छत्तीसगढ़ की सियासत ने चाटी अफीम, भूपेश बोले, बीजेपी बनाए कमल के बदले अफीम के फूल का चुनाव चिन्ह

Arun Tiwari | Mar 23, 2026, 16:15 IST
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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ और दुर्ग जिलों में पिछले 17 दिनों में पांच अफीम के खेत पकड़े गए। अवैध खेती का विरोध करते हुए कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे “सियासत की अफीम” बताया। मामले में प्रशासन की सुस्ती पर सवाल उठ रहे हैं।

Raipur. छत्तीसगढ़ में अफीम की जमकर खेती हो रही है। पिछले 17 दिनों में अफीम के पांच खेत पकड़ में आ गए हैं। अब यह अफीम नशे की ही नहीं बल्कि सियासत की अफीम हो गई है। लगता है छत्तीसगढ़ की सियासन ने ही अफीम चाट ली है। सरकार ने कलेक्टर से लेकर पटवारी तक को अलर्ट पर कर दिया है। लेकिन सवाल यह है कि अफीम पकड़ में आ रही है तो सब अलर्ट पर हैं लेकिन इससे पहले क्या पूरे प्रशासन में अफीम घुली हुई थी जो यह नशे की फसल उगती रही।



कमल के बदले अफीम का फूल:

कांग्रेस ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। जाहिर है ये सरकार और प्रशासन की नाकामी है जो अफीम के अवैध फूल फल फूल रहे हैं। अफीम की खेती करते तो बीजेपी का नेता भी पकड़ा गया है जो जेल की सींखचों के पीछे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस पूरे मुद्दे पर सरकार पर तीर पर तीर चलाए हैं। भूपेश बघेल ने कहा कि यह सुशासन अफ़ीम की लैलूंगा ब्रांच है।



उन्होंने कहा कि रायगढ़ ज़िले के लैलूंगा ब्लॉक के नवीन घट गांव में एक या दो नहीं बल्कि तीन अलग-अलग खेतों में अफ़ीम पाई गई है। अब तो ऐसा लग रहा है कि भाजपा को अपना चुनाव निशान बदलकर “कमल के फूल” की जगह पर “अफ़ीम का फूल” कर लेना चाहिए।



सुशासन की अफीम:

भूपेश बघेल ने इसे सुशासन की अफीम नाम दिया है। वे खुद भी अफीम के खेत में जाकर नया नया खुलासा कर रहे हैं। भूपेश बघेल ने कहा कि यह सुशासन की अफ़ीम है। भाजपा किसान मोर्चा के नेता विनायक ताम्रकार दुर्ग ज़िले के ग्राम समोदा में 10 एकड़ खेत में अफ़ीम की खेती कर रहे हैं।



सूचना मिलते ही आज हम सब वहाँ पहुंचे और बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हुए। विनायक ताम्रकार बहुत रसूख़दार आदमी बताया जा रहा है। उसका उठना बैठना बड़े अधिकारियों, मंत्रियों के साथ है। मुख्यमंत्री निवास में भी आने जाने की सूचना है। सवाल यह है कि यह प्रोजेक्ट भाजपा किसान मोर्चा का है या मंत्रियों का है।



खेतों में उतरे कलेक्टर:

अफीम की खेती मिलने के बाद सीएम विष्णुदेव साय नाराज बताए जा रहे हैं। सीएम की नाराजगी को देखते हुए कलेक्टर से लेकर पटवारी तक अफीम की खेती ढूंढने के लिए खेतों में उतर गए हैं।



सीएम ने साफ कह दिया है कि जहां अफीम मिली वहां के कलेक्टर से लेकर पटवारी तक नपेंगे। सवाल यह भी किया जा रहा है कि अब तक क्या प्रशासन अफीम खाए बैठा था जो फसल लगा दी गई और उसमें फूल तक आ गए। आखिर कलेक्टर से पटवारी तक का अमला क्या कर रहा है। अब तो कांग्रेस ने भी अपनी जांच टीम खेतों में उतार दी है। वह भी अफीम तलाश रही है।



कभी सब्जी तो कभी फलों में अफीम:

अफीम की खेती भी अलग अलग तरीके से हो रही है कभी फलों के बीच तो कभी सब्जियों के बीच अफीम उगाई जा रही है। पहले ककड़ी और तरबूज के बीच अफीम की फसल पकड़ी गई तो कभी सब्जियों के बीच अफीम लगाई गई।



इससे पहले मक्के के खेत में अफीम पकड़ में आई। पिछले 17 दिनों में पांच खेतों में यह अफीम पकड़ में आई है। छत्तीसगढ़ में अभी तो अवैध शराब की रोकथाम नहीं हो पाई थी और अब अवैध अफीम सामने आने लगी है। इस अफीम का सीधा कनेक्शन झारखंड से है।



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