योग अब स्वास्थ्य विभाग के हवाले, ट्रैक शू, योगा मैट वाला भ्रष्टाचार दबाने की कोशिश?

VINAY VERMA | Jun 08, 2026, 14:32 IST
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छत्तीसगढ़ योग आयोग में करोड़ों का खेल
छत्तीसगढ़ योग आयोग में करोड़ों का खेल

छत्तीसगढ़ में योग अब समाज कल्याण विभाग से हटाकर स्वास्थ्य विभाग के अधीन कर दिया गया है। योग आयोग 2017 में बनाया गया था, लेकिन उसका मुख्य काम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन बनकर रह गया। आयोजन पर 2024 तक लगभग 14 करोड़ रुपए खर्च हुए।

NEWS IN SHORT

  • योग, समाज कल्याण से स्वास्थ्य विभाग के अधीन
  • योग दिवस आयोजन पर सालाना करोड़ों खर्च
  • ट्रैक सूट, स्पोर्ट्स शू और योगा मैट खरीदी पर सवाल
  • 2018 से शिकायतें, लेकिन बड़ी जांच नहीं
  • योग का विभाग बदला, सवाल बरकरार

NEWS IN DETAIL

Raipur : योग अब छत्तीसगढ़ समाज कल्याण विभाग नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग संचालित करेगा। सरकार इसे प्रशासनिक बदलाव बता रही है, लेकिन फैसले के साथ पुराने विवाद फिर चर्चा में हैं। सवाल यह है कि क्या योग को मजबूत करने के लिए विभाग बदला गया या फिर करोड़ों रुपए के खर्च से जुड़ी फाइलों को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी है?

योग कम, आयोजन ज्यादा

वर्ष 2017 में योग आयोग का गठन हुआ था। उद्देश्य बताया गया था कि योग को जन-जन तक पहुंचाया जाए और इलाज की चौथी पैथी के रूप में स्थापित किया जाए। लेकिन वर्षों में आयोग की सबसे बड़ी पहचान अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का सालाना आयोजन बनकर रह गई। पूरे साल गतिविधियां सीमित रहीं, जबकि 21 जून आते ही करोड़ों रुपए का बजट खुल जाता था।

करोड़ों का आयोजन, उपलब्धि कितनी?

सूत्रों के अनुसार शुरुआती वर्षों में आयोजन पर 3-4 करोड़ रुपए खर्च होने की बात कही गई। बाद में बजट लगातार बढ़ता गया और 2024 तक आयोजन का खर्च करीब 14 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। आरोप है कि रकम बढ़ती गई, लेकिन शिकायतों के बावजूद न विभागीय जांच हुई और न जवाबदेही तय की गई।

ट्रैक सूट और जूतों में खेल?

योग दिवस के दौरान खरीदी सबसे बड़ा विवाद बनी रही। आरोप है कि करीब 5000 ट्रैक सूट का ऑर्डर दिया जाता था और प्रति ट्रैक सूट की कीमत लगभग 6000 रुपए दिखाई जाती थी। स्पोर्ट्स शू की कीमत भी करीब 2500 रुपए प्रति जोड़ी बताई जाती थी। आरोप लगे कि जरूरत से ज्यादा खर्च दिखाकर कमीशनखोरी की गई, लेकिन किसी स्तर पर गंभीर जांच नहीं हुई।

हर साल गायब होते योगा मैट

योगा मैट खरीदी को लेकर भी लगातार सवाल उठे। आयोजन स्थल पर टेंट और कालीन की व्यवस्था होने के बावजूद अलग से हजारों योगा मैट खरीदे जाते थे। आरोप है कि कार्यक्रम खत्म होने के बाद हर साल करीब 5000 योगा मैट गायब हो जाते थे। वे कहां गए, किसे दिए गए या किस गोदाम में रखे गए-इसका स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं बताया जाता।

नाश्ते में करोड़ों, योग पीछे

विभागीय सूत्र बताते हैं कि भोजन और नाश्ते पर भी भारी खर्च हुआ। कई वर्षों में खानपान से जुड़े बिल 5 करोड़ रुपए से अधिक तक पहुंचने की चर्चा रही। दूसरी ओर योग शिक्षा और प्रशिक्षण का दायरा सीमित ही रहा।

शिकायतें आईं, जांच नहीं हुई

सप्लाई कम होने, बिल और सामग्री में अंतर तथा खरीदी प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप बार-बार सामने आए। हर बार जांच का आश्वासन दिया गया, लेकिन मामले कुछ दिन चर्चा में रहने के बाद ठंडे पड़ते गए। 2018 से लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे, फिर भी किसी बड़े अधिकारी की जवाबदेही तय नहीं हुई।

योग शिक्षक छोड़ दिए गए

योग को गांव-गांव पहुंचाने के लिए जिलों में योग शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन बाद में उनका मानदेय बंद कर दिया गया। कई शिक्षक व्यवस्था से बाहर हो गए और अनेक योग केंद्र निष्क्रिय हो गए। यानी जिस उद्देश्य से आयोग बनाया गया था, वही सबसे पीछे छूट गया।

मुख्यमंत्री भी रहे मंच पर

योग दिवस के बड़े कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री भी शामिल होते रहे। सरकार का दावा था कि प्रदेश में योग संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन दूसरी ओर खरीदी, भुगतान और सामग्री वितरण को लेकर सवाल लगातार उठते रहे।

विभाग बदलते जांच भी खत्म?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि योग आयोग को समाज कल्याण विभाग से हटाकर स्वास्थ्य विभाग के अधीन करने के बाद पुराने मामलों की फाइलों का क्या होगा? आरोप लग रहे हैं कि विभागीय जांच से बचने के लिए पूरा ढांचा बदला जा रहा है। यदि फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग पहुंचीं तो क्या शिकायतों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा? क्या पुराने मामलों की जांच आगे बढ़ेगी, या करोड़ों रुपए के खर्च से जुड़े सवाल भी विभाग बदलने के साथ गायब हो जाएंगे?

IMP FACTS

छत्तीसगढ़ योग आयोग अब स्वास्थ्य विभाग के अधीन है।

आयोग 2017 में बनाया गया था।

योग दिवस पर 2024 तक लगभग 14 करोड़ रुपए खर्च।

5000 ट्रैक सूट, स्पोर्ट्स शू और हजारों योगा मैट खरीदे गए, हिसाब नहीं रखा गया।

खानपान और नाश्ते पर 5 करोड़ रुपए से अधिक खर्च।

योग शिक्षा और प्रशिक्षण सीमित, कई शिक्षक हटाए गए।

2018 से भ्रष्टाचार के आरोप, जांच नहीं हुई।

विभाग बदलने के बाद पुराने मामलों की फाइलें और रिकॉर्ड का सवाल।

जवाब कौन देगा?

योग स्वास्थ्य का विषय है और इसे बढ़ावा देने पर किसी को आपत्ति नहीं। लेकिन योग के नाम पर हुए खर्च, खरीदी और कथित अनियमितताओं की जांच भी उतनी ही जरूरी है। सवाल सिर्फ विभाग बदलने का नहीं है; सवाल यह है कि योग के नाम पर खर्च हुए करोड़ों रुपए का हिसाब कौन देगा? और कहीं ऐसा तो नहीं कि जवाबदेही एक विभाग से दूसरे विभाग पर टाली जा रही हो?

FAQ

  1. योग आयोग अब किस विभाग के अधीन है?
    योग आयोग अब समाज कल्याण से हटाकर स्वास्थ्य विभाग के अधीन आ गया है। इसका उद्देश्य योग को जन-जन तक पहुंचाना और स्वास्थ्य से जोड़कर उसका प्रभाव बढ़ाना बताया गया है।
  2. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कितना खर्च होता रहा है?
    योग दिवस के आयोजनों पर शुरुआती वर्षों में 3–4 करोड़ रुपए खर्च होते थे। 2024 तक यह खर्च लगातार बढ़कर लगभग 14 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इसमें आयोजन स्थल, खानपान, ट्रैक सूट, स्पोर्ट्स शू और हजारों योगा मैट शामिल हैं।
  3. पुराने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच अब होगी या नहीं?
    2018 से लगातार आरोप लगे हैं कि खरीदी, भुगतान और सामग्री वितरण में अनियमितताएं हुईं। विभाग बदलने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि पुराने मामलों की फाइलें और रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे या जांच आगे बढ़ेगी, और योग के नाम पर खर्च हुए करोड़ों रुपए का हिसाब कौन देगा।
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