छत्तीसगढ़ में आयुष्मान योजना के नाम पर मरीजों से वसूली, 17 अस्पताल जांच के घेरे में, 14 की जांच पूरी
Umeshwari Baghel | Oct 12, 2026, 18:04 IST
आयुष्मान योजना में धांधली
छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों की मनमानी के मामले सामने आए हैं। कुछ अस्पतालों पर मरीजों से अतिरिक्त पैसे लेने और इलाज के लिए गलत पैकेज इस्तेमाल करने के आरोप हैं। शिकायतों के बाद राज्य नोडल एजेंसी ने 17 अस्पतालों को जांच के दायरे में लिया था।
इनमें से 14 अस्पतालों के दस्तावेजों की जांच पूरी हो चुकी है। अब दोषी पाए जाने वाले अस्पतालों पर जुर्माना लगाने और उन्हें योजना से बाहर करने जैसी कार्रवाई हो सकती है।
छत्तीसगढ़ में गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त इलाज देने वाली आयुष्मान भारत योजना पर सवाल उठ रहे हैं। योजना से जुड़े कुछ निजी अस्पतालों के खिलाफ गंभीर शिकायतें मिली हैं। आरोप है कि अस्पतालों ने इलाज के लिए निर्धारित पैकेज का सही इस्तेमाल नहीं किया। कुछ मरीजों से तय राशि से ज्यादा पैसे भी वसूले गए।
इन शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग और राज्य नोडल एजेंसी ने जांच शुरू की। प्रदेश के 17 अस्पतालों को जांच के दायरे में रखा गया। इनमें से 14 अस्पतालों के दस्तावेजों की जांच पूरी कर ली गई है। अब जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
आठ जिलों के
जांच के दायरे में प्रदेश के अलग-अलग जिलों के निजी अस्पताल शामिल हैं। इनमें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, सरगुजा, बस्तर, कबीरधाम, कोंडागांव और कोरबा के अस्पताल हैं।
राज्य नोडल एजेंसी की टीम ने इन अस्पतालों से इलाज और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच की है। जांच का मुख्य आधार मरीजों से अतिरिक्त वसूली और उपचार पैकेज में गड़बड़ी की शिकायतें हैं। फिलहाल 17 में से 14 अस्पतालों की जांच पूरी होने की जानकारी सामने आई है। बाकी तीन अस्पतालों की जांच पूरी होने के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है।
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को आर्थिक परेशानी के बिना इलाज उपलब्ध कराना है। योजना के तहत अलग-अलग बीमारियों और उपचार के लिए पैकेज निर्धारित हैं। इन्हीं पैकेज के आधार पर सूचीबद्ध अस्पतालों को भुगतान किया जाता है।
नियमों के मुताबिक योजना में शामिल उपचार के लिए पात्र मरीजों से अतिरिक्त राशि नहीं ली जानी चाहिए। इसके बावजूद कुछ अस्पतालों के खिलाफ मरीजों से पैसे वसूलने की शिकायतें मिली हैं।
शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ अस्पतालों ने इलाज के लिए गलत पैकेज का इस्तेमाल किया। इससे योजना के तहत होने वाले भुगतान की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
इस मामले में पहले भी स्वास्थ्य विभाग की जांच के आधार पर दो अस्पतालों को आयुष्मान योजना से बाहर करने की अनुशंसा की गई थी।
जिलास्तरीय जांच टीम ने संबंधित अस्पतालों के डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश भी की थी। इसके साथ ही अस्पतालों को योजना से निलंबित करने की बात कही गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार इन सिफारिशों के बाद भी आगे की प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का मामला सामने आया है। हालांकि संबंधित अस्पतालों और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मौजूदा स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अब 14 अस्पतालों के दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। जांच में आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित अस्पतालों को आर्थिक दंड देना पड़ सकता है।
गंभीर अनियमितता मिलने पर अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना से बाहर भी किया जा सकता है। इस प्रक्रिया को डी-इम्पैनलमेंट कहा जाता है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कितने अस्पतालों के खिलाफ आरोप साबित हुए हैं। जुर्माने की राशि और अंतिम कार्रवाई को लेकर भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
आयुष्मान भारत योजना को लेकर विवाद सिर्फ मरीजों से अतिरिक्त पैसे लेने तक सीमित नहीं है। निजी अस्पताल भी योजना के भुगतान और इलाज के पैकेज को लेकर नाराजगी जता रहे हैं।
अस्पताल संचालकों और उनसे जुड़ी संस्थाओं की शिकायत है कि मरीजों का इलाज करने के बाद भुगतान मिलने में काफी समय लगता है। इससे अस्पतालों के सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी होती हैं।
निजी अस्पतालों का यह भी कहना है कि कई वर्षों से इलाज के पैकेज की दरों में संशोधन नहीं हुआ है। इलाज का खर्च बढ़ने के बावजूद पुरानी दरों पर भुगतान किया जा रहा है। इस तरह एक ओर मरीज अतिरिक्त वसूली की शिकायत कर रहे हैं। दूसरी ओर अस्पताल भुगतान में देरी और पैकेज की दरें बढ़ाने की मांग उठा रहे हैं।
आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब परिवारों को इलाज में राहत देने का प्रावधान है। ऐसे में अतिरिक्त वसूली की शिकायतें मरीजों के हितों से जुड़ा गंभीर मामला हैं। फिलहाल 14 अस्पतालों के दस्तावेजों की जांच पूरी हो चुकी है।
अब सवाल यह है कि जांच में अनियमितता साबित होने पर कितने अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।पहले दो अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश हो चुकी है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और राज्य नोडल एजेंसी के अगले फैसले पर नजर बनी हुई है।
FAQ
आयुष्मान योजना में अस्पतालों की मनमानी
इन शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग और राज्य नोडल एजेंसी ने जांच शुरू की। प्रदेश के 17 अस्पतालों को जांच के दायरे में रखा गया। इनमें से 14 अस्पतालों के दस्तावेजों की जांच पूरी कर ली गई है। अब जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
आठ जिलों के अस्पताल जांच के घेरे में
राज्य नोडल एजेंसी की टीम ने इन अस्पतालों से इलाज और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच की है। जांच का मुख्य आधार मरीजों से अतिरिक्त वसूली और उपचार पैकेज में गड़बड़ी की शिकायतें हैं। फिलहाल 17 में से 14 अस्पतालों की जांच पूरी होने की जानकारी सामने आई है। बाकी तीन अस्पतालों की जांच पूरी होने के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मुफ्त इलाज के बावजूद मरीजों से पैसे लेने के आरोप
नियमों के मुताबिक योजना में शामिल उपचार के लिए पात्र मरीजों से अतिरिक्त राशि नहीं ली जानी चाहिए। इसके बावजूद कुछ अस्पतालों के खिलाफ मरीजों से पैसे वसूलने की शिकायतें मिली हैं।
शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ अस्पतालों ने इलाज के लिए गलत पैकेज का इस्तेमाल किया। इससे योजना के तहत होने वाले भुगतान की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
दो अस्पतालों को योजना से बाहर करने की सिफारिश
जिलास्तरीय जांच टीम ने संबंधित अस्पतालों के डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश भी की थी। इसके साथ ही अस्पतालों को योजना से निलंबित करने की बात कही गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार इन सिफारिशों के बाद भी आगे की प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का मामला सामने आया है। हालांकि संबंधित अस्पतालों और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मौजूदा स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अस्पतालों पर जुर्माना लगाने की तैयारी
गंभीर अनियमितता मिलने पर अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना से बाहर भी किया जा सकता है। इस प्रक्रिया को डी-इम्पैनलमेंट कहा जाता है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कितने अस्पतालों के खिलाफ आरोप साबित हुए हैं। जुर्माने की राशि और अंतिम कार्रवाई को लेकर भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
निजी अस्पतालों ने भी उठाए भुगतान पर सवाल
अस्पताल संचालकों और उनसे जुड़ी संस्थाओं की शिकायत है कि मरीजों का इलाज करने के बाद भुगतान मिलने में काफी समय लगता है। इससे अस्पतालों के सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी होती हैं।
निजी अस्पतालों का यह भी कहना है कि कई वर्षों से इलाज के पैकेज की दरों में संशोधन नहीं हुआ है। इलाज का खर्च बढ़ने के बावजूद पुरानी दरों पर भुगतान किया जा रहा है। इस तरह एक ओर मरीज अतिरिक्त वसूली की शिकायत कर रहे हैं। दूसरी ओर अस्पताल भुगतान में देरी और पैकेज की दरें बढ़ाने की मांग उठा रहे हैं।
अब स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर नजर
अब सवाल यह है कि जांच में अनियमितता साबित होने पर कितने अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।पहले दो अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश हो चुकी है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और राज्य नोडल एजेंसी के अगले फैसले पर नजर बनी हुई है।
FAQ
- आयुष्मान भारत योजना के तहत किस प्रकार के अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है?
छत्तीसगढ़ में 14 निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने मरीजों से निर्धारित पैकेज से अधिक पैसे लिए और इलाज के लिए गलत पैकेज का इस्तेमाल किया। - आयुष्मान भारत योजना से शुल्क वसूली के मामले की जांच कब शुरू हुई?
यह जांच हाल ही में शुरू की गई थी, जब मरीजों द्वारा अस्पतालों के खिलाफ अतिरिक्त शुल्क वसूली और उपचार पैकेज में गड़बड़ी की गंभीर शिकायतें मिलीं। - क्या आयुष्मान योजना में अनियमितता साबित होने पर अस्पतालों को दंडित किया जाएगा?
हाँ, यदि जांच में अनियमितताएँ साबित होती हैं, तो संबंधित अस्पतालों पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है और उन्हें योजना से बाहर भी किया जा सकता है, जिसे डी-इम्पैनलमेंट कहा जाता है।
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