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NEWS IN SHORT
- भरोसे की जीत: छत्तीसगढ़ में महिलाओं को मिलने वाला बैंक लोन रिकॉर्ड स्तर पर
- अब कर्ज में भी महिलाएं आगे, बैंकों का भरोसा लगातार मजबूत
- पाँच साल में दोगुना से ज्यादा बढ़ा महिला लोन, बैंकिंग सोच में बड़ा बदलाव
- हर साल बढ़ रहा 5 हजार करोड़ का लोन
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में वूमन्स पॉवर:
Raipur. छत्तीसगढ़ में बैंकों का महिलाओं पर भरोसा साल-दर-साल और मजबूत होता जा रहा है। पिछले पाँच वित्तीय वर्षों में महिलाओं को दिए जाने वाले बैंक लोन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यही नहीं, लोन रिकवरी की दर बेहतर होने से बैंक भी अब महिलाओं को बिना झिझक ज्यादा कर्ज दे रहे हैं। मार्च 2020 में महिलाओं को कुल 11,386.30 करोड़ रुपये का लोन दिया गया था, जो वित्तीय वर्ष 2025 में बढ़कर 28,453.94 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। यानी हर साल औसतन करीब 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का इजाफा हुआ है। बैंक अधिकारियों के मुताबिक, जितनी तेजी से महिलाओं को लोन मिल रहा है, लगभग उसी अनुपात में उसकी वसूली भी हो रही है।
पुरुषों के बराबर महिलाएं :
अब तक कारोबार या प्रॉपर्टी खरीदने के लिए लोन मुख्य रूप से पुरुषों के नाम पर लिया जाता था, लेकिन यह धारणा अब तेजी से बदल रही है। निजी कंपनियों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और स्वरोजगार की ओर झुकाव के चलते महिलाएं खुद आगे आकर बैंक लोन ले रही हैं। सरकारी योजनाओं के तहत महिला स्व-सहायता समूहों और महिला उद्यमी समूहों को भी बड़ी संख्या में लोन मिल रहा है। खास बात यह है कि इन संगठनों की लोन वापसी लगभग शत-प्रतिशत है, जिससे बैंकिंग सेक्टर का भरोसा और मजबूत हुआ है।
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गोल्ड लोन भी बढ़त में :
सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बाद गोल्ड लोन लेने वालों की संख्या भी दोगुनी हो गई है। पहले जहां एक साल में औसतन 40 हजार लोग गोल्ड लोन लेते थे, वहीं अब यह आंकड़ा 80 हजार से ज्यादा पहुँच गया है। जल्दी प्रोसेस और कम ब्याज दर के कारण लोग होम और पर्सनल लोन की जगह गोल्ड लोन को तरजीह दे रहे हैं। पहले गोल्ड लोन की रकम आमतौर पर 50 हजार से 5 लाख रुपये तक सीमित रहती थी, लेकिन सोने की कीमत बढ़ने के बाद अब 10 से 50 लाख और यहां तक कि 1 करोड़ रुपये तक के गोल्ड लोन भी लिए जा रहे हैं। जहां पर्सनल लोन पर ब्याज दर 14 फीसदी तक पहुँच जाती है, वहीं गोल्ड लोन 8 फीसदी ब्याज दर पर आसानी से मिल रहा है—यही वजह है कि इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
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अब आगे क्या :
अब तक कारोबार, उद्योग या प्रॉपर्टी खरीद के लिए लोन पुरुषों के नाम पर लिया जाता था। लेकिन निजी कंपनियों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, स्टार्टअप कल्चर और स्वरोजगार योजनाओं के कारण महिलाएं खुद आगे आकर लोन ले रही हैं। सरकारी योजनाओं के तहत महिला स्व-सहायता समूह (SHG) और महिला उद्यमी समूह बड़ी संख्या में बैंक फाइनेंस ले रहे हैं। अब आगे इसमें और उछाल आएगा। बैंकों का खजाना खुलने से महिलाओं में आत्मनिर्भरता की सोच बढ़ेगी और वे अपना कारोबार खोलने के लिए बैंकों का रुख करेंगी।
Sootr Knowledge :
छत्तीसगढ़ में बैंकिंग सेक्टर का रुख तेजी से बदल रहा है। जहाँ पहले महिलाओं को लोन देने में बैंक संकोच करते थे, वहीं अब महिलाएं बैंकों के लिए सबसे भरोसेमंद कर्जदार बनती जा रही हैं। पिछले पाँच वित्तीय वर्षों में महिलाओं को दिए गए लोन में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, और इसके साथ ही लोन रिकवरी भी मजबूत बनी हुई है। पाँच साल में महिलाओं को मिलने वाला लोन दोगुना से ज्यादा है। बैंकिंग आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2020 से लेकर वित्तीय वर्ष 2025 तक महिलाओं को दिए जाने वाले लोन में करीब 150 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
Important Points :
.कर्ज में भरोसे की कहानी: छत्तीसगढ़ में महिलाओं को मिलने वाला बैंक लोन 150% बढ़ा
. जहाँ भरोसा है, वहाँ पैसा है: महिलाओं की बेहतर रिकवरी ने बदली बैंकिंग सोच
. महिला उद्यमिता का असर: बैंक लोन और गोल्ड लोन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
महिला समूहों की लोन रिकवरी स्थिति
- महिला स्व सहायता समूह - 98–100 फीसदी
- महिला उद्यमी समूह - 95–100 फीसदी
- अन्य श्रेणी - 85–90 फीसदी
निष्कर्ष :
महिलाओं की वित्तीय अनुशासनशीलता और बेहतर लोन वापसी ने बैंकिंग सेक्टर की सोच बदल दी है। वहीं, गोल्ड लोन ने आम लोगों के लिए आसान फाइनेंस का रास्ता खोल दिया है। आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ में महिला-केंद्रित बैंकिंग और गोल्ड लोन बाजार और तेजी से बढ़ने की संभावना है।
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