CG में सफर हुआ सुहाना: मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा से पहली बार सुदूर गांवों तक पहुंची बस
The Sootr | Feb 22, 2026, 14:45 IST
Impact Feature
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा 2025 के माध्यम से छत्तीसगढ़ के 330 से अधिक गांवों में पहली बार बस सुविधा पहुंची है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर खुले हैं।
Raipur. छत्तीसगढ़ के सुदूर गांवों की तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। जिन रास्तों पर कभी बस का इंतजार भी नहीं होता था, वहां अब रोज बसें चल रही हैं। छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू की गई 'मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा' ने प्रदेश के ग्रामीण परिवहन तंत्र में बड़ा बदलाव लाना शुरू कर दिया है। वर्षों से ऐसे कई गांव थे, जहां सड़कें तो बन गई थीं, पर सार्वजनिक बस सेवा कभी शुरू नहीं हो पाई थी। अब पहली बार इन गांवों तक सस्ती, सुरक्षित और नियमित बस सेवा पहुंच रही है।
सरकार की सोच साफ है कि विकास केवल शहरों तक सीमित न रहे। दूर-दराज के गांव भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं से सीधे जुड़ें। इसी उद्देश्य के साथ 'मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना 2025' को लागू किया गया है।
इस योजना के तहत अब तक 57 बसों का संचालन शुरू हो चुका है और ये बसें 57 अलग-अलग मार्गों पर चल रही हैं। इन बसों के जरिए लगभग 330 नए गांवों तक पहली बार सार्वजनिक परिवहन सुविधा पहुंची है। इससे ग्रामीण जीवन में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण इलाकों में लोगों को पहले जिला मुख्यालय, तहसील या शहर तक पहुंचने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। निजी वाहन या बाइक ही एकमात्र सहारा थे। कई बार लोगों को कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का उद्देश्य ऐसे ही क्षेत्रों को परिवहन सुविधा से जोड़ना है। इस योजना के तहत बसें गांवों को जनपद मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, शहर और जिला मुख्यालय से जोड़ रही हैं।
इससे ग्रामीणों को कई तरह की सुविधाएं मिल रही हैं। बच्चे आसानी से स्कूल और कॉलेज पहुंच पा रहे हैं, मरीज समय पर अस्पताल पहुंच रहे हैं और किसानों को मंडी तक पहुंचने में सहूलियत मिल रही है। सरकारी कामों के लिए भी लोगों को अब बार-बार परेशान नहीं होना पड़ रहा है। बस संचालकों को सरकारी मदद ग्रामीण क्षेत्रों में बस चलाना कई बार आर्थिक रूप से मुश्किल होता है। यात्रियों की संख्या कम होने से निजी ऑपरेटरों को नुकसान का डर रहता है। इसी वजह से सरकार ने बस संचालकों को आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था की है।
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मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत बस संचालकों को प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसके तहत पहले वर्ष ₹26 प्रति किलोमीटर, दूसरे वर्ष ₹24 प्रति किलोमीटर और तीसरे वर्ष ₹22 प्रति किलोमीटर की मदद दी जाएगी। इस व्यवस्था से बस ऑपरेटरों को भरोसा मिला है और ग्रामीण मार्गों पर बस चलाने में उनकी रुचि बढ़ी है।
इस महत्वाकांक्षी योजना की औपचारिक शुरुआत 4 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर से हुई थी। उस दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बसों को हरी झंडी दिखाकर इस नई व्यवस्था की शुरुआत की थी।
पहले चरण में 34 बसें 34 मार्गों पर चलाई गईं। इससे लगभग 250 गांवों को पहली बार नियमित बस सेवा से जोड़ा गया। खास बात यह रही कि यह शुरुआत बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी क्षेत्रों से की गई है। इन इलाकों में लंबे समय से परिवहन सुविधा एक बड़ी समस्या रही थी। बस सेवा शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों में भारी उत्साह देखा गया।
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योजना को आगे बढ़ाते हुए 10 दिसंबर 2025 को दूसरे चरण की शुरुआत की गई है। इस चरण में 24 नई बसें 23 अतिरिक्त मार्गों पर शुरू की गई हैं। इसके साथ करीब 180 और गांवों को बस सेवा से जोड़ दिया गया है। जनवरी 2026 तक कुल 57 मार्गों पर बसें चलने लगीं और लगभग 330 गांवों को इसका सीधा लाभ मिलने लगा है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में इस नेटवर्क को और बड़ा करना है। वित्त वर्ष 2026-27 तक बसों की संख्या बढ़ाकर 200 तक पहुंचाने की योजना है।
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सरगुजा संभाग के जशपुर जिले में पहाड़ी और दूरस्थ गांवों तक बस सेवा पहुंचने से लोगों में खासा उत्साह है। अब गांव के लोग जिला मुख्यालय और विकासखंड मुख्यालय तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं। इससे छात्रों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सरकारी कर्मचारियों को काफी राहत मिली है। समय पर स्कूल, कॉलेज और दफ्तर पहुंचना अब पहले से कहीं आसान हो गया है।
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मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के तहत बंदरचुंवा से सिंगीबहार होते हुए जशपुर तक नई बस सेवा शुरू की गई है। इससे ग्रामीणों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने में बड़ी राहत मिली है। इसी तरह बस्तर के ग्राम पंचायत गोंडियापाल में भी बस सेवा शुरू की गई है। इस रूट पर बस चेराकुर, कुंगारपाल, बाकेल, फरसागुड़ा, भानपुरी और बस्तर ब्लॉक से होते हुए जगदलपुर तक जाती है। इस सेवा से ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक कामों के लिए नियमित परिवहन मिल गया है।
इस योजना से विद्यार्थियों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। पहले कई छात्रों को बस पकड़ने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। 'पुष्पेंद्र कॉलेज ऑफ नर्सिंग' की फाइनल ईयर की छात्रा लक्ष्मी बताती हैं कि पहले बस पकड़ने के लिए काफी परेशानी होती थी, अब बस उनके घर के सामने से गुजरती है और कॉलेज पहुंचना आसान हो गया है। इसी तरह पीजी कॉलेज की छात्रा निशा कहती हैं कि पहले उन्हें बस पकड़ने के लिए 5 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था, अब सिदमा गांव से ही बस मिल जाती है और वे सीधे गांधी चौक तक पहुंच जाती हैं।
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शहरी स्वास्थ्य अस्पताल में कार्यरत परमानिया पैकरा बताती हैं कि पहले ड्यूटी पर समय से पहुंचना बड़ी चुनौती थी और सुरक्षित तरीके से घर लौटना भी मुश्किल होता था। बस सेवा शुरू होने के बाद उनकी समस्या काफी हद तक खत्म हो गई है। अब वे समय पर अस्पताल पहुंच जाती हैं और ड्यूटी के बाद सुरक्षित घर लौट आती हैं। स्वास्थ्य कर्मी चंदा टोप्पो भी बताती हैं कि पहले बांदा क्षेत्र से आने-जाने के साधन बहुत कम थे, बस सेवा शुरू होने के बाद उनका रोज का सफर काफी आसान हो गया है।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के कारण गांवों में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। स्थानीय युवाओं को ड्राइवर और कंडक्टर के रूप में रोजगार मिला है। बाजार और सेवा गतिविधियां बढ़ने से गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। सरगुजा जिले के सिदमा गांव के निवासी दिव्यांशु सिंह बताते हैं कि पहले उन्हें रोज 5 किलोमीटर बाइक या पैदल चलना पड़ता था, अब गांव से ही बस मिल जाती है और वे समय पर स्कूल पहुंच जाते हैं।
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सरकार का मानना है कि यह बस सेवा केवल परिवहन सुविधा नहीं है, बल्कि यह सुदूर गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम बन रही है। बस चलने से व्यापार बढ़ रहा है, शिक्षा तक पहुंच आसान हुई है और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी लोगों तक पहुंच रहा है। सरगुजा और बस्तर के वनांचल क्षेत्रों की सड़कों पर दौड़ती ये बसें अब राज्य की नई विकास यात्रा की पहचान बन रही हैं।
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सरकार की सोच साफ है कि विकास केवल शहरों तक सीमित न रहे। दूर-दराज के गांव भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं से सीधे जुड़ें। इसी उद्देश्य के साथ 'मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना 2025' को लागू किया गया है।
इस योजना के तहत अब तक 57 बसों का संचालन शुरू हो चुका है और ये बसें 57 अलग-अलग मार्गों पर चल रही हैं। इन बसों के जरिए लगभग 330 नए गांवों तक पहली बार सार्वजनिक परिवहन सुविधा पहुंची है। इससे ग्रामीण जीवन में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
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दूरस्थ गांवों को जोड़ने की बड़ी पहल
इससे ग्रामीणों को कई तरह की सुविधाएं मिल रही हैं। बच्चे आसानी से स्कूल और कॉलेज पहुंच पा रहे हैं, मरीज समय पर अस्पताल पहुंच रहे हैं और किसानों को मंडी तक पहुंचने में सहूलियत मिल रही है। सरकारी कामों के लिए भी लोगों को अब बार-बार परेशान नहीं होना पड़ रहा है। बस संचालकों को सरकारी मदद ग्रामीण क्षेत्रों में बस चलाना कई बार आर्थिक रूप से मुश्किल होता है। यात्रियों की संख्या कम होने से निजी ऑपरेटरों को नुकसान का डर रहता है। इसी वजह से सरकार ने बस संचालकों को आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था की है।
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मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत बस संचालकों को प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसके तहत पहले वर्ष ₹26 प्रति किलोमीटर, दूसरे वर्ष ₹24 प्रति किलोमीटर और तीसरे वर्ष ₹22 प्रति किलोमीटर की मदद दी जाएगी। इस व्यवस्था से बस ऑपरेटरों को भरोसा मिला है और ग्रामीण मार्गों पर बस चलाने में उनकी रुचि बढ़ी है।
जगदलपुर से शुरू हुआ नया सफर
पहले चरण में 34 बसें 34 मार्गों पर चलाई गईं। इससे लगभग 250 गांवों को पहली बार नियमित बस सेवा से जोड़ा गया। खास बात यह रही कि यह शुरुआत बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी क्षेत्रों से की गई है। इन इलाकों में लंबे समय से परिवहन सुविधा एक बड़ी समस्या रही थी। बस सेवा शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों में भारी उत्साह देखा गया।
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दूसरे चरण में बढ़ा बस नेटवर्क
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जशपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में भी पहुंची बस
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नई बस सेवा से बढ़ी कनेक्टिविटी
विद्यार्थियों के लिए बड़ा सहारा
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स्वास्थ्य कर्मियों को मिली राहत
ग्रामीण जीवन में दिख रहा बदलाव
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विकास की मुख्यधारा से जुड़ते गांव
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