छत्तीसगढ़ में डिजिटल न्याय की नई पहल, मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने दिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी के निर्देश

Krishna Kumar Sikander | Jul 09, 2025, 16:48 IST
New initiative of digital justice in Chhattisgarh the sootr
छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी कर अभियुक्तों और साक्षियों की अदालती पेशी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे आधुनिक ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुगम, सुरक्षित और समयबद्ध बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी कर अभियुक्तों और साक्षियों की अदालती पेशी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे आधुनिक ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। इस पहल का उद्देश्य न केवल न्यायिक प्रक्रिया को तेज करना है, बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग, सुरक्षा जोखिमों में कमी और अनावश्यक खर्चों को कम करना भी है।



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न्यायालयों में लंबित मामलों के निपटारे की दिशा में क्रांतिकारी कदम

मुख्य सचिव ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि वर्तमान में अभियुक्तों और साक्षियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश करने की प्रक्रिया कई चुनौतियों को जन्म देती है। जेल से अभियुक्तों को अदालत तक लाने-ले जाने में समय, मानव संसाधन और आर्थिक खर्च के साथ-साथ सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बढ़ते हैं।



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इसके अलावा, चिकित्सकों, बैंक कर्मचारियों और अन्य लोक सेवकों की व्यक्तिगत उपस्थिति उनके नियमित कार्यों में बाधा उत्पन्न करती है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। साथ ही, शासन को यात्रा भत्ते और अन्य व्यय का अतिरिक्त बोझ वहन करना पड़ता है। इन समस्याओं के समाधान के लिए मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को अपनाने पर बल दिया है। यह व्यवस्था न केवल समय और संसाधनों की बचत करेगी, बल्कि प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित भी बनाएगी।



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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के प्रावधानों का पालन

मुख्य सचिव ने अपने निर्देश में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 का हवाला देते हुए कहा कि इस कानून में अभियुक्तों और साक्षियों की पेशी को इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से संपन्न करने की व्यवस्था को प्रोत्साहित किया गया है। इस प्रावधान का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को इस दिशा में ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।



उन्होंने सुझाव दिया कि जिला एवं सत्र न्यायालयों की मॉनिटरिंग समिति की बैठकों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के उपयोग को एक प्रमुख एजेंडा बिंदु के रूप में शामिल किया जाए। इसके साथ ही, इस प्रणाली के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है।



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डिजिटल तकनीक से कैसे आएगी न्यायिक प्रक्रिया में तेजी

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के उपयोग से न केवल अदालती प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि यह जेल प्रशासन, पुलिस और अन्य सरकारी विभागों के लिए भी राहतकारी साबित होगा। अभियुक्तों को जेल से अदालत तक लाने-ले जाने की प्रक्रिया में लगने वाला समय और संसाधन बचेगा, जिसे अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में उपयोग किया जा सकेगा।



साथ ही, साक्षियों, खासकर सरकारी कर्मचारियों, को बार-बार कोर्ट में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे उनके कार्यालयीन दायित्वों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।



प्रदेश में डिजिटल न्यायिक ढांचे की ओर कदम

मुख्य सचिव का यह निर्देश छत्तीसगढ़ में डिजिटल तकनीक को न्यायिक प्रक्रिया का अभिन्न अंग बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाएगा, बल्कि न्याय प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जन-उन्मुखी बनाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन को तकनीकी संसाधनों, जैसे हाई-स्पीड इंटरनेट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग उपकरण और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी।



कैसे होगी समय और संसाधनों की बचत

मुख्य सचिव अमिताभ जैन का यह निर्देश छत्तीसगढ़ की न्यायिक प्रक्रिया में एक नया अध्याय जोड़ने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के उपयोग से न केवल समय और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि यह न्यायिक प्रणाली को और अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाएगा। इस पहल से प्रदेश में लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और साथ ही नागरिकों को एक सुगम और सुरक्षित न्यायिक अनुभव प्राप्त होगा।



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