क्या कांग्रेस में खत्म होने वाला है बुजुर्ग राजनीति का दौर, दीपक बैज के बयान से युवा सियासत पर बहस

Arun Tiwari | May 23, 2026, 14:34 IST
congress-politics-young-vs-senior-leaders-debate
कांग्रेस में वरिष्ठ बनाम युवा नेतृत्व की बहस एक बार फिर तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के बयान के बाद टीएस सिंहदेव, चरणदास महंत, दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और अशोक गहलोत जैसे वरिष्ठ नेताओं की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

Raipur. क्या कांग्रेस की राजनीति में उम्रदराज नेताओं का दौर खत्म होने वाला है। क्या कांग्रेस को युवाओं को आगे लाना चाहिए। एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई। इस बहस की वजह छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष दीपक बैज का बयान है। हाल ही में उन्होंने टीएस सिंहदेव के पीसीसी अध्यक्ष बनने के बयान पर कहा कि बाबा साहेब को दिल्ली जाना चाहिए। यहां पर युवाओं को मौका देना चाहिए। इसके बाद छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के वरिष्ठ नेताओं की राजनीति पर सवाल उठने लगे हैं।



छत्तीसगढ़ में टीएस, महंत, कवासी :

छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ नेताओं में टीएस सिंहदेव, चरणदास महंत और कवासी लखमा जैसे नेता शामिल जैन, जिनका आज भी कांग्रेस की सियासत में बड़ा असर है। राजनीतिक विश्लेषक उचित शर्मा कहते हैं कि बीजेपी की तरह कांग्रेस को अपने एनपीए एकाउंट बंद करने होंगे। यहां पर भी जीतू पटवारी जैसे युवाओं की दरकार है। हालांकि इस मामले में टीएस को अलग नहीं किया जा सकता। उनमें अभी भी सबको साथ लेकर चलने की शैली उनको यहां की राजनीति में प्रासंगिक बनाती है। दीपक बैज के खत्म होते कार्यकाल और टीएस के बयान यह चर्चा छेड़ दी है। टीएस कहते हैं कि उनमें अभी भी युवाओं जैसी ऊर्जा है।



मध्य प्रदेश में दिग्विजय-कमलनाथ:

मध्य प्रदेश भी दशकों से चले आ रहे वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव से नहीं उबर पाया है। यहां पर आज भी नेता दिग्विजय सिंह और कमलनाथ की कृपा पर निर्भर हैं। एक सांसद हैं तो एक विधायक हैं। दोनों पूर्व मुख्यमंत्री हैं। हालांकि यहां पर जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष और उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष बनाने से युवा राजनीति की शुरुवात ज़रूर हुई है। जानकर कहते हैं कि बीजेपी से मुकाबला करना है तो युवाओं को आगे लाना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला कहते हैं कि पार्टी में युवाओं और अनुभवी नेताओं का बराबर महत्व है। पार्टी अब 50 फीसदी युवाओं को पद देने की गाइड लाइन पर भी काम कर रही है।



राजस्थान में अशोक गहलोत-पायलट में पेंच:

राजस्थान में भी अशोक गहलोत के कारण सचिन पायलट को वो जगह नहीं मिल पाई है जिसकी मांग उठती रहती है। राजस्थान की राजनीति में भी दो पावर सेंटर काम करते हैं। उचित शर्मा कहते हैं कि कांग्रेस की राजनीति में दो पावर सेंटर का मर्ज बहुत पुराना है। बात एमपी,सीजी,राजस्थान या कर्नाटक की हो, हमेशा सत्ता की हिस्सेदारी पर बहस होती रही है।



बुजुर्गों को न करें दरकिनार:

जानकर कहते हैं कि बुजुर्गों को दरकिनार नहीं किया जा सकता। लेकिन ये बात भी बिल्कुल सच है कि बीजेपी से लड़ने के लिए युवाओं के हाथों में बागडोर और बुजुर्गों के हिस्से में मार्गदर्शन आना चाहिए।



FAQ

  1. कांग्रेस में युवा नेतृत्व की मांग क्यों बढ़ रही है?
    कांग्रेस में लगातार चुनावी चुनौतियों और बीजेपी के मजबूत संगठन के बीच अब युवा नेताओं को आगे लाने की मांग तेज हो रही है। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि युवाओं को संगठन और चुनावी रणनीति में बड़ी जिम्मेदारी देने से कांग्रेस को फायदा मिल सकता है।
  2. दीपक बैज ने टीएस सिंहदेव को लेकर क्या बयान दिया?
    छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि टीएस सिंहदेव जैसे वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली की राजनीति में भूमिका निभानी चाहिए और राज्य में युवाओं को मौका मिलना चाहिए। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस में वरिष्ठ बनाम युवा नेतृत्व की बहस शुरू हो गई।

यह खबरें भी पढ़ें...

दीपक बैज को रास नहीं आई टीएस सिंहदेव की पीसीसी चीफ बनने की बात, बोले बाबा के लिए दिल्ली दूर नहीं



मीडिया में चला मेलोडी ट्रेंड, दीपक बैज ने बताया हनीमून, बीजेपी बोली कांग्रेस नेता मानसिक दरिद्र



चरणदास महंत का रुख हो सकता है राज्यसभा की ओर, टीएस और दीपक बैज भी रेस में लगा रहे जोर



साय सरकार के दो साल पूरे: दीपक बैज ने साधा निशाना, बोले- झूठ बोलकर सत्ता हासिल की, जनाधार खत्म



Tags:
  • कमलनाथ
  • दिग्विजय सिंह
  • टीएस सिंहदेव
  • अशोक गहलोत
  • मध्य प्रदेश
  • दीपक बैज का बयान
  • दीपक बैज
  • छत्तीसगढ़ कांग्रेस
  • कांग्रेस की राजनीति