राज्यसभा जंग में कांग्रेस का आदिवासी महिला दांव

छत्तीसगढ़ की खाली होने वाली राज्यसभा सीटों में से एक के लिए कांग्रेस ने फूलोदेवी नेताम को दोबारा उम्मीदवार बनाया है। यह फैसला महिला और जनजातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। कई बड़े नामों की चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया है।

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Rajesh Lahoti
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तीन बड़े समीकरण साधने की रणनीति

छत्तीसगढ़ की पांच में से दो खाली होने वाली राज्यसभा सीटों में से एक पर कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है। बस्तर की वरिष्ठ आदिवासी नेत्री और मौजूदा राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम को फिर से उम्मीदवार घोषित किया गया है।

इस फैसले को केवल टिकट वितरण नहीं, बल्कि एक सोच-समझा सामाजिक और राजनीतिक समीकरण माना जा रहा है। दरअसल, यह सीटें फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी की हैं, जो अप्रैल 2026 में कार्यकाल पूरा होने के बाद ही खाली हो जाएंगी। इसी में से एक के लिए दोबारा फूलोदेवी को उम्मीदवार बनाया गया है।

दावेदारों की लंबी सूची, लेकिन सहमति एक नाम पर

इस सीट के लिए कांग्रेस के भीतर कई दिग्गज नेताओं के नाम चर्चा में थे। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू, अमरजीत भगत, शिव डहरिया और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नाम प्रमुख दावेदारों में गिने जा रहे थे। अंततः पार्टी ने संगठनात्मक संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी।

एकजुटता का संदेश देने की कोशिश

फूलोदेवी नेताम को दोबारा मैदान में उतारकर कांग्रेस ने तीन बड़े समीकरण साधने की कोशिश की है। पहला, आदिवासी नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व देना। दूसरा, महिला सशक्तिकरण का संदेश और तीसरा, बस्तर क्षेत्र को राजनीतिक महत्व देना।

बस्तर लंबे समय से प्रदेश की राजनीति का संवेदनशील और रणनीतिक इलाका रहा है, जहां जनजातीय वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

नाम की घोषणा के बाद नेताम ने नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया है। इसे पार्टी एकजुटता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, ताकि टिकट को लेकर किसी प्रकार का असंतोष सार्वजनिक रूप न ले।

भाजपा ने भी खेला महिला कार्ड

दूसरी ओर, भाजपा ने पहले ही अपनी सीट के लिए लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा प्रत्याशी घोषित कर दिया है। भाजपा भी महिला चेहरा सामने रखकर सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति पर आगे बढ़ती दिख रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने समयसीमा को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक फैसला लिया है, ताकि नामांकन प्रक्रिया में देरी या आंतरिक खींचतान की स्थिति न बने। राज्यसभा की छत्तीसगढ़ से पांच में से दो सीटें खाली हो रही है। दोनों ही दलों ने अपने एक-एक प्रत्याशी को मैदान में उतारा है।

इससे साफ मैसेज है कि दोनों सीटों से ये दल अपने-अपने उम्मीदवार को निर्विरोध राज्यसभा में ले जाएंगे। स्पष्ट है कि यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक मैसेज का भी है। राज्यसभा की यह जंग आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीति की झलक भी दिखा सकती है।

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