छत्तीसगढ़ में डॉक्टर-कर्मचारियों की मनमानी हाजिरी पर लगेगी रोक, पोस्टिंग वाली जगह से ही लगेगी अटेंडेंस
Umeshwari Baghel | Oct 25, 2026, 15:30 IST
डॉक्टरों और कर्मचारियों की मनमानी हाजिरी पर लगेगी रोक
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में अब डॉक्टर और कर्मचारी मनमर्जी से हाजिरी नहीं लगा सकेंगे। नवंबर से ऑनलाइन अटेंडेंस के नियम बदलने की तैयारी है। कर्मचारियों को उसी जगह से हाजिरी लगानी होगी जहां उनकी पोस्टिंग है। दूसरी जगह से लगाई गई हाजिरी मान्य नहीं होगी। गैरहाजिर रहने पर वेतन भी कट सकता है।
इसके लिए स्वास्थ्य विभाग (Chhattisgarh Health Department) का ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम ट्रेजरी से जोड़ा जाएगा। इस बदलाव से दूसरे कार्यालयों में अटैच कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग की ऑनलाइन (छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग) हाजिरी व्यवस्था पहले से लागू है। हालांकि अभी इसका सीधा संबंध ट्रेजरी के सिस्टम से नहीं है। इसका फायदा दूसरे कार्यालयों में अटैच डॉक्टरों और कर्मचारियों को मिल रहा है।
कई कर्मचारी अपनी मूल पोस्टिंग छोड़कर दूसरी जगह काम कर रहे हैं। वे वहीं से ऑनलाइन हाजिरी भी दर्ज कर रहे हैं। इससे उनकी सैलरी पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।
अब विभाग इस व्यवस्था को बदलने जा रहा है। नवंबर से (Online Attendance New Rules) ऑनलाइन अटेंडेंस को ट्रेजरी से जोड़ने की तैयारी है। इसके बाद कर्मचारियों की हाजिरी के आधार पर वेतन तय होगा।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद (Doctors Attendance System) डॉक्टरों और कर्मचारियों को मूल पदस्थापना पर हाजिरी लगानी होगी। दूसरी जगह से दर्ज की गई उपस्थिति स्वीकार नहीं होगी।
स्वास्थ्य संचालनालय ने सिस्टम में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) की मदद से सॉफ्टवेयर अपडेट किया जा रहा है।
सिस्टम ट्रेजरी से जुड़ने के बाद गैरहाजिरी का असर सीधे वेतन पर पड़ेगा। इससे लंबे समय से दूसरे कार्यालयों में काम कर रहे कर्मचारियों पर दबाव बढ़ेगा।
रायपुर के पंडरी अस्पताल में कर्मचारियों के (डॉक्टरों की ऑनलाइन अटेंडेंस) अटैचमेंट का मामला सामने आया है। यहां तीन नेत्र सहायक काम कर रहे हैं। खास बात यह है कि अस्पताल में नेत्र सहायकों के पद ही नहीं हैं।
पंडरी अस्पताल में आंखों की जांच और इलाज की व्यवस्था भी नहीं है। इसके लिए माना में अलग नेत्र अस्पताल खोला गया है। इसके बावजूद तीनों नेत्र सहायकों को पंडरी अस्पताल से वापस नहीं भेजा गया।
रायपुर के सीएमएचओ कार्यालय में भी तीन डॉक्टर अटैच हैं। इनके अलावा वार्ड बॉय और सफाई कर्मचारियों को दूसरी जगह लगाया गया है।
रायपुर के अलावा धमतरी और जगदलपुर में भी अटैचमेंट के मामले सामने आए हैं। महासमुंद और दुर्ग में भी ऐसी स्थिति बताई जा रही है।
इन जिलों के सीएमएचओ कार्यालयों में डॉक्टर और तकनीकी कर्मचारी अटैच हैं। कई जगह अस्पतालों में तैनात कर्मचारियों से कार्यालयों का काम कराया जा रहा है।
रायपुर के ग्रामीण इलाकों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ कर्मचारी भी दूसरे कार्यालयों में काम कर रहे हैं। इससे स्वास्थ्य केंद्रों में कर्मचारियों की कमी हो सकती है। मरीजों को समय पर इलाज मिलने में भी परेशानी होती है।
स्वास्थ्य विभाग में (ऑनलाइन हाजिरी नियम) अटैचमेंट खत्म करने की घोषणा विधानसभा में पहले हो चुकी है। इसके बावजूद कई कर्मचारी अपनी मूल पोस्टिंग पर नहीं लौटे।
स्वास्थ्य संचालनालय ने 22 सितंबर को दोबारा आदेश जारी किया था। इसमें फरवरी और मार्च 2026 के दौरान दिए गए आश्वासनों की जानकारी मांगी गई थी।
अधिकारियों को तीन दिन के भीतर आदेश के पालन का प्रमाण देना था। देरी होने पर उसका कारण बताने के निर्देश भी दिए गए थे।
इस आदेश को करीब एक महीना बीत चुका है। इसके बावजूद कई जिलों में अटैचमेंट की व्यवस्था जारी है।
सीएमएचओ कार्यालयों में स्टाफ की कमी बताकर डॉक्टरों को अटैच किया जा रहा है। पैरामेडिकल कर्मचारियों को भी अस्पतालों से हटाकर कार्यालयों में लगाया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक कुछ कर्मचारी राजनीतिक पहुंच के जरिए अपना अटैचमेंट करवा लेते हैं। इससे उन्हें कार्यालयों में काम करने और साप्ताहिक छुट्टियों का फायदा मिलता है।
कई मामलों में अटैचमेंट की जानकारी स्वास्थ्य मुख्यालय तक नहीं पहुंचती। शिकायत मिलने या जानकारी मांगे जाने पर ही ऐसे मामलों का पता चलता है।
इसका असर अस्पतालों की व्यवस्था पर पड़ रहा है। डॉक्टरों को मरीजों के इलाज के बजाय दफ्तरों में काम करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की नई (Health Employees Salary Deduction) व्यवस्था का मकसद कर्मचारियों की उपस्थिति पर निगरानी बढ़ाना है। इससे यह पता चल सकेगा कि कौन कर्मचारी अपनी पोस्टिंग वाली जगह पर मौजूद है।
ऑनलाइन हाजिरी ट्रेजरी से जुड़ने पर बिना उपस्थिति के वेतन मिलने पर रोक लग सकेगी। साथ ही दूसरे कार्यालयों में अटैच कर्मचारियों की स्थिति भी स्पष्ट होगी।
हालांकि नई व्यवस्था नवंबर से लागू करने की तैयारी है। इसका असर सॉफ्टवेयर अपडेट होने और नियमों के पालन पर निर्भर करेगा। अब देखना होगा कि विभाग अटैचमेंट खत्म कर कर्मचारियों को उनके मूल कार्यस्थलों पर वापस भेज पाता है या नहीं।
नवंबर से बदल जाएगा हाजिरी का सिस्टम
कई कर्मचारी अपनी मूल पोस्टिंग छोड़कर दूसरी जगह काम कर रहे हैं। वे वहीं से ऑनलाइन हाजिरी भी दर्ज कर रहे हैं। इससे उनकी सैलरी पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।
अब विभाग इस व्यवस्था को बदलने जा रहा है। नवंबर से (Online Attendance New Rules) ऑनलाइन अटेंडेंस को ट्रेजरी से जोड़ने की तैयारी है। इसके बाद कर्मचारियों की हाजिरी के आधार पर वेतन तय होगा।
जहां पोस्टिंग होगी वहीं से लगेगी हाजिरी
स्वास्थ्य संचालनालय ने सिस्टम में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) की मदद से सॉफ्टवेयर अपडेट किया जा रहा है।
सिस्टम ट्रेजरी से जुड़ने के बाद गैरहाजिरी का असर सीधे वेतन पर पड़ेगा। इससे लंबे समय से दूसरे कार्यालयों में काम कर रहे कर्मचारियों पर दबाव बढ़ेगा।
रायपुर में बिना पद के काम कर रहे तीन नेत्र सहायक
पंडरी अस्पताल में आंखों की जांच और इलाज की व्यवस्था भी नहीं है। इसके लिए माना में अलग नेत्र अस्पताल खोला गया है। इसके बावजूद तीनों नेत्र सहायकों को पंडरी अस्पताल से वापस नहीं भेजा गया।
रायपुर के सीएमएचओ कार्यालय में भी तीन डॉक्टर अटैच हैं। इनके अलावा वार्ड बॉय और सफाई कर्मचारियों को दूसरी जगह लगाया गया है।
कई जिलों में डॉक्टरों से लिया जा रहा दफ्तर का काम
इन जिलों के सीएमएचओ कार्यालयों में डॉक्टर और तकनीकी कर्मचारी अटैच हैं। कई जगह अस्पतालों में तैनात कर्मचारियों से कार्यालयों का काम कराया जा रहा है।
रायपुर के ग्रामीण इलाकों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ कर्मचारी भी दूसरे कार्यालयों में काम कर रहे हैं। इससे स्वास्थ्य केंद्रों में कर्मचारियों की कमी हो सकती है। मरीजों को समय पर इलाज मिलने में भी परेशानी होती है।
विधानसभा में घोषणा के बाद भी खत्म नहीं हुआ अटैचमेंट
स्वास्थ्य संचालनालय ने 22 सितंबर को दोबारा आदेश जारी किया था। इसमें फरवरी और मार्च 2026 के दौरान दिए गए आश्वासनों की जानकारी मांगी गई थी।
अधिकारियों को तीन दिन के भीतर आदेश के पालन का प्रमाण देना था। देरी होने पर उसका कारण बताने के निर्देश भी दिए गए थे।
इस आदेश को करीब एक महीना बीत चुका है। इसके बावजूद कई जिलों में अटैचमेंट की व्यवस्था जारी है।
कर्मचारियों के अटैचमेंट पर क्यों उठ रहे सवाल?
रिपोर्ट के मुताबिक कुछ कर्मचारी राजनीतिक पहुंच के जरिए अपना अटैचमेंट करवा लेते हैं। इससे उन्हें कार्यालयों में काम करने और साप्ताहिक छुट्टियों का फायदा मिलता है।
कई मामलों में अटैचमेंट की जानकारी स्वास्थ्य मुख्यालय तक नहीं पहुंचती। शिकायत मिलने या जानकारी मांगे जाने पर ही ऐसे मामलों का पता चलता है।
इसका असर अस्पतालों की व्यवस्था पर पड़ रहा है। डॉक्टरों को मरीजों के इलाज के बजाय दफ्तरों में काम करना पड़ रहा है।
नई व्यवस्था से अस्पतालों में स्टाफ की कमी दूर होने की उम्मीद
ऑनलाइन हाजिरी ट्रेजरी से जुड़ने पर बिना उपस्थिति के वेतन मिलने पर रोक लग सकेगी। साथ ही दूसरे कार्यालयों में अटैच कर्मचारियों की स्थिति भी स्पष्ट होगी।
हालांकि नई व्यवस्था नवंबर से लागू करने की तैयारी है। इसका असर सॉफ्टवेयर अपडेट होने और नियमों के पालन पर निर्भर करेगा। अब देखना होगा कि विभाग अटैचमेंट खत्म कर कर्मचारियों को उनके मूल कार्यस्थलों पर वापस भेज पाता है या नहीं।
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