छत्तीसगढ़ डीएमएफ ऑडिट : आधी-अधूरी योजनाओं पर खर्च हुए करोड़ों रुपए

VINAY VERMA | Jul 15, 2026, 11:11 IST
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DMF-CAG रिपोर्ट - अनियमितताएँ
DMF-CAG रिपोर्ट - अनियमितताएँ

छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश कैग रिपोर्ट के मुताबिक, जिला खनिज न्यास निधि (DMF) से 4,536 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी 44 फीसदी खनन प्रभावित गांव आज भी विकास से पूरी तरह वंचित हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • 4 हजार 536 करोड़ खर्च, फिर भी 754 गांव विकास से दूर।
  • बिना बजट और योजना के DMF फंड खर्च हुआ।
  • 1 हजार 060 करोड़ के काम, प्रभावित गांव तय होने से पहले मंजूर।
  • 41 करोड़ 80 लाख की परियोजनाएं बेअसर साबित हुईं।
  • 30 करोड़ 73 लाख सरकारी दफ्तरों पर खर्च, नियमों पर सवाल।

खनन फंड में बड़ी गड़बड़ी

छत्तीसगढ़ में खनन प्रभावित इलाकों के विकास के लिए बनाया गया जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) अब सवालों के घेरे में है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) के क्रियान्वयन की कई परतें खोल दी हैं। रिपोर्ट विधानसभा में पेश हुई। निष्कर्ष साफ है। पैसा खूब खर्च हुआ। लेकिन उसका फायदा उन लोगों तक नहीं पहुंचा, जिनके नाम पर यह योजना बनी थी। योजना, खर्च, खरीद और निगरानी... हर स्तर पर खामियां मिलीं।

बिना प्लान... शुरू हो गया खर्च

CAG ने पाया कि कई जिलों में सालाना बजट और वार्षिक कार्ययोजना बनाए बिना ही DMF का पैसा खर्च कर दिया गया। यानी पहले पैसा निकला, बाद में योजना ढूंढी गई। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार के निर्देशों के उलट 1.68 करोड़ रुपए राज्य स्तरीय DMF प्रकोष्ठ को भेज दिए गए। मार्च 2024 तक 10.82 करोड़ रुपए वहीं पड़े रहे। सवाल यही है कि जब पैसा लोगों के विकास के लिए था, तो वह फाइलों में क्यों अटका रहा?

81% पैसा खर्च, फिर भी आधे गांव खाली हाथ

रिपोर्ट बताती है कि न्यासों ने उपलब्ध राशि में से 4,536.58 करोड़ रुपए यानी 81 फीसदी खर्च कर दिए। लेकिन इसका असर जमीन पर नहीं दिखा। जांच में शामिल 11 जिलों के 1,734 खनन प्रभावित गांवों में से 754 गांवों तक कोई विकास कार्य ही नहीं पहुंचा। यानी हर दो में से एक गांव आज भी इंतजार कर रहा है। सबसे बड़ी कमी यह रही कि दीर्घकालिक विकास के लिए न मास्टर प्लान बना, न विजन डॉक्यूमेंट और न ही सही वार्षिक योजना।

Chhattisgarh DMF Scam
Chhattisgarh DMF Scam


पहले मंजूरी, बाद में प्रभावित गांव तलाशे गए

CAG की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई जिलों में खनन प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने में पांच महीने से लेकर 65 महीने तक की देरी हुई। लेकिन इससे पहले ही 1,060.70 करोड़ रुपए के काम मंजूर कर दिए गए। यानी जिन गांवों के लिए पैसा खर्च होना था, उनकी पहचान तक तय नहीं थी। इतना ही नहीं, प्रभावित गांवों की सूची भी नियम के मुताबिक अधिसूचना जारी कर नहीं बनाई गई। सिर्फ कार्यालयीन आदेश से काम चला दिया गया।

41 करोड़ खर्च... लेकिन काम किसी काम का नहीं

कमजोर प्लानिंग और निगरानी का नतीजा यह हुआ कि 41.80 करोड़ रुपए का खर्च बेअसर साबित हुआ। कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं। कई परिसंपत्तियां बन गईं, लेकिन कभी इस्तेमाल ही नहीं हुईं। कहीं कला एवं संस्कृति केंद्र बंद पड़े हैं। कहीं बायोगैस प्लांट धूल खा रहे हैं। पोल्ट्री यूनिट और मशरूम सेंटर भी कागजों तक सीमित रह गए। यानी पैसा खर्च हुआ, लेकिन फायदा नहीं मिला।

सरकारी दफ्तर चमके, प्रभावित गांव नहीं

रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। DMF का 30.73 करोड़ रुपए सरकारी दफ्तरों की मरम्मत, भवन निर्माण, सौंदर्यीकरण और सामान खरीदने में खर्च कर दिया गया। जबकि ये काम योजना की प्राथमिकता में आते ही नहीं हैं। दूसरी ओर 17.49 करोड़ रुपए की खरीद बिना खुली निविदा के कर ली गई। 38.82 करोड़ रुपए की खरीद में तकनीकी मानक तक तय नहीं किए गए। यानी खरीद प्रक्रिया में भी नियमों की अनदेखी हुई।

बैठकें नहीं हुईं, वेबसाइट भी खाली मिली

CAG ने निगरानी व्यवस्था को भी कमजोर बताया। राज्य स्तरीय समितियों की बैठकें समय पर नहीं हुईं। 12 जिलों की वेबसाइटों की जांच में पाया गया कि वहां जरूरी जानकारी तक अपडेट नहीं थी। किस गांव में कितना पैसा आया, कौन सा काम मंजूर हुआ, कितना पूरा हुआ... इसकी जानकारी जनता से छिपी रही। कई जिलों में अधिकारी भी नहीं थे। बेमेतरा और महासमुंद में सभी स्वीकृत पद खाली मिले। बालोद, बिलासपुर, रायगढ़ और राजनांदगांव में आधे से ज्यादा प्रमुख पद रिक्त थे। CAG ने साफ कहा है कि अगर व्यवस्था नहीं सुधरी, तो खनिज का पैसा खनन प्रभावित लोगों तक नहीं, सिर्फ फाइलों तक सीमित रह जाएगा।

FAQ

  1. छत्तीसगढ़ में जिला खनिज न्यास निधि (DMF) का गठन कब और किस अधिनियम के तहत किया गया?
    उत्तर: छत्तीसगढ़ में डीएमएफ (DMF) का गठन 'खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2015' (MMDR Act) के तहत किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य खनन से प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के हितों की रक्षा करना और उनका विकास करना है।
  2. प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) क्या है और इसे कब शुरू किया गया था?
    उत्तर: केंद्र सरकार ने देश के खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों के कल्याण के लिए 17 सितंबर 2015 को पीएमकेकेकेवाई (PMKKKY) योजना शुरू की थी। इस योजना को जिला खनिज न्यास (DMF) में जमा होने वाली राशि से ही लागू किया जाता है।
  3. जिला खनिज न्यास (DMF) निधि में पैसा कहाँ से आता है और इस पर किसका नियंत्रण होता है?
    उत्तर: राज्य में खनन (Mining) करने वाली कंपनियां और पट्टाधारक सरकार को दी जाने वाली रॉयल्टी का एक निश्चित हिस्सा (लगभग 10% से 30%) इस फंड में जमा करते हैं। यह एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट होता है, जो जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति की देखरेख में काम करता है।

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