एमपी में आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े पर एक्शन, 83 अस्पतालों पर गिरी गाज, 18 ब्लैकलिस्ट
Aman Vaishnav | Sept 03, 2026, 08:15 IST
एमपी में आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा
मध्य प्रदेश में आयुष्मान योजना में गड़बड़ी करने वाले 83 अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई की गई है। इनमें से 18 को ब्लैकलिस्ट किया गया है। साथ ही 50 अस्पतालों पर 3 करोड़ 13 लाख 79 हजार 311 रुपए का भारी-भरकम आर्थिक दंड लगाया गया है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में आयुष्मान योजना से जुड़े 83 अस्पतालों पर कार्रवाई हुई है।
- सरकार ने 18 अस्पतालों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
- 15 अस्पतालों को योजना से सस्पेंड किया गया है।
- भोपाल के 25 अस्पताल भी इस कार्रवाई में शामिल हैं।
- जांच में मरीजों को बिना जरूरत आईसीयू में भर्ती करने की गड़बड़ी मिली है।
वहीं कुछ अस्पताल इस सुविधा का गलत फायदा उठा रहे थे। मध्य प्रदेश सरकार ने अब इन पर शिकंजा कस दिया है। राज्य की स्वास्थ्य एजेंसी ने कई महीनों तक अस्पतालों के रिकॉर्ड और क्लेम की जांच की। इस जांच के बाद 83 अस्पतालों पर कार्रवाई का फैसला लिया गया।
किन अस्पतालों पर कार्रवाई
इसका मतलब है कि अब ये अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा 50 अस्पतालों पर आर्थिक दंड लगाया गया है।
इन सभी पर मिलाकर कुल 3 करोड़ 13 लाख 79 हजार 311 रुपए की पेनल्टी लगाई गई है। यह रकम काफी बड़ी मानी जा रही है।
कैसे हुआ ऑडिट
ऑडिट में अस्पतालों के दस्तावेज बहुत बारीकी से खंगाले गए। जांच टीम ने हर क्लेम को मरीज के मेडिकल रिकॉर्ड से मिलाकर देखा। इसी दौरान कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं।
एजेंसी ने साफ किया है कि यह ऑडिट सिर्फ एक बार की कार्रवाई नहीं है। आने वाले समय में भी अस्पतालों के क्लेम की नियमित निगरानी की जाएगी। इससे योजना का दुरुपयोग रोकने में मदद मिलेगी।
क्या मिलीं गड़बड़ियां
कुछ जगह तो तय संख्या से करीब 30 प्रतिशत तक कम बेड मौजूद पाए गए। नियमों का उल्लंघन भी कई जगह देखा गया। इसी तरह की गड़बड़ी के चलते सिद्धांत सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को भी संबंधित मामले में निलंबित किया गया है।
ऐसी गड़बड़ियों का सीधा असर आम मरीजों पर पड़ता है। जो बेड कागज पर दिखाए जाते हैं, वे असल में मरीजों के लिए उपलब्ध ही नहीं होते। इससे जरूरतमंद मरीजों को इलाज मिलने में देरी हो सकती है।
भोपाल में क्या हाल
इन सभी पर मिलाकर कुल 2 करोड़ 11 लाख 91 हजार 492 रुपए की पेनल्टी लगाई गई है। भोपाल में बड़ी संख्या में अस्पताल होने की वजह से यहां कार्रवाई भी ज्यादा हुई है।
राजधानी होने के कारण भोपाल में आयुष्मान योजना से जुड़े मरीजों की संख्या भी अन्य जिलों की तुलना में ज्यादा रहती है। इसी वजह से यहां निगरानी भी सख्त रखी जा रही है।
आगे क्या होगा
एजेंसी का कहना है कि यह जांच और कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी। मरीजों को योजना का सही फायदा मिले, यही असली मकसद बताया जा रहा है।
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