छत्तीसगढ़ की चिट्ठी: समर्पण, सियासत और सवाल

इस हफ्ते छत्तीसगढ़ की तस्वीर कई रंगों में दिखी। कहीं बंदूकें झुकीं, कहीं बजट के पन्ने खुले, तो कहीं विधानसभा में नशे और ‘ड्रग क्वीन’ पर सियासत गरमाती रही। आइए, जोड़ते हैं इस सप्ताह की कड़ियों को एक डायरी में…

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Rajesh Lahoti
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Raipur. इस हफ्ते छत्तीसगढ़ की तस्वीर कई रंगों में दिखी। कहीं बंदूकें झुकीं, कहीं बजट के पन्ने खुले, कहीं अदालत के दरवाजे सुरक्षा के साये में बंद हुए, तो कहीं विधानसभा में नशे और ‘ड्रग क्वीन’ पर सियासत गरमाती रही। आइए, जोड़ते हैं इस सप्ताह की कड़ियों को एक डायरी में…

जंगल से चिट्ठी, कैंप तक कदम

सप्ताह की शुरुआत उस पत्र से हुई जिसने सुर्खियां बटोरीं। छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा के बीबीएम डिवीजन के नक्सलियों ने “दीर्घकालीन जनयुद्ध” की राह छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई।

सुरक्षा की गारंटी और कॉम्बिंग ऑपरेशन पर अस्थायी रोक की मांग के साथ यह संदेश आया कि 15 नक्सली हथियार डालने को तैयार हैं। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भरोसा दिया “हथियार छोड़ेंगे तो सम्मान मिलेगा।”

और फिर कांकेर से तस्वीर आई। डीवीसीएम रैंक का माओवादी मल्लेश एके-47 के साथ बीएसएफ कैंप पहुंचा। छोटेबेठिया में ग्रामीणों के साथ उसका आत्मसमर्पण सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि संकेत था कि बस्तर की हवा बदल रही है। सुरक्षा एजेंसियां इसे ख़ौफ़ के साथ ही संगठन के भीतर की दरार भी मान रही हैं।

 देवजी का समर्पण, माओवाद की कमर टूटी 

वहीं मंगलवार का दिन भी ऐतिहासिक रहा। प्रतिबंधित सीपीआई के चार वरिष्ठ नेता देवजी, संग्राम, दामोदर और गंगन्ना दशकों तक भूमिगत रहने के बाद मुख्यधारा में लौट आए।

इनमें दो सेंट्रल कमेटी सदस्य और दो स्टेट कमेटी सदस्य शामिल हैं। तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करते हुए उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ने की घोषणा की।

इनके समर्पण के बाद छत्तीसगढ़ में माओवाद की कमर टूट चुकी है. यह कदम संगठन के कमजोर होते ढांचे और शांति की ओर बढ़ते नए दौर का संकेत है।

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ओवरटाइम में ‘ओवरगेम’

जंगल से लौटती बंदूक की खबर के बीच राजधानी में फाइलों की दुनिया में बड़ा धमाका हुआ। सीएसएमसीएल के ओवरटाइम भुगतान में 100 करोड़ से ज्यादा के कथित घोटाले में होटल कारोबारी अनवर ढेबर की गिरफ्तारी ने सियासत गरमा दी।

वैसे अनवर पर शराब घोटाले के साथ ही और भी कई मामले ईडी ने दर्ज कर रखे हैं. ओवरटाइम घोटाले की जांच में 28.80 लाख की जब्ती, बैंक ट्रेल और कमीशन के आरोपों ने पुराने शराब घोटाले की याद ताजा कर दी।

ईओडब्ल्यू और एसीबी अब रिमांड में नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है। वहीं पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा को भी डीएमएफ मामले में फिर गिरफ्तार किया गया है। टुटेजा पर पहले से ही कई मामले दर्ज हैं.

भूपेश का फाग, अनुज का जवाब 

यह वही हफ्ता था जब विधानसभा परिसर में “चूहे धान खा गए” वाला व्यंग्य सामने आया. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने फाग गीत गाकर सत्ता पर कटाक्ष किया।

बजट सत्र का माहौल राजनीतिक रंग में रंग गया। उधर भाजपा के हीरो विधायक अनुज शर्मा तत्काल इसका जवाब लेकर हाजिर थे. उन्होंने भी उसी मजाकिया अंदाज़ में दाग गाया और कांग्रेस को कटघरे में खड़ा किया.

संकल्प से सिद्धि

इसी सियासी तपिश के बीच वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने 1.72 लाख करोड़ का बजट पेश किया।थीम रखी संकल्प। बस्तर में एजुकेशन सिटी, महतारी वंदन योजना, कृषक उन्नति, आयुष्मान योजना, नए मेडिकल कॉलेज, मेट्रो सर्वे, शक्तिपीठ सर्किट को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 2047 के ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का खाका रखा। 

दिलचस्प यह रहा कि जिस बस्तर में नक्सली पत्र लिख रहे थे, उसी बस्तर के विकास को बजट का केंद्रीय बिंदु बनाया गया।

हाईकोर्ट में सन्नाटा

बिलासपुर में स्थित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को उड़ाने की धमकी ने हड़कंप मचा दिया। बम स्क्वायड, डॉग स्क्वायड, एंटी-सैबोटाज टीम—22 अदालतों का कामकाज ठप।धमकी असली थी या शरारत? जांच जारी है, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए।

नशा, बच्चे और ‘ड्रग क्वीन’ नव्या 

विधानसभा में नशे पर तीखी बहस हुई। आंकड़े चौंकाने वाले। चार लाख लोग गांजा पीते हैं, 10-17 साल के 40 हजार बच्चे नशे की गिरफ्त में। गृह मंत्री विजय शर्मा ने 2025-26 में हजारों गिरफ्तारियों और 13.29 करोड़ की संपत्ति फ्रीज करने की जानकारी दी।

इसी बीच हाईप्रोफाइल नाम आया नव्या मलिक का। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि ड्रग तस्करों की सूची में उसका नाम क्यों नहीं? सदन में इसका किसी के पास जवाब नहीं था.

ग्लैमरस इंटीरियर डिजाइनर से कथित ड्रग पैडलर बनी नव्या की कहानी ने यह दिखाया कि नशे का नेटवर्क सिर्फ गली-कूचों में नहीं, हाईप्रोफाइल पार्टियों तक फैला है।

तबादलों की ‘टर्बो स्पीड’

सरगुजा में तीन दिन के भीतर पटवारियों की दूसरी तबादला सूची जारी हो गई. 58 नाम इधर से उधर। ग्रामीण इलाकों में नामांतरण, सीमांकन, गिरदावरी जैसे कामों पर असर की आशंका। प्रशासन ने इसे नियमित प्रक्रिया बताया, लेकिन सवाल कायम हैं, क्योंकि बिना सोचे समझे ट्रांसफर बहुत तकलीफ़ देते हैं। 

जमीन की नई कीमत

दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और बलरामपुर-रामानुजगंज में 27 फरवरी से नई गाइडलाइन दरें लागू। रजिस्ट्री दफ्तरों में नई दरों की चर्चा शुरू हो गई. वैसे तो प्रदेश के सभी 33 जिलों में सरकार ने गुना भाग करके गाइडलाइन जारी की है.

इसके बावजूद बाज़ार रेट गाइडलाइन रेट से बहुत ऊपर है. वहीं ग्रामीण इलाकों में गाइडलाइन औपचारिकता जैसी ही है.

यह सप्ताह बता गया कि छत्तीसगढ़ सिर्फ खबरों का राज्य नहीं, बल्कि लगातार बदलते सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों की प्रयोगशाला है।

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