वेतन, बोनस और भुगतान के नियम बदले: अब हर कर्मचारी को मिलेगी वेतन पर्ची; शादी के बाद नॉमिनी भी बदलना होगा

VINAY VERMA | Nov 02, 2026, 19:28 IST
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<br>छत्तीसगढ़ में 60 साल पुराने वेतन नियम खत्म, अब हर कर्मचारी को मिलेगी वेतन पर्ची
छत्तीसगढ़ में 60 साल पुराने वेतन नियम खत्म, अब हर कर्मचारी को मिलेगी वेतन पर्ची

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नौकरी करने वाले कर्मचारियों और मजदूरों के लिए वेतन, न्यूनतम मजदूरी और भुगतान से जुड़े नियम बदल गए हैं। राज्य सरकार ने करीब छह दशक पुराने श्रम नियमों को खत्म कर नई मजदूरी संहिता लागू कर दी है। अब हर कर्मचारी को वेतन पर्ची देना अनिवार्य होगा। कंपनियों और दूसरे प्रतिष्ठानों को कर्मचारियों के वेतन

ओवरटाइम, जुर्माने और कटौती का हिसाब पांच साल तक सुरक्षित रखना होगा। इतना ही नहीं, शादी के बाद कर्मचारी को अपना नॉमिनी भी बदलना पड़ेगा। बकाया वेतन का दावा सात साल तक नहीं आने पर उस राशि का निपटारा सरकार के निर्देशों के मुताबिक होगा।

श्रम विभाग ने केंद्रीय मजदूरी संहिता 2019 के तहत मजदूरी संहिता (छत्तीसगढ़) नियम, 2026' की अंतिम अधिसूचना जारी की है। इसे छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित किया गया। अधिसूचना जारी होने के साथ ही नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। इसके चलते न्यूनतम वेतन (छत्तीसगढ़) नियम, 1958 और छत्तीसगढ़ वेतन भुगतान नियम, 1962 समाप्त हो गए हैं। यानी अब करीब 60 साल से ज्यादा पुराने नियमों की जगह नई व्यवस्था लागू होगी।

VDA में बड़ी बढ़ोतरी: श्रमिकों को मिलेगी राहत, 1 अक्टूबर से नई दरें लागू, जानें किसे मिलेगा फायदा | Big Increase in VDA: Workers to Get Relief, New Rates Applicable from October 1, Know Who Will Benefit
VDA में बढ़ोतरी,श्रमिकों को मिलेगी राहत, एक अक्टूबर से नई दरें लागू, जानें किसे मिलेगा फायदा
05 Oct 2026 ,
By Sandeep Kumar
त्योहारों से पहले पात्र श्रमिकों के लिए राहत की खबर है। केंद्रीय क्षेत्र में VDA की संशोधित दरें लागू हुई हैं। नई दरें एक अक्टूबर 2026 से प्रभावी बताई गई हैं। इससे संबंधित रोजगारों की न्यूनतम मजदूरी भी संशोधित होगी। हालांकि, हर कर्मचारी को इसका लाभ स्वतः नहीं मिलेगा। पात्रता रोजगार, कार्यस्थल और कौशल श्रेणी पर निर्भर करेगी। अपनी लागू दर समझना इसलिए जरूरी है।
त्योहारों से पहले पात्र श्रमिकों के लिए राहत की खबर है। केंद्रीय क्षेत्र में VDA की संशोधित दरें लागू हुई हैं। नई दरें एक अक्टूबर 2026 से प्रभावी बताई गई हैं। इससे संबंधित रोजगारों की न्यूनतम मजदूरी भी संशोधित होगी। हालांकि, हर कर्मचारी को इसका लाभ स्वतः नहीं मिलेगा। पात्रता रोजगार, कार्यस्थल और कौशल श्रेणी पर निर्भर करेगी। अपनी लागू दर समझना इसलिए जरूरी है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मजदूरी संहिता (छत्तीसगढ़) नियम, 2026 के तहत वेतन के नियम बदलने की बात कही गई है।
  • हर कर्मचारी को वेतन भुगतान के समय या उससे पहले वेतन पर्ची देनी होगी।
  • वेतन पर्ची कागज पर या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दी जा सकेगी।
  • कंपनियों को कर्मचारियों के वेतन और कटौती का रिकॉर्ड पांच साल तक रखना होगा।
  • इन नियमों का असर नियोक्ता और कर्मचारी दोनों पर पड़ेगा।

अब हर महीने मिलेगी वेतन पर्ची

नए नियमों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव वेतन पर्ची को लेकर किया गया है। अब नियोक्ता के लिए हर कर्मचारी को वेतन भुगतान के समय या उससे पहले वेतन पर्ची देना जरूरी होगा। इसके लिए प्ररूप-पांच निर्धारित किया गया है। पर्ची कागज पर दी जा सकती है या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे कर्मचारी को यह पता चल सकेगा कि उसे कितना वेतन मिला, कितनी कटौती हुई और भुगतान का पूरा हिसाब क्या है।


पांच साल तक रखना होगा हिसाब

अब कंपनियों और प्रतिष्ठानों को कर्मचारियों से जुड़े रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रखने होंगे। कर्मचारी रजिस्टर प्ररूप-एक में, जुर्माना, ओवरटाइम, अग्रिम और वेतन कटौती का रिकॉर्ड प्ररूप-चार में रखना होगा। वहीं उपस्थिति रजिस्टर और मस्टर रोल के लिए प्ररूप-नौ निर्धारित किया गया है। इन सभी रिकॉर्ड को अंतिम प्रविष्टि की तारीख से कम से कम पांच साल तक सुरक्षित रखना होगा। जरूरत पड़ने पर श्रम विभाग इन दस्तावेजों की जांच कर सकेगा।

शादी के बाद पुराना नॉमिनी अमान्य

नए नियमों में कर्मचारियों के नामांकन यानी नॉमिनी को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है। कर्मचारी को प्ररूप-सात में अपने परिवार के सदस्य के पक्ष में नामांकन करना होगा। यदि कर्मचारी का परिवार है तो परिवार से बाहर किसी व्यक्ति के नाम किया गया नामांकन मान्य नहीं होगा। खास बात यह है कि शादी से पहले किया गया नामांकन विवाह के बाद स्वतः अमान्य हो जाएगा। कर्मचारी को अपने जीवनसाथी के नाम से नया नामांकन करना होगा। कर्मचारी की मृत्यु होने पर बकाया वेतन और दूसरी देय राशि के भुगतान में यही नामांकन काम आएगा।


सात साल बाद राशि का होगा निपटारा

कई बार कर्मचारी की मौत हो जाती है या उसका पता नहीं चलता। ऐसे में उसके वेतन या दूसरी देय राशि का भुगतान अटक जाता है। नए नियमों के मुताबिक, यदि छह महीने तक यह रकम कर्मचारी या उसके परिवार को नहीं मिल पाती तो नियोक्ता को इसे सहायक श्रमायुक्त या श्रम पदाधिकारी के पास जमा करना होगा। इसके लिए छह महीने की अवधि खत्म होने के बाद 15 दिन का समय मिलेगा।

श्रम अधिकारी इस रकम को किसी अनुसूचित बैंक में सावधि जमा (एफडी) या सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करेंगे। इसके साथ ही नोटिस बोर्ड और स्थानीय समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशित कराई जाएगी, ताकि संबंधित व्यक्ति या परिवार अपना दावा कर सके। सात साल तक कोई दावा नहीं आने पर राशि का निपटारा राज्य सरकार के प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।

नियम तोड़ने पर 50 प्रतिशत जुर्माना

नए नियमों में श्रम कानूनों के उल्लंघन पर कार्रवाई और समझौते की प्रक्रिया भी तय की गई है। यदि कोई नियोक्ता अपराध का समझौते के जरिए निपटारा करना चाहता है तो उसे निर्धारित अधिकतम जुर्माने की 50 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी। इसके लिए आदेश मिलने के बाद 30 दिन का समय दिया जाएगा। तय अवधि में रकम जमा नहीं करने पर सक्षम न्यायालय में आपराधिक मुकदमा शुरू किया जा सकेगा। श्रमिक या कर्मचारी, पंजीकृत श्रमिक संघ और निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायत कर सकेंगे।


तीन साल रहेगा सलाहकार मंडल का कार्यकाल

न्यूनतम मजदूरी और वेतन से जुड़े मामलों में सरकार को सलाह देने वाले राज्य सलाहकार मंडल के लिए भी नए नियम बनाए गए हैं। मंडल के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल तीन साल होगा। कोई सदस्य अधिकतम दो कार्यकाल तक ही दोबारा नामांकित हो सकेगा। बिना पूर्व सूचना लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहने पर सदस्यता समाप्त हो जाएगी। सामान्य बैठक की सूचना 15 दिन और आकस्मिक बैठक की सूचना सात दिन पहले देनी होगी। बैठक के लिए कम से कम एक-तिहाई सदस्यों की मौजूदगी जरूरी होगी। साथ ही नियोक्ता और कर्मचारी, दोनों पक्षों से कम से कम एक प्रतिनिधि का होना भी अनिवार्य रहेगा।

कुल मिलाकर नए नियमों में वेतन भुगतान का रिकॉर्ड रखने, कर्मचारियों को भुगतान का हिसाब देने और बकाया राशि के निपटारे की प्रक्रिया तय की गई है। अब इन प्रावधानों का पालन करना नियोक्ताओं और प्रतिष्ठानों के लिए जरूरी होगा। वहीं कर्मचारियों को अपने वेतन और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी रखने का आधार मिलेगा।

यह खबर क्यों जरूरी है

छत्तीसगढ़ में वेतन और भुगतान से जुड़े नियम करीब छह दशक बाद बदलने की बात कही गई है। हर कर्मचारी को वेतन पर्ची देना अनिवार्य होने से भुगतान का हिसाब साफ रहने की उम्मीद है। नियोक्ताओं के लिए रिकॉर्ड पांच साल तक रखने की जिम्मेदारी भी तय हुई है। इसका असर लाखों कर्मचारियों और मजदूरों के वेतन और भुगतान पर पड़ सकता है। नियमों की अंतिम स्थिति साफ होने के बाद ही यह असर पूरी तरह तय होगा।

FAQ

सवाल 1: मजदूरी संहिता के तहत कर्मचारियों को किस तरह की वेतन पर्ची मिलेगी?

जवाब: नियमों के अनुसार नियोक्ता को हर कर्मचारी को वेतन भुगतान के समय या उससे पहले वेतन पर्ची देनी होगी। इसके लिए प्ररूप-पांच तय किया गया है। पर्ची कागज पर दी जा सकती है या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे कर्मचारी को अपने वेतन और कटौती का पूरा हिसाब मिलेगा।

सवाल 2: नियोक्ताओं को वेतन का रिकॉर्ड कितने साल तक रखना होगा?

जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक, वेतन, ओवरटाइम, जुर्माने और कटौती का रिकॉर्ड कम से कम पांच साल तक सुरक्षित रखना होगा। इसकी गिनती अंतिम प्रविष्टि की तारीख से होगी। जरूरत पड़ने पर श्रम विभाग इन दस्तावेजों की जांच कर सकेगा।

सवाल 3: ये नियम किस कानून के ढांचे में बनाए गए हैं?

जवाब: ये नियम केंद्रीय मजदूरी संहिता 2019 के ढांचे में बनाए गए हैं। केंद्र ने मजदूरी संहिता के नियम मई 2026 में अधिसूचित किए थे। राज्य के नियम इसी संहिता को लागू करने के लिए हैं।
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