छत्तीसगढ़ हैंडपंप तकनीशियन के 414 पद खाली, ग्रामीणों की बढ़ी मुश्किलें

Aishwarya Dwivedi | Apr 13, 2026, 21:40 IST
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छत्तीसगढ़ में हैंडपंप तकनीशियनों के 400 से अधिक पद खाली हैं, जिससे मरम्मत कार्य प्रभावित है। गर्मी में जल संकट बढ़ा, ग्रामीणों को पेयजल के लिए भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

NEWS IN SHORT

  • तकनीशियनों की कमी से ग्रामीण पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
  • 876 स्वीकृत पदों में से केवल 462 कार्यरत, 400 से अधिक खाली हैं।
  • एक तकनीशियन पर 10–12 गांवों के हैंडपंपों की जिम्मेदारी है।
  • मरम्मत में देरी और जल शुद्धिकरण कार्य प्रभावित हो रहा है।
  • स्थिति सुधार के लिए नए पद सृजन की मांग उठ रही है।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। इसकी बड़ी वजह हैंडपंपों की देखरेख और मरम्मत के लिए पर्याप्त तकनीशियनों की कमी बताई जा रही है। प्रदेश के दूरस्थ गांवों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक, खराब पड़े हैंडपंपों की समय पर मरम्मत नहीं हो पा रही, जिससे लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।



लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के आंकड़ें

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 33 जिलों में हैंडपंप तकनीशियनों के कुल 876 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 462 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। यानी 400 से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। इस वजह से एक-एक तकनीशियन पर 10 से 12 गांवों के हैंडपंपों की जिम्मेदारी आ गई है।



स्थिति यह है कि हैंडपंप खराब होने के बाद शिकायत करने पर भी मरम्मत में देरी हो रही है। वहीं, गर्मी में जलस्तर गिरने के कारण पानी शुद्धिकरण के लिए केमिकल डालने का काम भी प्रभावित हो रहा है।



कई जिलों में हालत गंभीर

कई जिलों में हालात और गंभीर हैं। रायगढ़ में 42 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 19 तकनीशियन कार्यरत हैं, जबकि कांकेर में 41 में से 15 ही कर्मचारी बचे हैं। जशपुर, बस्तर और सरगुजा जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में सेवानिवृत्ति के चलते तकनीशियनों की संख्या और घट सकती है।



वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंपों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे दबाव और बढ़ेगा। इसी को देखते हुए कर्मचारी संगठनों ने विभागीय सेटअप में संशोधन और नए पद सृजित करने की मांग उठाई है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके।



निष्कर्ष

तकनीशियनों की कमी और बढ़ते दबाव के बीच छत्तीसगढ़ में हैंडपंप व्यवस्था चरमरा रही है, जिसका सीधा असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जल जरूरतों पर पड़ रहा है।



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