सीएम साय बोले हिड़मा मरा तो राहुल गांधी के पेट में क्यों हुआ दर्द, PCC चीफ ने कहा रमन सरकार में नक्सली 3 जिलों से 14 जिलों में फैले
Raipur. छत्तीसगढ़ में 31 मार्च की डेडलाइन में नक्सलवाद खत्म हो गया। यह दावा छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक की सरकार कर रही है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह से लेकिन सीएम विष्णुदेव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा ने ऐलान कर दिया है कि अब छत्तीसगढ़ नक्सल मुक्त हो चुका है। लेकिन इस पर सियासी लड़ाई शुरु हो गई है।
यह लड़ाई नक्सल के अंत का श्रेय लेने की है। सीएम ने कहा कि हिड़मा मरा तो उसके समर्थन में इंडिया गेट पर नारे लगे जिसे राहुल गांधी ने ट्वीट किया। वहीं पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज बोले कि रमन सिंह की सरकार में ही नक्सल 3 ब्लॉक से 14 जिलों में फैला।
सीएम का राहुल पर निशाना :
सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि राहुल गांधी ने जो देश जोड़ो यात्रा निकाली थी उस दरमियान अनेकों जगह जो नक्सली थे उनके साथ उनकी मुलाकात हुई। कई जगह नक्सलियों ने उनके साथ मंच साझा किया। जब हिड़मा जैसा दुर्दांत नक्सली न्यूट्रिलाइज़ हुआ। जिसने सैंकड़ों लोगों को जिसमें हमारे जवान भी थे उनको मारा और जब वो मरा तो इंडिया गेट के पास कितने हिड़मा मारोगे, घर-घर में हिडमा पैदा होंगे।
ऐसे नारे लगाए गए। यह नारे लगाने वाले लोगों के वीडियों को राहुल गांधी ने ट्वीट किया। सीएम ने कहा कि ये क्या प्रमाणित करता है। देश जानता है कि इसके पीछे राहुल गांधी का क्या आशय है। सीएम ने कहा कि आज 31 मार्च का दिन छत्तीसगढ़ के लिए बहुत ऐतिहासिक दिन है। छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद समाप्त हो रहा है।
इसके लिए हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री म अमित शाह को छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की ओर से बहुत धन्यवाद। उन्होंने कहा कि ये नक्सलवाद छत्तीसगढ़ के विकास में बहुत बड़ी बाधा था और गृहमंत्री ने संकल्प लिया था कि 31 मार्च 2026 तक इसको समाप्त करना है और उनका संकल्प पूरा हुआ है। अब बस्तर क्षेत्र बहुत तेज़ी से विकास करेगा जो 40 वर्षों से विकास से अछूता था।
अपनी ही पीठ थपथपा रही सरकार :
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद बीजेपी की रमन सरकार के समय पूरे प्रदेश फैला। जब राज्य में 2003 में बीजेपी की सरकार बनी तब नक्सलवाद बस्तर के 3 ब्लॉकों तक ही सीमित था। रमन राज के 15 सालों में नक्सलवाद बस्तर के तीन ब्लॉकों से निकलकर 14 जिलों तक पहुंच गया।
इन 15 सालों के अंत के 4 साल तक केंद्र में नरेन्द्र मोदी की भी सरकार बन चुकी थी। प्रधानमंत्री इस तथ्य को जान ले राज्य में नक्सलवाद की जिम्मेदार बीजेपी की फासीवादी सोच और नीतियां है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री नक्सल नियंत्रण पर जो अपनी पीठ थपथपा रहे है उसके पीछे कांग्रेस की सरकार की कार्ययोजना और बनायी गयी नीतियां है
कांग्रेस ने गिनाईं उपलब्धियां :
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कांग्रेस की सरकार में प्रदेश में नक्सलवादी गतिविधियों में 80 प्रतिशत की कमी हुई थी। नक्सलियों के बड़े नेताओं की गिरफ्तारी हुई है, एनकाउंटर हुआ है। तब नक्सली छत्तीसगढ़ छोड़कर भाग गये थे। वर्ष 2008 से लेकर 2018 तक के आंकड़ों को यदि देखा जाए तो इस दौरान राज्य में नक्सली हर साल 500 से लेकर 600 हिंसक घटनाओं को अंजाम देते थे, जो भूपेश सरकार के 5 सालों में घटकर औसतन रूप से 250 तक रह गई थी।
वर्ष 2023 में मात्र 134 नक्सल घटनाएं हुई हैं, जो कि 2018 से पूर्व घटित घटनाओं से लगभग चार गुना कम थी। राज्य में 2018 से पूर्व नक्सली मुठभेड़ के मामले प्रतिवर्ष 200 के करीब हुआ करते थे, जो भूपेश सरकार में घटकर दहाई के आंकड़े तक सिमट गए हैं। वर्ष 2021 में राज्य में मुठभेड़ के मात्र 81 और वर्ष 2023 में अब तक 41 मामले हुए थे।
नक्सलियों के आत्मसमर्पण के मामलों में भी तेजी कांग्रेस सरकार में आई थी। 1589 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। यह आंकड़ा 10 वर्षों में समर्पित कुल नक्सलियों की संख्या के एक तिहाई से अधिक थी। कांग्रेस सरकार के समय बस्तर संभाग के 589 गांवों के पौने छह लाख ग्रामीण नक्सलियों के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हो चुके थे।
इनमें सर्वाधिक 121 गांव सुकमा जिले के हैं। दंतेवाड़ा जिले के 118 गांव, बीजापुर जिले के 115 गांव, बस्तर के 63 गांव, कांकेर के 92 गांव, नारायणपुर के 48 गांव और कोंडागांव के 32 गांव नक्सल प्रभाव से मुक्त हुए थे।
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