आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े के आरोप में भोपाल के सृष्टि हॉस्पिटल संचालक के खिलाफ EOW ने दर्ज किया केस
Sandeep Kumar | Oct 05, 2026, 23:01 IST
भोपाल के सृष्टि हॉस्पिटल पर आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े का आरोप है
भोपाल के सृष्टि हॉस्पिटल पर आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े का आरोप है। ईओडब्ल्यू ने संचालक राजकुमार सूर्यवंशी और अन्य पर अपराध दर्ज किया। जांच में स्टाफ सूची में नाम दोहराने की बात सामने आई। पैथोलॉजी रिपोर्टों पर कथित फर्जी हस्ताक्षरों का भी आरोप है। अस्पताल को मिले भुगतान की राशि जांची जाएगी। फिलहाल आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया से होगी।
आयुष्मान योजना के नाम पर फर्जीवाड़ें का आरोप
आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Scheme) में गलत जानकारी देने का आरोप है। ईओडब्ल्यू के मुताबिक अस्पताल ने स्टाफ संख्या वास्तविकता से अधिक दिखाई। कुछ डॉक्टरों के नाम बिना उनकी अनुमति इस्तेमाल किए गए। रिपोर्टों पर कथित फर्जी हस्ताक्षरों और सील का आरोप भी है। जांच एजेंसी अब संबंधित दस्तावेजों और भुगतान की पड़ताल करेगी।
स्टाफ सूची में नाम दोहराए
अस्पताल स्टाफ सूची (Hospital Staff List) की जानकारी जांची गई। पोर्टल पर उपलब्ध विवरण की वास्तविक स्थिति से तुलना हुई। एजेंसी का आरोप है कि नाम दोहराकर संख्या बढ़ाई गई। इससे पर्याप्त स्टाफ होने का दावा प्रस्तुत किया गया। संबंधित कर्मचारियों के वास्तव में कार्यरत होने की जांच जरूरी है।
यहां 45 एंट्री का मतलब 45 अलग कर्मचारी नहीं है। करीब 15 अलग नाम मिलने से उनकी नियुक्ति प्रमाणित नहीं होती। प्रत्येक नाम के इस्तेमाल और संबंधित व्यक्ति की भूमिका जांची जाएगी। कौन अस्पताल में काम करता था यह रिकॉर्ड से स्पष्ट होगा। फिलहाल सूची में अंतर शुरुआती जांच का निष्कर्ष बताया गया है।
सभी एंट्री में एक नंबर
स्टाफ के नाम के साथ संपर्क विवरण भी दर्ज था। एक ही नंबर मिलने से स्वतंत्र पुष्टि पर सवाल उठे। अस्पताल में उपलब्ध कर्मचारियों की स्थिति समझना जांच का हिस्सा है। ऑनलाइन विवरण और वास्तविक नियुक्ति के बीच अंतर देखा जाएगा। इससे सूची तैयार करने वालों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
डॉक्टर ने नौकरी से इनकार किया
डॉक्टर के मुताबिक उन्होंने सूची से नाम हटाने को कहा था। इसके बावजूद अस्पताल की सूची में उनका नाम बना रहा। जांच एजेंसी ने इस स्थिति को भी संज्ञान में लिया। उनके विवरण का इस्तेमाल किसने किया इसकी पड़ताल होगी। बिना सहमति नाम दर्ज करने का आरोप जांच के दायरे में है।
पैथोलॉजी रिपोर्टों पर सवाल
संबंधित डॉक्टर ने जांच में हस्ताक्षर अपने नहीं बताए। इससे रिपोर्टों की प्रामाणिकता जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गई। किसने रिपोर्ट तैयार की और हस्ताक्षर किए इसकी पड़ताल होगी। सील के इस्तेमाल की भूमिका भी जांची जाएगी। फिलहाल फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप अंतिम रूप से सिद्ध नहीं हुआ।
आयुष्मान मरीजों से जुड़ी रिपोर्टें
इलाज के दस्तावेज और भुगतान के दावे अब जांचे जाएंगे। किन रिपोर्टों के आधार पर भुगतान मिला यह स्पष्ट होगा। विवादित रिपोर्टों की संख्या का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए सभी मरीजों के इलाज को संदिग्ध नहीं बताया जा सकता। जांच संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर आगे बढ़ेगी।
भुगतान की राशि की जांच
ईओडब्ल्यू जांच (EOW Investigation) अपराध दर्ज होने के बाद जारी है। शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर आरोपों की पड़ताल आगे बढ़ेगी। मामला दर्ज होने से किसी आरोपी का दोष सिद्ध नहीं होता। अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी। उपलब्ध विवरण में अस्पताल प्रबंधन का विस्तृत पक्ष शामिल नहीं है।
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