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Raipur. छत्तीसगढ़ के 3 हज़ार करोड़ रुपए से ज्यादा के शराब घोटाले को लेकर भाजपा ने जिन भूपेश बघेल को कुख्यात किया, उनका नाम 30 हज़ार पन्नों की आखिरी चार्जशीट में भी नहीं आया। ईडी ने हाल ही में कोर्ट में शराब घोटाले की चार्जशीट पेश की है। इसमें 80 से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम नहीं है।
भाजपा कांग्रेस सरकार में हुए घोटालों को लेकर भूपेश बघेल को कटघरे में खड़ा करती रही है। वहीं, चैतन्य बघेल को इस घोटाले का आरोपी पप्पू बंसल के बयान के आधार पर बनाया गया। गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद भी पप्पू बंसल बयान देकर फरार हो गया। आइए आपको बताते हैं इसकी पूरी कहानी।
जांच एजेंसियों के हाथ खाली:
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में अंतिम चालान पेश कर दिया है। ईडी के मुताबिक शराब घोटाला 3074 करोड़ रुपए का है। अंतिम चालान में पूर्व सीएम भूपेश बघेल का नाम नहीं है।
इस मामले में पहले ईडी ने आठ पूरक चालान पेश किए थे। अंतिम चालान 29 हजार 800 पेज का है और 315 पेज की समरी है। शराब घोटाले में ईडी ने 22 पुराने और 59 नए आरोपी बनाए हैं। इस तरह इस घोटाले में कुल 81 आरोपी हैं।
इसमें सौम्या चौरसिया से लेकर निरंजन दास और लक्ष्मी नारायण बंसल को नए आरोपी के रूप में पेश किया गया है। वहीं पहले से गिरफ्तार अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी, चैतन्य बघेल, अनवर ढेबर के नाम शामिल हैं।
खाली रह गए ईडी के हाथ:
ईडी के अधिवक्ता सौरभ पांडेय ने बताया कि पीएमएलए के तहत ईडी शराब घोटाले की जांच कर रही है। इस मामले में पहले 22 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था। इसमें कई गिरफ्तारियां भी हुई थीं। उनके संबंध में जांच के बाद चालान पेश किया गया था।
उन्होंने बताया कि अन्य 59 लोगों के खिलाफ जांच के बाद पूरक चालान पेश किया गया है। इस तरह कुल 81 लोगों के खिलाफ चालान पेश किया गया है। चुनाव से लेकर अब तक बीजेपी की पूरी राजनीति भूपेश बघेल सरकार में हुए घोटालों के आसपास घूमती रही है।
तीस हजार पन्नों के अंतिम चालान में भी भूपेश बघेल का नाम नहीं है। जांच एजेंसियों के हाथ इस मामले में खाली रह गए हैं। भूपेश बघेल ने केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं।
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आरोप लगाने वाला ही फरार:
पप्पू बंसल ने जांच एजेंसी के सामने दर्ज कराए अपने बयान में चैतन्य बघेल के घोटाले में शामिल होने की बात कही। पप्पू बंसल के बयानों के आधार पर चैतन्य को आरोपी बनाया गया। उनकी ईडी के द्वारा गिरफ्तारी की गई। जिस पप्पू बंसल के बयानों के आधार पर चैतन्य को आरोपी बनाया गया है, वो फरार है।
कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद भी वो दो बार ईओडब्ल्यू के सामने बयान देकर गया लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं किया गया और वो फरार हो गया। चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि चैतन्य को जेल में रखना जांच से पहले सज़ा देने जैसा है।
भूपेश बघेल ने इसे सत्य की जीत बताया। बीजेपी ने अब कवासी लखमा की गिरफ्तारी का मुद्दा उठा दिया है।
चैतन्य की जमानत पर हाईकोर्ट ने ईडी से ये कहा :
चैतन्य बघेल का बयान दर्ज करने के उद्देश्य से उसकी गिरफ़्तारी से पहले पीएमएलए (PMLA) की धारा 50 के तहत कोई समन तामील नहीं किया गया। धारा 50 का नोटिस जारी न करने से व्यक्ति को किसी भी दंडात्मक कार्रवाई शुरू होने से पहले सुनवाई का और अपनी स्थिति स्पष्ट करने के बहुमूल्य अधिकार से वंचित किया जाता है।
वर्तमान मामले के तथ्यों पर विचार करने से पहले यह न्यायालय पीएमएलए के तहत ज़मानत देने के लिए निर्धारित मापदंडों को दोहराना उचित समझता है। नि:संदेह इस अधिनियम में कठोर शर्तें शामिल हैं, हालांकि किसी वैधानिक व्यवस्था की कठोरता को संवैधानिक सुरक्षा उपायों की अवहेलना करने का लाइसेंस नहीं माना जा सकता।
ज़मानत का उद्देश्य मुक़दमे के दौरान आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करना है, न कि दोष सिद्ध होने से पहले सजा देना।
एक आदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि पीएमएल के तहत गिरफ़्तारी स्पष्ट आवश्यकता पर आधारित होनी चाहिए, न कि गम्भीरता या संदेह के सामान्य दावों पर
इस केस में जांच मुख्यतः दस्तावेज़ों पर आधारित और डिजिटल प्रकृति की है। सारी सामग्री और बयान दर्ज हो चुके हैं। ईडी कोई विशिष्ट सबूत पेश करने में विफल रही है। साथ ही यह कहा गया है कि गिरफ़्तारी के आधारों में असहयोग का आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत है।
चैतन्य की गिरफ़्तारी मुख्य रूप से जांच के दौरान पहले से एकत्र की गई सामग्री पर आधारित है। ऐसी कोई परिस्थिति निर्मित नहीं हुई जिसके कारण उनकी तत्काल गिरफ़्तारी आवश्यक हो
लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ़ पप्पू बंसल के खिलाफ अनिश्चितक़ालीन गिरफ़्तारी वारंट जारी किया गया था। ईडी के वकील ने कहा है कि वह इस बात से अनभिज्ञ थे। कोर्ट ने कहा कि “इस प्रकार की स्वीकारोक्ति प्रथम दृष्टया जांच में एक गम्भीर चूक को दर्शाती है और इस शिकायत को बल देती है कि जांच एजेंसी चयमात्मक या चुन-चुनकर जांच की गई हो सकती है”
कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि ईओडब्ल्यू/शराब के मामले में स्पेशल कोर्ट ने पप्पू बंसल को फ़रार घोषित किया है और 19 मई 2025 को उसके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का स्थायी वारंट जारी किया गया था, जिसे न तो अब तक रद्द किया गया है और न ही एक्जक्यूट (execute)। हैरानी की बात है कि ईडी ने रायपुर स्थिति संबंधित EOW से इस महत्वपूर्ण तथ्य का सत्यापन नहीं किया।
कोर्ट ने कहा कि स्थायी वारंट जारी होने के बावजूद ईडी ने पप्पू बंसल का बयान दो बार 26 जुलाई 2025 और 10 सितम्बर 2025 को पीएमएलए धारा 50 के तहत दर्ज किया, फिर भी उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया। कोई भी जांच एजेंसी न्यायिक आदेश को दरकिनार नहीं करने के लिए अपने विवेकाधिकार का प्रयोग नहीं कर सकती।
ईडी ने स्वीकार किया कि बंसल को गिरफ़्तार नहीं किया गया और बयान दर्ज करने के बाद उसे बिना किसी बाधा के जाने दिया गया। ईडी का आचरण स्पष्ट रूप से असंगत और चयनात्मक है, और जांच में मनमानी से काम लिया गया है। जांच एजेंसी ने गिरफ़्तारी में चुनिंदा दृष्टिकोण अपनाया है
चैतन्य बघेल के पास से अपराध की आय की कोई बरामदगी नहीं हुई है, और न ही ऐसा कोई आरोप है कि चैतन्य ने किसी भी तरीके से कथित आय का प्रत्यक्ष रूप से कोई लाभ उठाया हो ।
सभी तथ्यों और परिस्तिथियों पर विचार करने और क़ानूनी विश्लेषण के बाद कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि चैतन्य को जेल में रखना जांच से पहले ही सजा देने जैसा होगा, जो न्यायशास्त्र के सिद्धांत के विरुद्ध है।
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चैतन्य की ज़मानत पर हाईकोर्ट ने ईओडब्ल्यू से यह कहा :
न ही एफआईआर (FIR) में चैतन्य का नाम है, और न ही एफआईआर में कथित अपराध में चैतन्य की कोई प्रत्यक्ष, विशिष्ट या स्पष्ट भूमिका बताई गई है। ईओडब्ल्यू द्वारा दायर पहली चार्जशीट में चैतन्य को आरोपी नहीं बनाया गया था। इसके बाद भी 5 सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की। उसमें से भी किसी में चैतन्य पर कोई आरोप नहीं लगाया गया।
5 सप्लीमेंट्री चार्जशीट के बाद भी ईओडब्ल्यू ने चैतन्य को आरोपी के रूप में पेश करने से लगातार परहेज किया। चैतन्य के पास से न तो धन, न संपत्ति और न ही कोई आपत्तिजनक वस्तु बरामद हुई है। EOW ने अपराध की कथित आय का एक पैसा भी बरामद नहीं किया है।
ईओडब्ल्यू ने स्वीकार किया है कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है। रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे इस समय यह पता चले कि चैतन्य से हिरासत में पूछताछ करना आवश्यक या उचित है।चैतन्य को कथित संलिप्तता के आधार पर आरोपी बनाया गया है।
ईओडब्ल्यू ने सक्षम न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना ही सप्लीमेंट्री रिपोर्ट दायर कर दी और जांच आगे बढ़ाई. यह EOW की विश्वसनीता को कमजोर करता है।
कथित शराब घोटाले में कथित तौर पर शामिल 29 आबकारी अधिकारियों को, जिन पर ईओडब्ल्यू ने गम्भीर आरोप लगाए थे, सुप्रीम कोर्ट उन्हें पहले ही ज़मानत पर रिहा कर दिया है। इतनी बड़ी संख्या में सरकारी अधिकारियों को ज़मानत देना, जिनकी कथित भूमिका इस साज़िश को अंजाम देने में भिन्न थी, चैतन्य के न्याय के दावे को स्पष्ट रूप से मजबूत करता है।
इस मामले में पप्पू बंसल के खिलाफ विशेष न्यायालय द्वारा स्थायी वारंट जारी किया गया था और यह वारंट जाँच अधिकारी के पास उपलब्ध था। इसके बावजूद उन्होंने पप्पू बंसल को गिरफ़्तार नहीं किया। उसका बयान रिकॉर्ड कर उसे भागने दिया। ऐसा करना कानून का गम्भीर उल्लंघन है।
इसलिए यह न्यायालय राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को इस मामले में जांच करने और राज्य भर के सभी पुलिस अधिकारियों को उचित निर्देश जारी करने का निर्देश देता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार के उल्लंघन न हों।
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