CGPSC : असिस्टेंट प्रोफेसर पद का चयन रद्द, फिर भी दस्तावेज सत्यापन

Aishwarya Dwivedi | Jul 09, 2026, 16:27 IST
CGPSC असिस्टेंट प्रोफेसर चयन प्रक्रिया और वेरिफिकेशन रद्द
CGPSC द्वारा तकनीकी त्रुटि के कारण असिस्टेंट प्रोफेसर का चयन रद्द होने के बावजूद, चिकित्सा शिक्षा विभाग ने उसी डॉक्टर को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुला लिया, जिससे विवाद खड़ा हो गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

CGPSC ने विवाद के बाद सीटीवीएस विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर पद का चयन रद्द कर दिया था। इसके बावजूद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने उसी डॉक्टर को 13 जुलाई को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुला लिया है। वहीं CGPSC इसी पद के लिए नए सिरे से 14 जुलाई को इंटरव्यू भी कर रहा है। पहले मामले में तकनीकी त्रुटि का हवाला देकर 4 जून को चयन रद्द किया गया था। यह मामला बिना डिग्री वाले डॉक्टर को वरीयता देने से जुड़ा था।



तकनीकी त्रुटि का हवाला देकर रद्द हुआ था चयन

मीडिया रिपोर्ट्स में सवाल उठाए जाने के बाद CGPSC ने चयन प्रक्रिया में वरीयता देने में तकनीकी त्रुटि का हवाला दिया। इसी आधार पर 4 जून को असिस्टेंट प्रोफेसर का चयन रद्द कर दिया गया।



इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया को पत्र भी भेजा गया था। शुरुआती रिपोर्टों में योग्य डॉक्टरों को बाहर रखने और बिना डिग्री वाले अभ्यर्थी को तरजीह देने का सवाल उठाया गया था।



इसके बाद CGPSC ने कार्डियक एनीस्थीसिया विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर चयनित बिना डिग्री वाले डॉक्टर का चयन भी निरस्त कर दिया। आयोग ने खुद माना कि शैक्षणिक योग्यता के आधार पर वरीयता देने में तकनीकी त्रुटि हुई थी।



चयन रद्द फिर भी सत्यापन के लिए बुलावा

जब ट्रांजैक्शन नियमों की गहराई से जांच हुई, तो CGPSC अधिकारियों को अपनी गलती का एहसास हुआ। खबर सामने आने के महज दो दिन के भीतर ही डॉक्टर का चयन निरस्त कर दिया गया था।



आयोग के पत्र के मुताबिक डॉ. अनिल गुप्ता का चयन निरस्त किया गया था। इसके बावजूद अब चिकित्सा शिक्षा विभाग ने उन्हीं डॉक्टर को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुला लिया है।



यह पूरा घटनाक्रम सवाल खड़े करता है कि जब चयन पहले ही रद्द हो चुका था, तो सत्यापन के लिए बुलावा क्यों भेजा गया। इसी बीच CGPSC इसी पद के लिए 14 जुलाई को नए सिरे से इंटरव्यू भी करने जा रहा है।



कम सैलरी से नाराज होकर डॉक्टरों ने छोड़ी नौकरी

इसी बीच नेहरू मेडिकल कॉलेज स्थित एसीआई (ACI – Advanced Cardiac Institute) में भी एक बड़ा बदलाव सामने आया है। सीटीवीएस विभाग के संविदा कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. बालकृष्ण साहू ने नौकरी छोड़ दी है।



उन्होंने इस्तीफे की वजह कम वेतन बताई है। उन्हें 2 लाख रुपए मासिक सैलरी पर नियुक्त किया गया था, लेकिन टीडीएस (TDS – Tax Deducted at Source) और एनपीए (NPA – Non-Practicing Allowance) काटने के बाद उन्हें करीब 1.40 लाख रुपए ही मिल रहे थे।



जबकि एक चैरिटी अस्पताल में उन्हें साढ़े 5 लाख रुपए मासिक सैलरी का प्रस्ताव मिल रहा था। इससे पहले कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. तान्या छौड़ा भी इस्तीफा दे चुकी हैं।



डॉक्टरों के इस्तीफे से अटकीं जटिल सर्जरी

दो कार्डियक एनेस्थेटिस्ट के इस्तीफे के बाद विभाग में बायपास सर्जरी से लेकर वॉल्व रिप्लेसमेंट जैसी जटिल सर्जरी अटक गई थीं। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल एक संविदा कार्डियक एनेस्थेटिस्ट सेवाएं दे रहे हैं। इसी वजह से मरीजों का ऑपरेशन पूरी तरह नहीं रुका है।



स्पेशलिस्ट डॉक्टर क्यों छोड़ रहे नौकरी

सरकारी सेवा से डॉक्टरों के इस्तीफे के पीछे कई वजहें सामने आई हैं। सबसे बड़ी वजह कम वेतन और समय पर प्रमोशन न मिलना है। निजी कॉलेजों और अस्पतालों में डॉक्टरों को सरकारी सेवा से दोगुना वेतन मिल जाता है। इसके अलावा सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को भी सामान्य स्पेशलिस्ट डॉक्टरों जितना ही वेतन दिया जाता है। राज्य में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के लिए अलग से कोई कैडर भी नहीं बनाया गया है। इसके उलट मध्यप्रदेश में इनका अलग कैडर है और वहां समय पर प्रमोशन भी मिलता है।



डीएमई ने कहा, होगी पड़ताल

इस पूरे विवाद पर चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक यानी डीएमई (DME – Directorate of Medical Education) डॉ. यूएस पैकरा का पक्ष भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि जिस डॉक्टर का चयन रद्द किया गया था, उन्हें दस्तावेज सत्यापन के लिए क्यों बुलाया गया है, इसकी पड़ताल की जाएगी। अब देखना यह होगा कि इस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।



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