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NEWS IN SHORT
- हाईकोर्ट ने शिक्षाकर्मियों की पुरानी सेवा की गणना कर ओपीएस का लाभ देने की नीति बनाने के निर्देश दिए।
- सहायक शिक्षक और एलबी संवर्ग के शिक्षकों की याचिका पर जस्टिस एके प्रसाद की बेंच में सुनवाई हुई।
- कोर्ट ने कहा—संविलियन से पहले की सेवा को नज़रअंदाज़ करना गलत।
- पेंशन को दान नहीं बल्कि “आस्थगित वेतन” बताते हुए सरकार की आपत्ति खारिज की।
- शासन को 1 जुलाई 2018 से पूर्व की सेवाओं को पेंशन गणना में शामिल करने पर स्पष्ट नियम बनाने होंगे।
NEWS IN DETAIL
ओपीएस को लेकर शिक्षकों को बड़ी राहत
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक शिक्षक, शिक्षाकर्मी और एलबी संवर्ग के शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए शासन को निर्देश दिया है कि उनकी पुरानी सेवाओं की गणना कर पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) का लाभ देने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए।
याचिकाकर्ता शिक्षकों की प्रारंभिक नियुक्ति वर्ष 1998–99 में सहायक शिक्षक/शिक्षाकर्मी (पंचायत/नगरी निकाय) के रूप में हुई थी। वे लगातार सेवाएं दे रहे थे और 1 जुलाई 2018 को उनका संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में किया गया।
एनपीएस लागू, लेकिन गणना अस्पष्ट
राज्य शासन ने 1 अप्रैल 2012 से पंचायत/नगरी निकाय शिक्षकों के लिए नवीन अंशदाई पेंशन योजना (NPS) लागू की थी, जिसके तहत वेतन का 10% अंशदान किया जा रहा था। हालांकि संविलियन के बाद सेवा गणना को लेकर कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया गया।
राज्य सरकार ने तर्क दिया कि शिक्षक 1 जुलाई 2018 के बाद ही स्कूल शिक्षा विभाग के कर्मचारी बने हैं और उससे पहले की सेवाओं को पेंशन में नहीं जोड़ा जा सकता। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल संवर्ग बदलने से वर्षों की सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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पेंशन दान नहीं, आस्थगित वेतन
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि पेंशन कोई दान नहीं बल्कि कर्मचारियों का आस्थगित वेतन है। वर्षों की निरंतर सेवा को केवल संविलियन की तिथि के आधार पर खारिज करना असंवैधानिक है।
नीति बनाने के निर्देश
हाईकोर्ट ने शासन को निर्देश दिया है कि 1 जुलाई 2018 से पहले की सेवाओं को पेंशन गणना में शामिल करने और 10 वर्ष की सेवा अनिवार्यता को लेकर स्पष्ट, पारदर्शी नियम बनाए जाएं।
Sootr Knowledge
- OPS में पेंशन अंतिम वेतन के आधार पर तय होती है।
- NPS में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का अंशदान होता है।
- संविलियन का अर्थ सेवाओं का शासकीय विभाग में समायोजन है।
- पेंशन को न्यायालय ने “Deferred Salary” माना है।
- सेवा की निरंतरता संवैधानिक समानता का महत्वपूर्ण तत्व है।
IMP FACTS
- प्रारंभिक नियुक्ति: 1998–99
- संविलियन तिथि: 1 जुलाई 2018
- एनपीएस लागू: 1 अप्रैल 2012
- सुनवाई बेंच: न्यायमूर्ति एके प्रसाद
- प्रमुख अधिवक्ता: मतीन सिद्दीकी
आगे क्या
- राज्य सरकार नई पेंशन नीति बनाएगी
- पात्र शिक्षकों की सेवा गणना पर पुनर्विचार
- OPS लाभ को लेकर आगे आदेश जारी हो सकते हैं
निष्कर्ष
हाईकोर्ट का यह फैसला छत्तीसगढ़ के हजारों शिक्षकों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। वर्षों की सेवा को मान्यता देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया है कि संविलियन के नाम पर कर्मचारियों के पेंशन अधिकार छीने नहीं जा सकते। अब गेंद शासन के पाले में है कि वह स्पष्ट और न्यायसंगत नीति बनाए।
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