चौथी की परीक्षा में सवाल, मोना के कुत्ते का नाम क्या? विकल्प में राम... डीईओ को नोटिस

VINAY VERMA | Jan 08, 2026, 21:26 IST
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Question in the fourth exam what is the name of Monas dog Ram in option notice to DEO
Photograph: (the sootr)

छत्तीसगढ़ की चौथी कक्षा की अर्धवार्षिक परीक्षा में 'राम' शब्द को कुत्ते के नाम के विकल्प के रूप में पूछा गया, जिससे विवाद खड़ा हो गया। डीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी।

RAIPUR. कक्षा चौथी की अर्धवार्षिक परीक्षा के एक प्रश्न ने छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अंग्रेजी विषय के प्रश्नपत्र में पूछे गए एक सवाल में कुत्ते के नाम के विकल्प के रूप में ‘राम’ शब्द शामिल किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने महासमुंद के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में पूछा गया है कि क्यों न डीईओ विजय कुमार लहरे के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए?

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क्या है पूरा मामला?

दरअसल, लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, महासमुंद जिले में कक्षा चौथी के अंग्रेजी विषय की अर्धवार्षिक परीक्षा में एक प्रश्न पूछा गया कि “मोना के कुत्ते का नाम क्या है?”

इसके विकल्पों में ‘शेरू’ के साथ ‘राम’ नाम भी शामिल था। प्रश्नपत्र में हिंदू धर्म के आराध्य देव भगवान राम के नाम को जानवर के नाम के विकल्प के रूप में शामिल करना आपत्तिजनक माना। विभाग ने इसे निंदनीय और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना है।

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DEO पर गंभीर लापरवाही का आरोप

इस मामले में विभाग ने कहा कि कक्षा चौथी के प्रश्नपत्र का निर्धारण और मुद्रण की जिम्मेदारी पूरी तरह से डीईओ की थी। बावजूद इसके, परीक्षा के प्रश्नपत्र में यह लापरवाही बरती गई। विभाग ने यह भी आरोप लगाया कि इस गलती के कारण सरकार और विभाग की छवि पर बुरा असर पड़ा है।

संचालनालय ने यह भी कहा है कि इस गलती के कारण शासन और विभाग की छवि धूमिल हुई है। यह कृत्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की श्रेणी में आता है।

आचरण नियमों के उल्लंघन का हवाला

कारण बताओ नोटिस में डीईओ के इस कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम-3 के विपरीत बताया गया है। विभाग के अनुसार, यह आचरण एक जिम्मेदार शासकीय अधिकारी से अपेक्षित मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया की आशंका

मामले के सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया भी सामने आ सकती है। धार्मिक आस्थाओं से जुड़ा मामला होने के कारण विभाग अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। सूत्रों के अनुसार, यदि डीईओ का जवाब संतोषजनक नहीं रहा तो कड़ी विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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पहले भी आ चुके हैं ऐसे मामले

यह पहला मामला नहीं है जब परीक्षा प्रश्नों को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो। इससे पहले भी प्रदेश में पाठ्यपुस्तकों और प्रश्नपत्रों की भाषा या उदाहरणों को लेकर आपत्तियां सामने आती रही हैं। लेकिन इस बार मामला सीधे धार्मिक भावनाओं से जुड़ने के कारण और अधिक संवेदनशील बन गया है।

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