रायगढ़ में नहर प्रोजेक्ट की जमीन पर उगा दी अफीम, 30 कलेक्टरों ने दी उनके जिले में नशे की फसल न होने की रिपोर्ट
News in short:
- सरकारी जमीन पर अफीम की खेती
- नहर परियोजना की जमीन पर अफीम
- रायगढ़ में मिली ऐसी खेती
- 30 ज़िलों में अफीम की खेती से इनकार
News in detail:
Raipur. छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती को लेकर एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। जांच रिपोर्ट में पता चला है कि सिर्फ निजी जमीन ही नहीं, बल्कि सरकारी जमीन पर भी अफीम उगाई जा रही थी। यह खुलासा प्रशासन की जांच के बाद हुआ, जिसमें कई जिलों से रिपोर्ट मंगाई गई थी। रायगढ़ में नहर प्रोजेक्ट की जमीन पर अफीम उगाने की जानकारी सामने आई है।
33 जिलों के कलेक्टरों ने सौंपी रिपोर्ट:
प्रदेश के सभी 33 जिलों के कलेक्टरों ने इस मामले में जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को भेजी। इनमें से केवल 3 जिलों बलरामपुर, दुर्ग और रायगढ़ में कुल 6 मामलों में अफीम की अवैध खेती की पुष्टि हुई। बाकी 30 जिलों के कलेक्टरों ने अपने यहां ऐसी किसी खेती से इनकार किया है।
रायगढ़ में सरकारी जमीन पर अफीम:
रायगढ़ जिले के ग्राम आमाघाट में जांच के दौरान पाया गया कि कुछ लोगों ने अपनी निजी जमीन के साथ-साथ केलो सिंचाई परियोजना से जुड़ी सरकारी जमीन पर भी अफीम की खेती की थी। जांच में सामने आया कि खसरा नंबर 462/2 की कुल 0.250 हेक्टेयर जमीन में से 0.051 हेक्टेयर हिस्से में अवैध अफीम उगाई गई थी।
यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में नहर परियोजना में दर्ज है, जिससे मामला और गंभीर हो जाता है।पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने 19 मार्च को छापेमारी कर बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान 60,326 अफीम के पौधे बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 2 करोड़ रूपए बताई गई। सभी पौधों को मौके पर ही उखाड़कर जला दिया गया और जमीन को मशीनों से समतल कर दिया गया। इस मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।
दुर्ग जिले में भी बड़ी कार्रवाई:
यहां 625 कृषि फार्म और अन्य जमीनों की जांच की गई। जांच के दौरान कुछ जगहों पर सब्जियों के बीच अफीम की फसल उगाई जा रही थी। पुलिस और राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर फसल को नष्ट किया और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की। इस पूरे मामले में पुलिस और राजस्व विभाग ने मिलकर संयुक्त अभियान चलाया। ड्रोन और की मदद से खेतों की निगरानी की गई। जिससे छिपी हुई खेती का भी पता लगाया जा सका।
बलरामपुर में भी मिला अफीम का जाल:
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के त्रिपुरी और खजूरी गांवों में भी अफीम की खेती पाई गई। कलेक्टर की जांच रिपोर्ट के अनुसार, कुसमी अनुभाग के राजस्व अधिकारियों के निरीक्षण में खजूरी गांव में 0.598 हेक्टेयर और त्रिपुरी में 1.488 हेक्टेयर जमीन पर अफीम की फसल उगाई जा रही थी। मामला सामने आने के बाद पुलिस और राजस्व विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए फसल को नष्ट किया। इसके बाद पूरे जिले में व्यापक जांच की गई, जिसमें अन्य जगहों पर कोई संदिग्ध फसल नहीं मिली।
अब आगे क्या:
राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जहां भी अफीम की अवैध खेती की पुष्टि होगी, वहां सख्त कार्रवाई की जाए। संबंधित जमीन मालिकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तैयारी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में अवैध नशीले पदार्थों की खेती को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ाई जा रही हैं।
निष्कर्ष:
यह मामला प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि सरकारी जमीनों की निगरानी में कहीं न कहीं कमी रही है। अब सरकार इस दिशा में और सतर्क होकर काम करने की बात कर रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
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