कर्मयोगी सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म, अब समय पर मिलेगा अप्रैल का वेतन

Aishwarya Dwivedi | Apr 23, 2026, 12:25 IST
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छत्तीसगढ़ सरकार ने कर्मयोगी पोर्टल पर प्रशिक्षण और सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म कर दी है। ईमेल आईडी और ओटीपी संबंधी तकनीकी दिक्कतों के कारण अप्रैल माह का वेतन रोकने का आदेश वापस ले लिया गया है।

NEWS IN SHORT

  • शासन ने अप्रैल का वेतन रोकने संबंधी पिछला आदेश वापस लिया।
  • कर्मयोगी पोर्टल पर प्रशिक्षण की अनिवार्यता फिलहाल खत्म कर दी गई।
  • ईमेल आईडी निष्क्रिय होने से ओटीपी मिलने में दिक्कत आ रही थी।
  • तकनीकी खामियों के कारण पंजीयन प्रक्रिया में बड़ी बाधा उत्पन्न हुई।
  • सर्टिफिकेट के बिना भी अब कर्मचारियों को वेतन का भुगतान होगा।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य के लाखों अधिकारी-कर्मचारियों के हित में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और राहत भरा निर्णय लिया है। सरकार ने उस आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है, जिसके तहत केंद्र सरकार के iGOT कर्मयोगी ट्रेनिंग और अपग्रेडेशन सर्टिफिकेट प्राप्त न करने की स्थिति में अप्रैल माह का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए थे। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी इस नए आदेश के बाद अब कर्मचारियों के वेतन आहरण का रास्ता साफ हो गया है।



क्या था विवादित आदेश

प्रशासनिक दक्षता और कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा 'मिशन कर्मयोगी' पोर्टल तैयार किया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से शासन के सभी विभागों के कर्मचारियों को अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित विषयों पर ऑनलाइन प्रशिक्षण लेना अनिवार्य किया गया था। शासन ने निर्देश दिए थे कि प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को माह अप्रैल का वेतन प्राप्त करने के लिए कम से कम 3 ऑनलाइन कोर्स पूरे कर उनका 'अपग्रेडेशन सर्टिफिकेट' प्रस्तुत करना होगा। इस आदेश के बाद से ही कर्मचारी संगठनों और विभिन्न विभागों में हड़कंप की स्थिति थी।



तकनीकी खामियां बनीं रुकावट

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी पत्र में इस आदेश को वापस लेने के पीछे मुख्य कारण तकनीकी समस्याओं को बताया गया है। जांच में यह पाया गया कि:



ईमेल आईडी की समस्या: बड़ी संख्या में कर्मचारियों की शासकीय ईमेल आईडी (Govt Email ID) सक्रिय नहीं हैं।



ओटीपी (OTP) का न मिलना: कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकरण के लिए ईमेल पर ओटीपी आना अनिवार्य है, लेकिन आईडी एक्टिव न होने के कारण कर्मचारियों को ओटीपी प्राप्त नहीं हो पा रहा था।



पंजीयन में विफलता: बिना ओटीपी के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन संभव नहीं है, जिसके कारण हजारों कर्मचारी चाहकर भी प्रशिक्षण शुरू नहीं कर पा रहे थे।



प्रशासन का मानना है कि सभी कर्मचारियों की ईमेल आईडी को सक्रिय करने और उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में, यदि वेतन रोका जाता तो कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता।



आगामी आदेश तक निर्देश शिथिल

सरकार ने वस्तुस्थिति को समझते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक तकनीकी खामियां दूर नहीं हो जातीं, तब तक 'तीन कोर्स अनिवार्य' करने वाले नियम को आगामी आदेश तक शिथिल (Hold) किया जाता है। इसका अर्थ है कि अब अप्रैल माह के वेतन आहरण के लिए 'कर्मयोगी सर्टिफिकेट' की बाध्यता नहीं रहेगी।



प्रशिक्षण की प्रक्रिया रहेगी जारी

हालांकि वेतन पर लगी रोक हटा दी गई है, लेकिन सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि कौशल विकास (Skill Development) का अभियान रुकने वाला नहीं है। शासन ने सभी विभागाध्यक्षों, निगमों, मंडलों और आयोगों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को क्षमता निर्माण और दक्षता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रोत्साहित करते रहें।



निष्कर्ष

सरकार के इस संवेदनशील फैसले से उन कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है जो तकनीकी कारणों से पोर्टल पर खुद को रजिस्टर नहीं कर पा रहे थे। अब प्रशासन का ध्यान पहले तकनीकी बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को सुधारने पर होगा, ताकि भविष्य में इस डिजिटल प्रशिक्षण अभियान को सफलतापूर्वक लागू किया जा सके।



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