धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर भड़के भूपेश बघेल, बोले- केमिकल लोचा है, रेबीज की जांच होनी चाहिए
Umeshwari Baghel | Nov 02, 2026, 21:42 IST
राम-कृष्ण की तुलना पर धीरेंद्र शास्त्री के बयान से विवाद, भूपेश बघेल ने साधा निशाना।
रायपुर। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के एक बयान ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की तुलना को लेकर शुरू हुआ विवाद अब छत्तीसगढ़ की राजनीति तक पहुंच गया है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने शास्त्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उनकी आलोचना की है।
वहीं, मथुरा के साधु-संतों ने भी इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई है। भूपेश बघेल का तीखा हमला, धार्मिक भावनाओं को लेकर उठाए सवाल
बघेल ने आरोप लगाया कि हिंदू समाज और सनातन धर्म की बात करने वाले कथावाचक अब हिंदुओं के आराध्य देवी-देवताओं का उपहास कर रहे हैं। उन्होंने शास्त्री को ढोंगी बाबा' बताते हुए सवाल उठाया कि धार्मिक भावनाओं की रक्षा का दावा करने वाले लोग इस मामले में चुप क्यों हैं।
उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद मामला केवल धार्मिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जुड़ गए हैं।
विवाद की शुरुआत मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान हुई। कथा सुनाते समय पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की शारीरिक मुद्राओं का उल्लेख करते हुए दोनों की तुलना की।
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा का जिक्र किया, जिसमें शरीर तीन स्थानों से मुड़ा हुआ दिखाई देता है। इसके विपरीत उन्होंने भगवान श्रीराम की सीधी खड़ी मुद्रा का उदाहरण दिया।
इसी दौरान शास्त्री ने अयोध्या और वृंदावन को लेकर भी कुछ टिप्पणियां कीं। कथा का वीडियो सामने आने के बाद उनकी बातों पर आपत्ति जताई जाने लगी। आलोचकों का कहना था कि भगवान के अलग-अलग स्वरूपों का वर्णन करते समय ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, जिससे किसी भी भक्त की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचे।
धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी को लेकर ब्रज क्षेत्र के साधु-संतों में भी नाराजगी सामने आई। मथुरा के कुछ संतों ने उनके बयान को अनुचित बताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
संतों की आपत्ति मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप को लेकर की गई टिप्पणी पर थी। उनका कहना था कि श्रीराम और श्रीकृष्ण दोनों ही सनातन परंपरा में पूजनीय हैं और उनके स्वरूपों को लेकर ऐसी तुलना नहीं की जानी चाहिए, जिसका गलत संदेश जाए। इस विरोध के बाद धीरेंद्र शास्त्री का बयान चर्चा का विषय बन गया और उनसे स्पष्टीकरण की मांग तेज हो गई।
लगातार बढ़ रही आलोचनाओं के बीच पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वीडियो संदेश जारी कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के बीच किसी प्रकार का अंतर बताना या किसी की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाना नहीं था।
शास्त्री ने कहा कि वे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण और ब्रजभूमि के भक्त हैं। वे श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करते हैं और भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान भी करते हैं।उन्होंने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण एक ही परमात्मा के स्वरूप हैं। दोनों के बीच भेद करने का उनका कोई इरादा नहीं था।
शास्त्री ने यह भी कहा कि यदि उनके शब्दों या उनकी व्याख्या से किसी श्रद्धालु की भावना आहत हुई है, तो वे इसके लिए क्षमा मांगते हैं। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि उनके कथन को गलत संदर्भ में प्रस्तुत न किया जाए।
यह पहला मौका नहीं है जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बीच वैचारिक टकराव सामने आया हो। वर्ष 2025 में भी दोनों के बीच सार्वजनिक बयानबाजी हुई थी।
उस समय भूपेश बघेल ने शास्त्री पर अंधविश्वास को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। इस पर शास्त्री ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यदि हिंदू समाज को एकजुट करने के प्रयास को अंधविश्वास कहा जाता है, तो ऐसी सोच रखने वालों को देश छोड़ देना चाहिए।
इसके जवाब में बघेल ने कहा था कि जब धीरेंद्र शास्त्री का जन्म भी नहीं हुआ था, तब से वे हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं। उन्होंने शास्त्री पर भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में काम करने का आरोप लगाते हुए उन्हें भाजपा का एजेंट तक बताया था।
पुराने विवाद के बाद अब राम और कृष्ण की तुलना को लेकर दोनों के बीच एक बार फिर बयानबाजी सामने आई है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी से शुरू हुआ यह विवाद अब धार्मिक आस्था, कथावाचकों की सार्वजनिक जिम्मेदारी और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के इर्द-गिर्द घूम रहा है।
एक ओर शास्त्री ने अपने बयान पर सफाई देते हुए किसी की भावनाएं आहत होने पर क्षमा मांगी है, वहीं दूसरी ओर भूपेश बघेल ने पूरे मामले को लेकर धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस सामने ला दी है कि धार्मिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों में शब्दों का चयन कितना महत्वपूर्ण है और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को आस्था से जुड़े संवेदनशील विषयों पर किस तरह अपनी बात रखनी चाहिए। फिलहाल शास्त्री की सफाई और बघेल की तीखी प्रतिक्रिया के बाद यह मामला राजनीतिक और धार्मिक चर्चाओं में बना हुआ है।
धार्मिक मंचों से दिए गए बयान अक्सर बड़े सामाजिक विवाद का रूप ले लेते हैं। इस मामले में धार्मिक आस्था और राजनीतिक प्रतिक्रिया दोनों जुड़ गई हैं। सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के बयानों की भाषा पर बहस भी इससे सामने आती है। इसीलिए इस घटनाक्रम पर पाठकों की नजर रहती है।
सवाल 1: धीरेंद्र शास्त्री का विवादित बयान क्या था?
जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक, शिवपुरी की रामकथा में शास्त्री ने राम और श्रीकृष्ण की मुद्राओं की तुलना की थी। इस पर कुछ संतों और लोगों ने आपत्ति जताई। बयान की मूल वीडियो की पुष्टि प्रकाशन से पहले जरूरी है।
सवाल 2: शास्त्री ने इस विवाद पर क्या कहा?
जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, शास्त्री ने वीडियो संदेश में कहा कि राम और श्रीकृष्ण एक ही परमात्मा के स्वरूप हैं और उनका इरादा किसी की आस्था को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने आहत भावनाओं के लिए क्षमा भी मांगी।
सवाल 3: भूपेश बघेल ने क्या प्रतिक्रिया दी?
जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक, भूपेश बघेल ने फेसबुक पोस्ट में शास्त्री के बयान की आलोचना की। बघेल की पोस्ट के शब्दों की पुष्टि प्रकाशन से पहले जरूरी है।
समझें क्या है पूरा मामला
- धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शिवपुरी की रामकथा में राम और श्रीकृष्ण की तुलना की।
- मथुरा के कुछ संतों ने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई और माफी मांगने को कहा।
- शास्त्री ने वीडियो संदेश में कहा कि राम और कृष्ण एक ही परमात्मा के स्वरूप हैं।
- पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस बयान पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
- यह मामला अब धार्मिक और राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
बघेल ने आरोप लगाया कि हिंदू समाज और सनातन धर्म की बात करने वाले कथावाचक अब हिंदुओं के आराध्य देवी-देवताओं का उपहास कर रहे हैं। उन्होंने शास्त्री को ढोंगी बाबा' बताते हुए सवाल उठाया कि धार्मिक भावनाओं की रक्षा का दावा करने वाले लोग इस मामले में चुप क्यों हैं।
उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद मामला केवल धार्मिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जुड़ गए हैं।
शिवपुरी की रामकथा से शुरू हुआ पूरा विवाद
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा का जिक्र किया, जिसमें शरीर तीन स्थानों से मुड़ा हुआ दिखाई देता है। इसके विपरीत उन्होंने भगवान श्रीराम की सीधी खड़ी मुद्रा का उदाहरण दिया।
इसी दौरान शास्त्री ने अयोध्या और वृंदावन को लेकर भी कुछ टिप्पणियां कीं। कथा का वीडियो सामने आने के बाद उनकी बातों पर आपत्ति जताई जाने लगी। आलोचकों का कहना था कि भगवान के अलग-अलग स्वरूपों का वर्णन करते समय ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, जिससे किसी भी भक्त की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचे।
मथुरा के संतों ने जताया विरोध, माफी की उठी मांग
संतों की आपत्ति मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप को लेकर की गई टिप्पणी पर थी। उनका कहना था कि श्रीराम और श्रीकृष्ण दोनों ही सनातन परंपरा में पूजनीय हैं और उनके स्वरूपों को लेकर ऐसी तुलना नहीं की जानी चाहिए, जिसका गलत संदेश जाए। इस विरोध के बाद धीरेंद्र शास्त्री का बयान चर्चा का विषय बन गया और उनसे स्पष्टीकरण की मांग तेज हो गई।
विवाद बढ़ने पर सामने आए धीरेंद्र शास्त्री, बोले- राम और कृष्ण में कोई भेद नहीं
शास्त्री ने कहा कि वे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण और ब्रजभूमि के भक्त हैं। वे श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करते हैं और भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान भी करते हैं।उन्होंने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण एक ही परमात्मा के स्वरूप हैं। दोनों के बीच भेद करने का उनका कोई इरादा नहीं था।
शास्त्री ने यह भी कहा कि यदि उनके शब्दों या उनकी व्याख्या से किसी श्रद्धालु की भावना आहत हुई है, तो वे इसके लिए क्षमा मांगते हैं। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि उनके कथन को गलत संदर्भ में प्रस्तुत न किया जाए।
पहले भी आमने-सामने आ चुके हैं बघेल और शास्त्री
उस समय भूपेश बघेल ने शास्त्री पर अंधविश्वास को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। इस पर शास्त्री ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यदि हिंदू समाज को एकजुट करने के प्रयास को अंधविश्वास कहा जाता है, तो ऐसी सोच रखने वालों को देश छोड़ देना चाहिए।
इसके जवाब में बघेल ने कहा था कि जब धीरेंद्र शास्त्री का जन्म भी नहीं हुआ था, तब से वे हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं। उन्होंने शास्त्री पर भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में काम करने का आरोप लगाते हुए उन्हें भाजपा का एजेंट तक बताया था।
पुराने विवाद के बाद अब राम और कृष्ण की तुलना को लेकर दोनों के बीच एक बार फिर बयानबाजी सामने आई है।
धार्मिक बयान से राजनीतिक बहस तक पहुंचा मामला
एक ओर शास्त्री ने अपने बयान पर सफाई देते हुए किसी की भावनाएं आहत होने पर क्षमा मांगी है, वहीं दूसरी ओर भूपेश बघेल ने पूरे मामले को लेकर धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस सामने ला दी है कि धार्मिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों में शब्दों का चयन कितना महत्वपूर्ण है और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को आस्था से जुड़े संवेदनशील विषयों पर किस तरह अपनी बात रखनी चाहिए। फिलहाल शास्त्री की सफाई और बघेल की तीखी प्रतिक्रिया के बाद यह मामला राजनीतिक और धार्मिक चर्चाओं में बना हुआ है।
यह खबर क्यों जरूरी है
FAQ
जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक, शिवपुरी की रामकथा में शास्त्री ने राम और श्रीकृष्ण की मुद्राओं की तुलना की थी। इस पर कुछ संतों और लोगों ने आपत्ति जताई। बयान की मूल वीडियो की पुष्टि प्रकाशन से पहले जरूरी है।
सवाल 2: शास्त्री ने इस विवाद पर क्या कहा?
जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, शास्त्री ने वीडियो संदेश में कहा कि राम और श्रीकृष्ण एक ही परमात्मा के स्वरूप हैं और उनका इरादा किसी की आस्था को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने आहत भावनाओं के लिए क्षमा भी मांगी।
सवाल 3: भूपेश बघेल ने क्या प्रतिक्रिया दी?
जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक, भूपेश बघेल ने फेसबुक पोस्ट में शास्त्री के बयान की आलोचना की। बघेल की पोस्ट के शब्दों की पुष्टि प्रकाशन से पहले जरूरी है।
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