17 साल पहले नकल कर बनी थी छत्तीसगढ़ की टॉपर, कोर्ट ने पोराबाई केस में 4 को सुनाई बड़ी सजा

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 2008 की 12वीं बोर्ड परीक्षा में प्रदेश टॉपर के बड़े फर्जीवाड़े पर मुहर लग गई है। नकल और उत्तर पुस्तिकाओं में हेराफेरी कर पोराबाई बनी थी। मामले में न्यायाधीश ने सभी दोषियों को कठोर सजा सुनाई। जानिए क्या है ये पूरा मामला...

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Harrison Masih
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NEWS IN SHORT

  • 2008 की 12वीं बोर्ड टॉपर पोराबाई सहित चार लोगों को कोर्ट ने फर्जीवाड़े का दोषी ठहराया
  • द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश गणेश राम पटेल की अदालत ने सभी को 5-5 साल का कठोर कारावास सुनाया
  • नकल और उत्तर पुस्तिकाओं में हेराफेरी कर पोराबाई को स्टेट टॉपर बनाया गया था
  • स्कूल प्राचार्य, केंद्राध्यक्ष और शिक्षक को साजिश का सक्रिय हिस्सा माना गया

NEWS IN DETAIL

क्या है पूरा मामला?

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) की 2008 की 12वीं बोर्ड परीक्षा में सरस्वती शिशु मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल, बिर्रा, जांजगीर की छात्रा पोराबाई को प्रदेश में पहला स्थान मिला था।

गांव की छात्रा के टॉप करने को लेकर शुरुआत में गर्व जताया गया, लेकिन कुछ ही समय में परिणाम संदेह के घेरे में आ गया।

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उत्तर पुस्तिकाओं में गड़बड़ी का खुलासा

विषयवार अंकों में असामान्यता, ओवरराइटिंग और अलग-अलग हैंडराइटिंग सामने आने के बाद बोर्ड ने विशेष जांच करवाई। जांच में साफ हुआ कि उत्तर पुस्तिकाओं में जानबूझकर बदलाव किए गए थे।

तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष बीकेएस रे ने मेरिट लिस्ट देखने के बाद टॉपर की उत्तर पुस्तिका मंगवाई। साफ-सुथरी कॉपी और अंग्रेजी के उच्चस्तरीय शब्द देखकर उन्होंने इसे सीधा फर्जीवाड़ा करार दिया।

जांच में सामने आया कि पोराबाई का पिछला शैक्षणिक रिकॉर्ड बेहद कमजोर था। यही नहीं कुछ मौकों पर तो फेल भी हुई है

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परीक्षा में शामिल न होने का भी आरोप

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पोराबाई ने जिस केंद्र से परीक्षा दी, वहां उसकी उपस्थिति ही नहीं थी। आरोप था कि उसकी जगह किसी और ने परीक्षा दी थी।

कानूनी लड़ाई और कोर्ट का फैसला

बोर्ड की रिपोर्ट पर पोराबाई सहित 9 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। 2020 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ 2021 में सेशन कोर्ट में अपील की गई।

अतिरिक्त लोक अभियोजक केदारनाथ कश्यप ने मजबूत साक्ष्य पेश किए, जिसके बाद अदालत ने इसे सुनियोजित साजिश माना।

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Sootr Knowledge

  • उत्तर पुस्तिका में ओवरराइटिंग और हैंडराइटिंग अंतर बड़ी अनियमितता मानी जाती है
  • मेरिट लिस्ट में गड़बड़ी पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर असर डालती है
  • बोर्ड परीक्षा में फर्जीवाड़ा संगठित अपराध की श्रेणी में आता है
  • लाभार्थी छात्र भी साजिश का दोषी माना जाता है
  • अपीलीय अदालतें निचली अदालत के फैसले पलट सकती हैं

IMP FACTS

  • वर्ष: 2008
  • परीक्षा: 12वीं बोर्ड
  • टॉपर: पोराबाई
  • सजा: 5 साल कठोर कारावास
  • दोषी: छात्रा, प्राचार्य, केंद्राध्यक्ष, शिक्षक
  • फैसला देने वाली अदालत: द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, जांजगीर

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आगे क्या

  • दोषियों के खिलाफ जेल वारंट जारी होगा
  • शिक्षा मंडल अन्य वर्षों की मेरिट सूची की भी समीक्षा कर सकता है
  • आरोपियों के पास हाईकोर्ट में अपील का विकल्प रहेगा

निष्कर्ष

करीब 17 साल बाद आया यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में ईमानदारी की जीत है। अदालत ने साफ कर दिया कि टॉपर बनाने जैसी बड़ी गड़बड़ी बिना अंदरूनी साजिश के संभव नहीं। यह फैसला भविष्य में बोर्ड परीक्षाओं की पारदर्शिता के लिए नजीर बनेगा।

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