11 दिन से अनशन पर बैठे हैं डीएड अभ्यर्थी, नियुक्ति न देने पर नाराजगी

छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 को लेकर डीएड वाले अभ्यर्थियों का आंदोलन बढ़ता जा रहा है। कोर्ट के आदेश का पालन और खाली पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थी 24 दिसंबर 2025 से रायपुर के तूता धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं।

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Arun Tiwari
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Raipur. छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 को लेकर डीएड (डिप्लोमा इन एजुकेशन) योग्यता वाले अभ्यर्थियों का आंदोलन बढ़ता जा रहा है। कोर्ट के आदेश का पालन और खाली पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थी 24 दिसंबर 2025 से रायपुर के तूता धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं।

अनशन के 11वें दिन 100 से अधिक अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ने की सूचना है, जिनमें से कई को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। धरना स्थल पर मौजूद अभ्यर्थियों का कहना है कि भूख हड़ताल के चलते कमजोरी, चक्कर और बेहोशी की घटनाएं बढ़ रही हैं, जबकि समय पर एम्बुलेंस और चिकित्सा सुविधा न मिलने की भी शिकायतें सामने आई हैं आंदोलनकारियों ने आशंका जताई है कि यदि स्थिति पर शीघ्र नियंत्रण नहीं किया गया तो किसी भी समय जानलेवा हालात बन सकते हैं।

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आदिवासी युवाओं पर  असर :

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे शैलेंद्र साहू ने बताया कि सहायक शिक्षक भर्ती में करीब 2300 पद अब भी रिक्त हैं, जिनमें से 1600 से अधिक पद अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित या शेष हैं।

इन पदों पर लंबे समय से नियुक्ति नहीं होने के कारण आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है और हजारों योग्य युवा बेरोजगार हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि राज्य सरकार उच्च न्यायालय, बिलासपुर के 2 अप्रैल 2024 और 26 सितंबर 2025 तथा सुप्रीम कोर्ट के 28 अगस्त 2024 के स्पष्ट आदेशों का पालन नहीं कर रही है।

इन आदेशों में प्राथमिक स्तर पर बीएड को अयोग्य ठहराते हुए डीएड अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए थे, बावजूद इसके भर्ती प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।

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विधानसभा में उठा था मुद्दा : 

अभ्यर्थियों ने बताया कि 17 दिसंबर 2025 को विधानसभा सत्र के दौरान भर्ती पूर्ण होने की समय-सीमा को लेकर सवाल उठाया था। इसके जवाब में शिक्षा मंत्री द्वारा कोई निश्चित समय-सीमा न बताए जाने से अभ्यर्थियों में गहरा आक्रोश फैल गया और आंदोलन और तेज हो गया।

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सरकार को चेतावनी :

डीएड अभ्यर्थियों का  कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक और शांतिपूर्ण है। उनका एकमात्र उद्देश्य न्यायालयीन आदेशों का पालन कराते हुए शेष 2300 पदों, विशेषकर आदिवासी वर्ग के लंबित पदों पर शीघ्र नियुक्ति सुनिश्चित कराना है।

आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अनशन के दौरान कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और प्रशासन की होगी।

 सरकार की चुप्पी:

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन सहित कई शिक्षक संगठनों ने भी शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप कर अनशन समाप्त कराने और भर्ती प्रक्रिया तत्काल शुरू करने की मांग की है। हालांकि, अब तक सरकार की ओर से कोई उच्चस्तरीय प्रतिनिधि धरना स्थल पर नहीं पहुंचा है, जिससे आंदोलन के और उग्र होने की आशंका जताई जा रही है।

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