एमपी में 1700 हेक्टेयर जमीन से कोयला निकालेगी एससीएल, छत्तीसगढ़ में कोल इंडिया को मिली 1500 हेक्टेयर लैंड

Arun Tiwari | Mar 25, 2026, 19:28 IST
coal-india-land-acquisition-chhattisgarh-madhya-pradesh-2024-2025-data
छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में कोयला खनन के लिए जमीन अधिग्रहण में बड़ा उछाल देखने को मिला है। 2024 के मुकाबले 2025 में अधिग्रहण की रफ्तार तेज हुई, कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों ने मुआवजा वितरण और रोजगार देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।

Raipur. छत्तीसगढ़ की धरती से कोयला निकालने की तैयारी और तेज़ हो गई है। इसमें मध्यप्रदेश भी पीछे नहीं है। यह जानकारी लोकसभा में सामने आई। केंद्र सरकार के मुताबिक साल 2024 की तुलना में 2025 में जमीन अधिग्रहण के मामले में एक बड़ा उछाल आया है।



जहां 2024 और 2025 में मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़ की हजारों हेक्टेयर जमीन कोल इंडिया लिमिटेड ने अधिग्रहित कर ली। कोल इंडिया कोयला खोदने के लिए साल 2024 में मध्यप्रदेश की डेढ़ हजार हेक्टेयर जमीन ली तो 2025 में छत्तीसगढ़ में इतनी ही जमीन अधिग्रहित कर ली। साल 2026 में मध्यप्रदेश में फिर 200 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया।



कोल इंडिया लिमिटेड के हाथों में इतनी जमीन :

मध्यप्रदेश :


साल 2024 - 1485.66 हेक्टेयर


साल 2024 - 202.113 हेक्टेयर



छत्तीसगढ़ :


साल 2025-


गेवरा में सबसे ज्यादा 861.701 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई।


कोरबा में भी 607.118 हेक्टेयर जमीन खनन के लिए आवंटित हुई।


रायगढ़ में भी करीब 42 हेक्टेयर जमीन ली गई है।


साल 2024 में इन इलाकों में अधिग्रहण लगभग शून्य था लेकिन 2025 में अचानक तेजी आ गई।



एमपी में इतना मिला मुआवजा :

मध्यप्रदेश को एसईसीएल से साल 2024 में 49.6 करोड़ रुपए और 2025 में 45 करोड़ रुपए का मुआवजा मिला। इन दो सालों में रोजगार के नाम पर 536 और 234 लोगों को रोजगार दिया गया। वहीं साल 2024 में एनसीएल ने 82.26 करोड़ और 2025 में 136.32 करोड़ का मुआवजा प्राप्त हुआ। इन दो सालों में एनसीएल ने 28 और 42 लोगों को ही रोजगार मिल पाया।



छत्तीसगढ़ में इतना मिला मुआवजा :

छत्तीसगढ़ में एसईसीएल ने कुल 372 करोड़ रुपये मुआवजे के रुप में बांटे। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने जमीन खोने वाले परिवारों के लिए 2024 में 129.32 करोड़ और 2025 372.108 करोड़ रुपए दिए। वहीं 278 और 225 लोगों को रोजगार दिया गया।



राहत की बात यह है कि 2024 में मुआवजे के लिए जो 1,221 परिवार इंतज़ार कर रहे थे। अब उनकी संख्या घटकर शून्य हो गई है। यानी लंबित मामलों का तेज़ी से निपटारा किया गया है।



बिलासपुर में सुलझेंगे कानूनी पेंच :

जमीन अधिग्रहण के साथ अक्सर कानूनी विवाद भी जुड़ जाते हैं। इन झगड़ों को जल्द निपटाने के लिए बिलासपुर में एक विशेष ट्रिब्यूनल (Part Time Tribunal) बनाया गया है। यह अदालत खास तौर पर SECL के भूमि विवादों की सुनवाई करती है। अदालतों में पेंडिंग मामलों की संख्या 46 से घटकर अब 40 रह गई है। सरकार की कोशिश है कि 1957 के पुराने नियमों के तहत किसानों और जमीन मालिकों के विवादों को समय पर सुलझाया जाए।



निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में कोयला खनन (coal mining) की रफ्तार अचानक तेज हो गई है। एक साल के भीतर गेवरा और कोरबा जैसे बड़े कोल बेल्ट इलाकों में हजारों हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया है। केंद्र सरकार के ताजा आंकड़े बताते हैं कि जहां साल 2024 में जमीन अधिग्रहण लगभग ठप था, वहीं 2025 में इसमें जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। इस तेजी ने न सिर्फ प्रशासनिक हलकों को चौंकाया है, बल्कि स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा तेज कर दी है।



ये खबरें भी पढ़ें...

छत्तीसगढ़ में कोयला खनन के विस्तार पर जोर, केंद्रीय राज्यमंत्री और सीएम के बीच हुई लंबी बात



CG के सरगुजा में कोयला खनन का खेल, अडाणी की कंपनी और ग्रामीणों का विरोध, जानें



कोल इंडिया की नई योजना: SECL अफसरों को मोबाइल खरीदने के लिए मिलेंगे पैसे,करना होगा ये काम



कोल इंडिया लिमिटेड में मैनेजमेंट ट्रेनी की भर्ती, जानें अंतिम तिथि



Tags:
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • कोल इंडिया लिमिटेड
  • coal mining
  • कोल इंडिया