परीक्षा में राम के नाम पर पूछा ऐसा सवाल, जिससे मच गया बवाल, डीईओ सस्पेंड
छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग के एक गंभीर मामले में अब बड़ा एक्शन हुआ है। चौथी कक्षा के अर्धवार्षिक परीक्षा के प्रश्न पत्र में एक सवाल पूछा गया था- "कुत्ते का नाम शेरू या राम?" इस सवाल को लेकर धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और विवाद खड़ा हो गया। सरकार ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए महासमुंद के जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे को निलंबित कर दिया है।
क्या है मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब परीक्षा के प्रश्न पत्र में कुत्ते के नाम के विकल्प के रूप में 'राम' का नाम शामिल किया गया, जो कि हिन्दू धर्म के आराध्य भगवान राम का नाम है। इसे एक आपत्तिजनक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम माना गया, जिससे प्रशासन और शिक्षा विभाग की छवि पर नकारात्मक असर पड़ा।
इस सवाल के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने जांच शुरू की और पाया कि यह ग़लत सवाल प्रश्न पत्र में शामिल किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि विजय कुमार लहरे, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद, ने प्रश्न पत्र तैयार करने और वितरण के लिए कोई उचित कार्य योजना नहीं बनाई थी और इसमें गंभीर लापरवाही बरती गई थी।
निलंबन के आदेश
जारी किए गए आदेश में यह स्पष्ट किया गया कि विजय कुमार लहरे ने अपनी जिम्मेदारियों का ठीक से पालन नहीं किया और न ही मामले की गंभीरता को समझा। उन्होंने न केवल विभागीय आदेशों की अवहेलना की, बल्कि उच्च न्यायालय में अपील दायर करने में भी नाकाम रहे। इसके अलावा, उनके कार्यकाल में विभागीय लेखा की अंकेक्षण में भी गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 5/3 का उल्लंघन करते हुए लहरे द्वारा की गई लापरवाही को गंभीर कदाचार माना गया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।
आगे की कार्रवाई:
विजय कुमार लहरे के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रहेगी। विभाग ने यह भी कहा है कि इस तरह के मामलों में सख्त कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में किसी भी परीक्षा प्रश्न पत्र में ऐसी गलती न हो।
पारिवारिक और धार्मिक भावनाओं के संदर्भ में:
यह घटना पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गई है, और खासकर धार्मिक भावनाओं के संदर्भ में लोगों की प्रतिक्रियाएं तेजी से आ रही हैं। इस मुद्दे ने यह भी साबित किया कि शिक्षा विभाग को परीक्षा सामग्री तैयार करते वक्त अधिक संवेदनशील और विचारशील होने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
विजय कुमार लहरे का निलंबन शिक्षा विभाग की ओर से उठाया गया बड़ा कदम है। यह न केवल अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है, बल्कि राज्य सरकार के लिए भी एक अवसर है कि वह अपने शैक्षिक मानकों और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार करें, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
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