छत्तीसगढ़ में DMF फंड की स्वीकृतियों पर बड़ा एक्शन: 17.46 करोड़ के 160 विकास कार्य रद्द, 8.32 करोड़ की वसूली के आदेश

Umeshwari Baghel | Nov 02, 2026, 22:55 IST
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<br>DMF फंड में अनियमितता, 160 विकास कार्य रद्द, 8.32 करोड़ की वसूली के आदेश
DMF फंड में अनियमितता, 160 विकास कार्य रद्द, 8.32 करोड़ की वसूली के आदेश

छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) फंड से स्वीकृत विकास कार्यों में नियमों की अनदेखी का बड़ा मामला सामने आया है। जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 में स्वीकृत 160 विकास कार्यों को एक साथ निरस्त कर दिया है। इन कार्यों की कुल लागत करीब 17 करोड़ 46 लाख रुपये थी।

वहीं, कार्यदायी एजेंसियों को पहली किश्त के रूप में जारी 8 करोड़ 32 लाख रुपये से अधिक की राशि सरकारी खाते में वापस जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में DMF फंड से स्वीकृत 160 विकास कार्य निरस्त किए गए हैं।
  • बिना प्रबंधकारिणी समिति और शासी परिषद की मंजूरी के स्वीकृतियां जारी होने का आरोप है।
  • कुल स्वीकृत लागत करीब 17.46 करोड़ रुपये बताई गई है।
  • 8.32 करोड़ रुपये से अधिक की पहली किश्त वापस जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
  • जिला प्रबंधकारिणी समिति की 26 अक्टूबर 2026 की बैठक में निरस्तीकरण का फैसला हुआ।

तत्कालीन कलेक्टर के कार्यकाल में मिली थीं स्वीकृतियां

यह पूरा मामला तत्कालीन कलेक्टर लीना मंडावी के कार्यकाल में DMF मद से स्वीकृत विकास कार्यों से जुड़ा है। सामने आई जानकारी के अनुसार, विकास कार्यों को मंजूरी देने से पहले निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।

नियमानुसार, DMF फंड से किसी भी विकास कार्य को स्वीकृति देने से पहले प्रस्ताव को प्रबंधकारिणी समिति के समक्ष रखा जाना और शासी परिषद से अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक है। लेकिन इन 160 कार्यों के मामले में दोनों स्तरों पर आवश्यक मंजूरी लिए बिना ही प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी गई। इतना ही नहीं, संबंधित एजेंसियों को पहली किश्त का भुगतान भी कर दिया गया।


17.46 करोड़ की स्वीकृति, 8.32 करोड़ पहले ही जारी

प्रशासनिक दस्तावेजों के अनुसार, निरस्त किए गए सभी 160 विकास कार्यों की कुल स्वीकृत लागत 17 करोड़ 46 लाख 92 हजार 166 रुपये थी। इनमें से 8 करोड़ 32 लाख 48 हजार 70 रुपये कार्यदायी एजेंसियों को अग्रिम किश्त के रूप में जारी किए जा चुके थे। अब इन सभी कार्यों की स्वीकृति निरस्त होने के बाद प्रशासन ने संबंधित एजेंसियों को जारी की गई पूरी राशि लौटाने के निर्देश दिए हैं।

वर्तमान कलेक्टर ने शासन तक पहुंचाया मामला

वर्तमान कलेक्टर विजय दयाराम के. ने DMF फंड से जारी इन स्वीकृतियों में प्रक्रियागत अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण से अवगत कराया था।


इसके बाद जिला प्रशासन ने संबंधित कार्यदायी एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। इनमें जनपद पंचायत गौरेला, पेण्ड्रा और मरवाही, नगर पंचायत मरवाही, विद्युत यांत्रिकी संभाग बिलासपुर, क्रेडा, पशु चिकित्सा सेवाएं और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय शामिल थे।

एजेंसियों के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ प्रशासन

नोटिस के जवाब में संबंधित एजेंसियों ने विकास कार्यों की आवश्यकता बताते हुए कहा कि DMF कार्यालय से प्रस्ताव मांगे जाने के बाद कार्यों की स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी।

हालांकि, एजेंसियां इस बात का संतोषजनक प्रशासनिक आधार प्रस्तुत नहीं कर सकीं कि प्रबंधकारिणी समिति और शासी परिषद की आवश्यक मंजूरी के बिना कार्यों को स्वीकृति कैसे दी गई और राशि किस आधार पर जारी की गई।


26 अक्टूबर की बैठक में लिया गया बड़ा फैसला

शासन स्तर से मिले निर्देशों के बाद 26 अक्टूबर 2026 को जिला प्रबंधकारिणी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी 160 विकास कार्यों की स्वीकृतियों, संबंधित दस्तावेजों और एजेंसियों से प्राप्त जवाबों की समीक्षा की गई।

विस्तृत विचार-विमर्श के बाद नियमों के अनुरूप स्वीकृति नहीं होने के आधार पर सभी कार्यों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने निरस्तीकरण आदेश जारी करते हुए संबंधित एजेंसियों से पहली किश्त की पूरी राशि वापस जमा कराने को कहा।

खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए होता है DMF फंड

जिला खनिज संस्थान न्यास का मुख्य उद्देश्य खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस फंड से पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, महिला एवं बाल कल्याण तथा कौशल विकास जैसे कार्य कराए जाते हैं।

DMF से संबंधित दिशा-निर्देशों के तहत कम से कम 60 प्रतिशत राशि उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में और शेष 40 प्रतिशत राशि अन्य प्राथमिकता वाले विकास कार्यों में खर्च करने का प्रावधान है।


ऐसे में निर्धारित समितियों की मंजूरी के बिना करोड़ों रुपये के कार्य स्वीकृत किए जाने का मामला प्रशासनिक जवाबदेही और वित्तीय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अब राशि की वापसी और जवाबदेही पर नजर

जिला प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद संबंधित कार्यदायी एजेंसियों के सामने 8 करोड़ 32 लाख 48 हजार 70 रुपये सरकारी खाते में वापस जमा कराने की जिम्मेदारी है।

हालांकि, इस पूरे मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि स्वीकृति प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अलग से कोई विभागीय कार्रवाई की जाएगी या नहीं।

फिलहाल, एक साथ 160 विकास कार्यों को निरस्त करने के फैसले ने जिले में DMF फंड के इस्तेमाल और प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जारी की गई करोड़ों रुपये की राशि कितनी जल्दी वापस जमा होती है और पूरे प्रकरण में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

यह खबर क्यों जरूरी है

DMF फंड खनन से प्रभावित इलाकों के विकास के लिए होता है। इसमें नियमों की अनदेखी से करोड़ों रुपये की स्वीकृतियां सवालों में आ जाती हैं। 160 कार्यों का एक साथ निरस्त होना और वसूली के आदेश इस फंड की निगरानी व्यवस्था की अहमियत बताते हैं। इस मामले से जिले में DMF फंड के इस्तेमाल और प्रशासनिक जवाबदेही पर चर्चा बढ़ने की उम्मीद है।

FAQ

सवाल 1: DMF फंड क्या होता है?

जवाब: जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) खनन गतिविधियों से प्रभावित इलाकों के लिए बनाया गया फंड है। इससे पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और कौशल विकास जैसे कार्य कराए जाते हैं।

सवाल 2: गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में कितने विकास कार्य निरस्त हुए?

जवाब: जिला प्रशासन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में स्वीकृत 160 विकास कार्य निरस्त किए हैं। इनकी कुल स्वीकृत लागत करीब 17 करोड़ 46 लाख रुपये बताई गई है।

सवाल 3: कार्यदायी एजेंसियों से कितनी राशि वापस मांगी गई है?

जवाब: जिला प्रशासन ने एजेंसियों को पहली किश्त के रूप में जारी 8 करोड़ 32 लाख रुपये से अधिक की राशि सरकारी खाते में वापस जमा करने के निर्देश दिए हैं।
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