श्मशान घाट में अवैध रेत खनन, 10 शवों के कंकाल बाहर आने से भारी आक्रोश
NEWS IN SHORT
- खरेंगा श्मशान घाट में 10 कंकाल बाहर, ग्रामीण आक्रोशित
- अवैध रेत खनन से श्मशान घाट में तबाही, प्रशासन ने कार्रवाई की
- गांव के बुजुर्गों की कब्रें खोदी गईं, पहचान अब नहीं
- रेत माफियाओं ने गांव के युवाओं को मजदूरी पर लगाया
- कलेक्टर ने 5 ट्रैक्टर जब्त किए और माइनिंग इंस्पेक्टर को नोटिस
NEWS IN DETAIL
Damtari: खरेंगा गांव के श्मशान घाट में अवैध रेत खनन के कारण 10 मानव कंकाल बाहर आ गए। प्रशासन ने कंकालों को दोबारा दफन किया, लेकिन ग्रामीणों को अब यह नहीं पता कि उनके अपनों की कब्रें कहां हैं। इस घटना ने पूरे गांव में चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है।
अवैध रेत खनन का खुलासा
गांव के उपसरपंच डिसेन्द्र साहू ने बताया कि श्मशान घाट में गहरी खुदाई के निशान मिले। रेत माफियाओं ने रात के समय 6-7 फीट गहरी कब्रें खोदीं। गुरुवार, 28 मई को ग्रामीणों ने देखा कि श्मशान घाट से हड्डियां बाहर निकल रही हैं। स्थानीय लोगों ने तुरंत प्रशासन को सूचना दी। प्रशासन ने कंकालों को दोबारा दफन किया, लेकिन अब किसी को यह नहीं पता कि किसका कंकाल कहां है।
युवाओं का गलत इस्तेमाल
ग्राम व्यवस्था समिति के सचिव तामेश्वर साहू ने आरोप लगाया कि अवैध खनन करने वाले लोग गांव के 17-18 साल के लड़कों को मजदूरी और ट्रैक्टर चलाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। कई लड़कों के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं होता। सामने अपने ही गांव का लड़का दिखाई देता है, इसलिए लोग विरोध नहीं करना चाहते। असली माफिया पीछे रहते हैं। इस वजह से ग्रामीणों के लिए विरोध करना मुश्किल हो जाता है।
शिकायतों के बावजूद रोक नहीं
सरपंच नीलम साहू ने बताया कि पंचायत और ग्राम विकास समिति कई बार बैठक कर चुकी है। श्मशान घाट में रेत खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके लिए मुनादी भी कराई गई। सूचना देने वाले को 2,000 रुपए इनाम देने की घोषणा भी हुई। इसके बावजूद खनन जारी रहा। ग्रामीणों ने बताया कि 10 कंकाल मिलने के बाद भी उसी रात रेत की खुदाई फिर से शुरू कर दी गई। गाड़ियां अलग रास्तों से रेत ले जा रही थीं।
प्रशासन की कार्रवाई
धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने कहा कि मामले में 5 ट्रैक्टर जब्त किए गए हैं। संबंधित क्षेत्र के माइनिंग इंस्पेक्टर को कारण बताओ नोटिस (शोकॉज) जारी किया गया है। कलेक्टर ने बताया कि जिस जगह रेत भंडारण की अनुमति दी गई थी, उसे भी निरस्त कर दिया गया है।
एनजीटी के आदेश के मुताबिक 15 जून तक सभी रेत खदानों को बंद किया जाना है। जिन क्षेत्रों में खनन की अनुमति है, वहां दोबारा सीमांकन कराया जाएगा। गैर-कानूनी रूप से रेत निकालने और उसे गाड़ियों से भेजने वालों पर कड़ा एक्शन लिया जाएगा।
गांव में सबसे बड़ा दर्द
ग्रामीणों का सबसे बड़ा दुख यह है कि अब उन्हें अपने माता-पिता, दादा-दादी और रिश्तेदारों की कब्रों की पहचान नहीं है। महानदी किनारे खड़े एक ग्रामीण ने कहा-रेत तो फिर आ जाएगी, लेकिन जिन लोगों की याद में हम यहां आते थे, उनकी जगह अब हम कैसे पहचानेंगे? भीड़ में मौजूद देवला बाई साहू कहती हैं कि उन्हें अब मौत से ज्यादा डर है। उनकी आंखों में गुस्सा और दुख दोनों था। जिस दुख को हम सालों पहले भूलने की कोशिश कर चुके थे, वह फिर से सामने आ गया है।
व्यक्तिगत पहचान का नुकसान
लोकेश्वरी साहू ने बताया कि उनकी सास का निधन 23 मार्च को हुआ था। रेत खनन के दौरान उन्होंने अपने सास के कंकाल को देखा और पीली साड़ी से पहचान की। प्रशासन ने कंकाल को दोबारा दफन कर दिया, लेकिन अब उन्हें यह नहीं पता कि उनकी सास कहां दफन हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना सिर्फ कंकाल की नहीं है, बल्कि उनकी यादों और परंपरा की हानि है।
भविष्य के लिए चेतावनी
ग्रामीण प्रशासन और अधिकारियों से आग्रह कर रहे हैं कि अवैध रेत खनन पर रोक लगाई जाए और श्मशान घाट की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अगर ऐसा नहीं रुका तो भविष्य में किसी और की कब्र खोदी जा सकती है-एक वरिष्ठ ग्रामीण ने चेतावनी दी। ग्रामीणों का कहना है कि अब सिर्फ रेत माफिया ही नहीं, बल्कि प्रशासन और पंचायत को भी सख्त कदम उठाने होंगे।
निष्कर्ष
खरेंगा गांव की यह घटना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में अवैध रेत खनन की गंभीर समस्या को उजागर करती है। श्मशान घाट और स्थानीय परंपरा की सुरक्षा के बिना, ग्रामीणों की भावनाओं और सम्मान की अनदेखी हो रही है। प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम सही दिशा में हैं, लेकिन गांववालों का विश्वास अब पहले जैसा नहीं रहा।
FAQ
- खरेंगा गांव में क्या हुआ?
श्मशान घाट में अवैध रेत खनन के दौरान 10 मानव कंकाल बाहर निकल आए। - प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
कंकालों को दोबारा दफन किया गया और 5 ट्रैक्टर जब्त किए गए। - क्या ग्रामीण सुरक्षित हैं?
ग्रामीण डर जताते हैं कि भविष्य में कब्रें भी खोदी जा सकती हैं। - रेत माफिया कैसे काम कर रहे हैं?
गांव के युवाओं को मजदूरी और ट्रैक्टर चलाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। - कब तक खदानें बंद रहेंगी?
एनजीटी के आदेश के अनुसार 15 जून तक सभी रेत खदानों को बंद करना अनिवार्य है।
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