छत्तीसगढ़ सरकार के लिए पर्यटन बना घाटे का सौदा, नुकसान पूरा करने के लिए 19 निवेशकों को न्यौता

छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यटन बढ़ाने के लिए 1500 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया है। पिछले 5 साल में पर्यटन पर 100 करोड़ खर्च हुए, लेकिन कमाई सिर्फ 40 करोड़ रही है।

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Arun Tiwari
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News In Short

  • छत्तीसगढ़ सरकार का पयर्टन में खर्च ज्यादा कमाई कम है।

  • सरकार ने 100 करोड़ खर्चे, लेकिन कमाई 40 करोड़ की हुई है।

  • सरकार ने 19 निवेशकों को पयर्टन स्थलों पर होटल बनाने का न्यौता दिया है।

  • 1500 करोड़ के निवेश पर 4 हजार को रोजगार देने का वादा भी लिया गया है।

News In Detail

रायपुर. छत्तीसगढ़ में पर्यटन का स्कोप लाजवाब है लेकिन इसको एक्सप्लोर करने में कमी है। इसीलिए ये सरकार के लिए घाटे का सौदा साबित हुआ है। पिछले 5 साल में सरकार ने अपने पर्यटन स्थलों पर 100 करोड़ रुपए खर्च किए हैं लेकिन इससे कमाई महज 40 करोड़ रुपए की ही हुई है।

इस घाटा पूरा करने के लिए सरकार ने 19 निवेशकों को पयर्टन स्थलों पर होटल बनाने का न्यौता दिया है। सरकार ने इनको जो इंट्रेस्ट ऑफ इन्वेस्टमेंट का लेटर दिया है उसमें 1500 करोड़ के निवेश की बात है। इससे इनको 4 हजार लोगों को रोजगार देने का वादा भी लिया गया है।  

पर्यटन विभाग को उम्मीद है कि, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से राज्य के प्राकृतिक और सांस्कृतिक खजाने को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर पहचान मिलेगी। ला, यह पहल छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की एक महत्वाकांक्षी कोशिश है।

Chhattisgarh Tourism Investment

घाटे का सौदा बना पर्यटन

छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, जलप्रपातों, घने जंगलों, ऐतिहासिक धरोहरों और आदिवासी संस्कृति से भरपूर राज्य है। यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इन संभावनाओं को जमीन पर उतारने में सरकार अब तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाई है। यही वजह है कि पर्यटन सरकार के लिए फायदे का नहीं, बल्कि घाटे का सौदा साबित हो रहा है। हालात इतने खराब हैं कि आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया वाली कहावत पूरी तरह सटीक बैठती नजर आ रही है।

पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यटन स्थलों के विकास, रखरखाव, प्रचार-प्रसार और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर करीब 100 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इसके मुकाबले पर्यटन से सरकार को केवल 40 करोड़ रुपए की ही आमदनी हो पाई है। यानी सीधे तौर पर 60 करोड़ रुपए का घाटा सामने आया है। 

19 निवेशकों को न्यौता

घाटे की भरपाई और पर्यटन को रफ्तार देने के लिए अब सरकार ने नई रणनीति अपनाई है। सरकार ने 19 निजी निवेशकों को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर होटल, रिसॉर्ट और अन्य सुविधाएं विकसित करने के लिए निवेश का न्यौता दिया है। इन निवेशकों को ‘इंटरेस्ट ऑफ इन्वेस्टमेंट’ (IOI) लेटर जारी किए गए हैं, जिनमें करीब 1500 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव शामिल है।

सरकार का दावा है कि इस निवेश से न सिर्फ पर्यटन स्थलों पर विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित होंगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। निवेशकों से करीब 4 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देने का वादा भी लिया गया है। इससे बस्तर और अन्य पिछड़े इलाकों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

Chhattisgarh Tourism Investment

पांच साल में पर्यटन स्थलों पर खर्च फंड 

वर्षराशि (करोड़ रुपए में)
202110 करोड़ रुपए
202238 करोड़ रुपए
202322 करोड़ रुपए
202425 करोड़ रुपए
20252 करोड़ रुपए
कुल97 करोड़ रुपए

पांच साल में इतनी हुई कमाई

वित्तीय वर्षबजट/राशि (करोड़ रुपए में)
2020-215 करोड़ रुपए
2021-227 करोड़ रुपए
2022-2310 करोड़ रुपए
2023-249 करोड़ रुपए
2024-2510 करोड़ रुपए

 छत्तीसगढ़ सरकार ने इन निवेशकों को होटल बनाने का न्यौता दिया है।

क्र.सं.संस्था/कंपनी का नामनिवेश राशि (करोड़ रुपए में)
1आरोग्य मार्ट300 करोड़
2मार्स विवान220 करोड़
3छत्तीसगढ़ इन्वेस्टमेंट212 करोड़
4मीरा शांतिवनम200 करोड़
5चौहान हाउसिंग143 करोड़
6पंचामृत एंटरटेनमेंट81 करोड़
7डीएसएस इन्फ्रा78 करोड़
8सेलीब्रेशन होटल एंड रिसॉर्ट75 करोड़
9एमएम इन होटल्स63 करोड़
10पीएसए रिसॉर्ट60 करोड़
11डॉल्फिन प्रमोटर्स55 करोड़
12अरुणद्वाति होटल्स38 करोड़
13विद्या इन25 करोड़
14बाफना लॉन21 करोड़
15नमन क्लब एंड वेलनेस सेंटर8 करोड़
16एएस बिल्डर एंड ट्रेडर8 करोड़
17भवल ईको टूरिज्म2 करोड़
कुलकुल निवेश1500 करोड़ रुपए
रोजगारकुल संभावित रोजगार3928 लोग

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छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां पर 44 फीसदी क्षेत्र में जंगल है जो लोगों को शांति का अहसास कराता है। यहां तक कि छत्तीसगढ़ के एक गांव को यूनेस्को ने अपनी सूची में स्थान दिया है। यहां पर प्राकृतिक सौंदर्य के साथ साथ पौराणिक इतिहास भी है। यहां पर भगवान राम ने अपने वन गमन के दौरान सबसे ज्यादा समय गुजारा था। यहां की संस्कृति हमेशा लोगों को आकर्षित करती रही है। 

यहां पर भगवान राम का ननिहाल भी है। इन सबसे विशेषताओं के बाद भी पर्यटन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ को वो दर्जा नहीं मिल पाया है जिसका वो हकदार है। सरकार ने आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए पर्यटन का सहारा लिया है। छत्तीसगढ़ के पर्यटन को दुनिया के नक्शे पर लाने के लिए सरकार बहुत कोशिश कर रही है। सरकार को लगता है कि पर्यटन ही है जो उसकी आर्थिक स्थिति सुधार सकता है। 

अब आगे क्या

सरकार छत्तीसगढ़ को पर्यटन का मुख्य केंद्र बनाना चाहती है। छत्तीसगढ़ को देश ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय नक्शे पर उभारना चाहती है। सरकार नई टूरिज्म पॉलिसी (Tourism Policy) इसीलिए तैयार कर रही है। पर्यटकों को लुभाने के लिए पयर्टन स्थलों पर बेहतर सुविधाएं हों इसीलिए नई नीति बनाई जा रही है। सरकार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है इसलिए इस नई नीति में प्रायवेट पब्लिक पार्टनशिप मॉडल को अपनाने पर विचार किया जा रहा है। 

important points

  • छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले 5 साल में पर्यटन पर 100 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन कमाई सिर्फ 40 करोड़ रुपये की हुई।

  • पर्यटन स्थलों के विकास में कमी के चलते सरकार को करीब 60 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा।

  • घाटा कम करने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 19 निजी निवेशकों को निवेश का न्यौता दिया।

  • निवेशक प्रमुख पर्यटन स्थलों पर होटल और अन्य सुविधाएं विकसित करेंगे।

  • प्रस्तावित 1500 करोड़ रुपये के निवेश से करीब 4 हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

निष्कर्ष

एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल निजी निवेश ही पर्यटन की तस्वीर नहीं बदल सकता है। इसके लिए सरकार को अपनी नीतियों, प्रचार रणनीति और बुनियादी ढांचे पर भी गंभीरता से काम करना होगा। अगर योजनाओं को सही तरीके से लागू किया गया, तो छत्तीसगढ़ पर्यटन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। फिलहाल पर्यटन विभाग के आंकड़े सरकार के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

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