बिजली कर्मचारी हड़ताल पर, नियमितीकरण की मांग, कंपनी ने थमाया नोटिस
समझें क्या है पूरा मामला
- 2471 संविदा लाइनमैन अनिश्चितकालीन हड़ताल पर
- नियमितीकरण की मांग पर वार्ता बेनतीजा
- 20 कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का नोटिस
- 41 मौतों के बाद भी नहीं मिली स्थायी नौकरी
- बारिश से पहले बिजली व्यवस्था पर संकट
छत्तीसगढ़ में मानसून दस्तक दे चुका है। हर साल की तरह इस बार भी बिजली लाइनों के टूटने, फाल्ट बढ़ने और आपात मरम्मत की चुनौती सामने है। लेकिन इस बार हालात कुछ अलग हैं। जिन लाइनमैनों के भरोसे पूरे प्रदेश की बिजली व्यवस्था टिकी है, वे हड़ताल पर हैं। संविदा कर्मचारियों की मांग नियमितीकरण की है। इधर बिजली कंपनी ने भी लगभग 20 कर्मचारियों को नौकरी समाप्ति का नोटिस थमा दिया है।
बातचीत हुई, समाधान नहीं
छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ और बिजली कंपनी प्रबंधन के बीच हुई बैठक से कर्मचारियों को उम्मीद थी कि वर्षों पुरानी समस्या का कोई रास्ता निकलेगा। लेकिन संघ का आरोप है कि बैठक में उनकी मुख्य मांगों पर चर्चा करने के लिए कोई अधिकारी मौजूद ही नहीं था।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अपनी बात रखने तक का अवसर नहीं दिया गया। नतीजा यह हुआ कि बातचीत खत्म होते ही संघ ने अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर दिया।
41 की करंट लगने से हो मौत चुकी
बिजली लाइन पर काम करना प्रदेश के सबसे जोखिम भरे कामों में गिना जाता है। संघ के आंकड़ों के अनुसार अब तक 41 संविदा कर्मचारियों की करंट लगने से मौत हो चुकी है। सैकड़ों कर्मचारी हादसों में घायल या विकलांग हुए हैं।
18 हजार रुपए मासिक वेतन
इसके बावजूद उन्हें केवल 18 हजार रुपए मासिक वेतन मिलता है। वहीं नियमित कर्मचारी 48 से 50 हजार रुपए तक वेतन पा रहे हैं। बीमा सुरक्षा भी महज एक लाख रुपए तक सीमित है। यानी जान का जोखिम बराबर, लेकिन अधिकार और वेतन में जमीन-आसमान का फर्क।
पहचान अभी भी संविदा
प्रदेशभर में करीब 2471 संविदा लाइनमैन बिजली व्यवस्था का मैदानी काम संभाल रहे हैं। लाइन सुधारने से लेकर फाल्ट दुरुस्त करने तक की जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर है। दूसरी तरफ नियमित कर्मचारियों की संख्या लगातार घट रही है। रिटायरमेंट हो रहे हैं, लेकिन नई भर्ती नहीं हो रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पूरी व्यवस्था इन्हीं कर्मचारियों के भरोसे चल रही है तो इन्हें स्थायी दर्जा देने में आखिर दिक्कत क्या है?
अब 10 साल बाद भी इंतजार
संघ ने सरकार और प्रबंधन के सामने पुराना रिकॉर्ड भी रखा है। दावा किया गया है कि वर्ष 2007, 2009 और 2011 में भर्ती संविदा कर्मचारियों को महज दो साल के भीतर नियमित कर दिया गया था।
लेकिन 2016 और 2018 में भर्ती कर्मचारी आज 8 से 10 साल की सेवा पूरी करने के बावजूद संविदा पर ही काम कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि एक ही संस्था में दो तरह के नियम लागू किए जा रहे हैं।
बारिश में बढ़ सकती है परेशानी
हड़ताल ऐसे समय पर शुरू हुई है जब मानसून के कारण बिजली व्यवस्था पर सबसे ज्यादा दबाव रहता है। लाइन टूटने, ट्रांसफॉर्मर खराब होने और ग्रामीण क्षेत्रों में फाल्ट बढ़ने की आशंका रहती है। यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और बिजली कंपनी दोनों पर दबाव बढ़ने लगा है कि वे समाधान निकालें, टकराव नहीं।
सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं
संविदा कर्मचारियों का कहना है कि यह लड़ाई वेतन बढ़ाने की नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और भविष्य की है। वर्षों से स्थायी प्रकृति का काम करने वाले कर्मचारी अब लिखित आश्वासन और नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
निष्कर्ष
बिजली कंपनी फिलहाल नोटिस दिखा रही है और कर्मचारी अपनी एकसूत्रीय मांग पर अड़े हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस व्यवस्था का पूरा बोझ संविदा लाइनमैन उठा रहे हैं, क्या उन्हें सिर्फ अस्थायी कर्मचारी मानकर हमेशा टाला जा सकता है? बारिश के मौसम में यह टकराव जितना लंबा चलेगा, उतना ही बिजली व्यवस्था और सरकार दोनों की परीक्षा होगी।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में लाइनमैन हड़ताल क्यों कर रहे हैं?
संविदा लाइनमैन अपनी मुख्य मांग नियमितीकरण को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। उनका कहना है कि वर्षों से जोखिम भरा काम करने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। - छत्तीसगढ़ में कितने संविदा लाइनमैन हड़ताल पर हैं?
प्रदेश में करीब 2471 संविदा लाइनमैन हड़ताल पर हैं, जिससे बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
ये खबरें भी पढ़ें...
सामूहिक हड़ताल पर गए तो छुट्टी तय, बिजली कर्मचारियों के लिए फरमान
क्या चुनाव ड्यूटी से बिजली कर्मचारियों को मिलेगी राहत? आईएएस आरती डोगरा ने लिखा पत्र
बिजली कर्मचारी 25 लाख तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा का उठा सकेंगे लाभ