छत्तीसगढ़ सिटी फॉरेस्ट स्कीम; कहीं अवैध कब्जे तो कहीं ज़मीन की कमी, रायपुर ने झाड़ा पल्ला
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ में सिटी फॉरेस्ट योजना के तहत हरियाली बढ़ाई जा रही है।
- रायपुर में पहले से ऑक्सीजोन और गार्डन हैं, सिटी फॉरेस्ट नहीं चाहिए।
- भिलाई में 2500 एकड़ में जंगल विकसित हो रहा है।
- बिलासपुर में अवैध कब्जे विकास में बाधा बना रहे हैं।
- नगर निगमों में बड़ी ज़मीन की कमी से योजना लागू नहीं हो रही।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में बढ़ते कांक्रीट जंगलों और हरियाली की कमी को देखते हुए, वन विभाग ने सिटी फॉरेस्ट योजना की शुरुआत की है। इसका मुख्य उद्देश्य शहरों के भीतर पेड़-पौधों की कमी को पूरा कर तापमान को नियंत्रित करना है। इस योजना के तहत शहरों में जंगलों की तरह हरियाली बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, ताकि नागरिकों को शहर के बीच भी प्राकृतिक वातावरण का अहसास हो।
क्या है योजना का हाल?
पहले चरण में रायपुर सहित 20 नगर निगम और नगर पालिकाओं को इस योजना में शामिल किया गया था। इसके लिए 5 से 50 हेक्टेयर खाली जमीन की आवश्यकता थी, लेकिन अधिकांश शहरों में इतनी बड़ी ज़मीन नहीं मिल रही। इसके बावजूद, वन विभाग ने केंद्रीय सरकार से कैंपा फंड से धन प्राप्त किया है और आसपास की जगहों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण की योजना बनाई है।
रायपुर में सिटी फॉरेस्ट की स्थिति
रायपुर नगर निगम को इस योजना में रखा गया था, लेकिन यहां काम शुरू नहीं हो पाया। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रायपुर में पहले से कई ऑक्सीजोन और गार्डन मौजूद हैं। इसके अलावा, तालाबों के आसपास भी पौधरोपण किया गया है, इसलिए रायपुर में सिटी फॉरेस्ट की जरूरत नहीं महसूस हो रही है।
भिलाई और बिलासपुर में कार्य
भिलाई में वन विभाग ने नंदनी क्षेत्र में एक बंद खदान पर जंगल विकसित करने का निर्णय लिया है। यहां 2500 एकड़ में जंगल तैयार किया जा रहा है, जिसमें सागौन और आंवले के पेड़ पहले से ही मौजूद हैं। वहीं, बिलासपुर में भी विभाग की जमीन पर अवैध कब्जों की समस्या है, जिसके कारण वहां का विकास ठप पड़ा है।
नगर निगम और नगर पालिका में शामिल शहर
इस योजना में कुल 10 नगर निगम और 10 नगर पालिकाओं को शामिल किया गया था, जिनमें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव, चिरमिरी, रायगढ़, अंबिकापुर, कोरबा और जगदलपुर जैसे बड़े शहर शामिल हैं। नगर पालिकाओं में कवर्धा, मुंगेली, धमतरी, कांकेर, बेमेतरा, बालोद, महासमुंद, बैकुंठपुर, बलौदाबाजार और कोंडागांव भी इस योजना का हिस्सा थे।
सिटी फॉरेस्ट की आवश्यकता
विशेषज्ञों का कहना है कि कई शहरों में बड़े खाली प्लॉट उपलब्ध नहीं हैं, जिस कारण सिटी फॉरेस्ट योजना को सफलतापूर्वक लागू करना मुश्किल हो रहा है। हालांकि, वन विभाग ने आसपास की जगहों पर पौधरोपण की प्रक्रिया को तेज़ कर दिया है और सिटी फॉरेस्ट की योजना को बंद नहीं किया है।
निष्कर्ष
कांक्रीट जंगलों के बीच सिटी फॉरेस्ट की योजना का उद्देश्य शहरी इलाकों में हरियाली बढ़ाना है, ताकि बढ़ते तापमान को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि, जमीन की कमी और अवैध कब्जों की समस्या के कारण कुछ शहरों में इस योजना को लागू करना मुश्किल हो रहा है, लेकिन विभाग ने योजना को बंद करने का कोई इरादा नहीं दिखाया है।
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