिल थे। ये कर्मचारी उप इंजीनियर के पदों पर कार्यरत हैं।

जांच में सामने आईं कई गंभीर गड़बड़ियां

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जांच रिपोर्ट पेश की गई। इसमें परीक्षा से जुड़ी कई अनियमितताओं का जिक्र था। जांच में उत्तरपुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन से संबंधित जरूरी प्रक्रिया और मंजूरी के रिकॉर्ड नहीं मिले।

इसके अलावा उत्तरपुस्तिकाओं के पन्नों पर क्रमांक भी नहीं थे। कई उत्तरपुस्तिकाएं एक-दूसरे से बंधी हुई भी नहीं मिलीं। इससे परीक्षा के रिकॉर्ड और उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए।

जांच के दौरान आंसरशीट की खरीद और इस्तेमाल से जुड़ा अंतर भी सामने आया। खरीदी गई आंसरशीट और परीक्षा के बाद बची हुई आंसरशीट की संख्या में अंतर पाया गया। इतना ही नहीं, कुछ अभ्यर्थियों के जवाब मॉडल उत्तरों से हूबहू मेल खाते थे।

इन सभी बातों को कोर्ट के सामने रखा गया। सुनवाई के दौरान इन गड़बड़ियों को परीक्षा की पूरी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया।

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500 से ज्यादा अभ्यर्थियों की परीक्षा पर उठे सवाल

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान एक अहम बात कही। इस भर्ती परीक्षा में 500 से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। जांच में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई थीं। ऐसे में यह तय करना संभव नहीं था कि किन अभ्यर्थियों को इन अनियमितताओं का फायदा मिला।

कोर्ट के सामने यह भी सवाल था कि जब परीक्षा की प्रक्रिया में ही गंभीर खामियां मिली हैं, तो उसके आधार पर जारी नियुक्तियों को किस तरह सही माना जा सकता है।

हाईकोर्ट ने जांच में सामने आए तथ्यों को ध्यान में रखते हुए माना कि परीक्षा में गंभीर अनियमितताएं हुई थीं। इसलिए सरकार का परीक्षा और उसके आधार पर जारी नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला उचित था।

हाईकोर्ट ने खारिज की याचिकाएं

जस्टिस बीडी गुरु ने मामले की सुनवाई के बाद प्रभावित कर्मचारियों की याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें विभागीय भर्ती परीक्षा और उसके आधार पर जारी नियुक्ति आदेशों को निरस्त किया गया था।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सरकार को नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह प्रक्रिया जल्द पूरी करने को भी कहा है।

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सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी बनाने की मांग हुई है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की गई है। यह याचिका एनजीओ लोक प्रहरी की ओर से दायर की गई है। इसमें CJI और केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने प्रक्रिया ज्ञापन (MoP) अंतिम करने की मांग की है।
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अब नए सिरे से होगी भर्ती प्रक्रिया

हाईकोर्ट के फैसले के बाद स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर के पदों पर विभागीय भर्ती का रास्ता नए सिरे से खुलेगा। वाणिज्यिक कर विभाग को अब दोबारा भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इसे जल्द पूरा करने का निर्देश भी दिया गया है।

इस फैसले से साफ है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन जरूरी है। परीक्षा में शामिल हुए 500 से अधिक अभ्यर्थियों से जुड़ा यह मामला अब नए सिरे से होने वाली भर्ती प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। वहीं, पहले चयनित कर्मचारियों की याचिकाएं खारिज होने के बाद सरकार का परीक्षा रद्द करने का फैसला बरकरार रहेगा।
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