बिना कोचिंग के पहले ही प्रयास में पाई AIR 138, IAS रविंद्र कुमार मेघवाल की कहानी

Jageshwar Prasad | Nov 02, 2026, 18:45 IST
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IAS रविंद्र कुमार मेघवाल ने UPSC 2023 में 984 अंकों के साथ पाई थी ऑल इंडिया रैंक 138
IAS रविंद्र कुमार मेघवाल ने UPSC 2023 में 984 अंकों के साथ पाई थी ऑल इंडिया रैंक 138

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षा माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए जहां लोग वर्षों तक दिल्ली की बड़ी कोचिंगों में लाखों रुपए झोंकते हैं। वहीं कुछ ऐसे युवा भी होते हैं जो अपने आत्मविश्वास, किताबों की सही समझ और सेल्फ स्टडी के दम पर पहले ही प्रयास में इस लक्ष्य को पा लेते हैं।

ऐसी ही एक अद्भुत और प्रेरणादायी कहानी है वर्ष 2024 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस रविंद्र कुमार मेघवाल (IAS Ravindra Kumar Meghwal) की। सिरोही के एक छोटे से गांव से निकलकर बिना किसी कोचिंग के अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 138 (AIR 138) हासिल करने वाले रविंद्र की यह कहानी हर युवा के लिए एक मिसाल है। आइए जानते हैं उनके इस शानदार सफर को।

शिक्षा की विरासत और सिरोही की माटी का पुत्र

रविंद्र कुमार मेघवाल मूल रूप से राजस्थान के सिरोही जिले की मंडार तहसील के मंडर गांव के रहने वाले हैं। उनको परिवार से शिक्षा और अनुशासन मिला। उनके पिता जीवाराम बुनकर, एक सरकारी स्कूल में सैकंड ग्रेड शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसीलिए रविंद्र को पढ़ाई का माहौल घर से ही मिला।

उनके दादा स्वर्गीय अमराराम जी एक सम्मानित शिक्षक रहे हैं, उनके ताऊ शंकरलाल जी स्कूल प्रधानाचार्य हैं, और उनके चाचा रमेश कुमार लेक्चरर हैं।

रविंद्र बचपन से ही पढ़ाई में बेहद कुशाग्र और मेधावी रहे हैं। उन्होंने अपनी पांचवी तक की प्रारंभिक शिक्षा मंडार के आदर्श विद्या मंदिर से पूरी की। इसके बाद उन्होंने मेहनत की और उनका चयन प्रतिष्ठित जवाहर नवोदय विद्यालय, कालंद्री (सिरोही) में हो गया, जहां उन्होंने 12वीं कक्षा तक की अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। नवोदय के दौरान 10वीं में उन्होंने शत-प्रतिशत और 12वीं में 99 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।


उदयपुर से ग्रेजुएशन और मन में जागा 'आईएएस' बनने का बीज

स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद रविंद्र ने आगे की उच्च शिक्षा के लिए मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (MLSU), उदयपुर का रुख किया और वहां से साइंस (विज्ञान) में ग्रेजुएशन (B.Sc.) की डिग्री पूरी की।

कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही उनके भीतर प्रशासनिक सेवा में जाने का विचार प्रबल हो गया। अपने दादा और पिता के संस्कारों से प्रेरित होकर उन्होंने ठान लिया कि उन्हें देश की सबसे बड़ी सेवा में चयनित होना है यानी आईएएस (IAS) बनना है। बीएससी थर्ड ईयर की पढ़ाई के दौरान ही साल 2021 में वे जयपुर चले गए और उन्होंने यूपीएससी की तैयारी का गंभीर सफर शुरू कर दिया।


मैं कोई कोचिंग नहीं करूंगा

जब रविंद्र ने अपने पिता से कहा कि वे यूपीएससी का एग्जाम देना चाहते हैं, तो एक पिता होने के नाते जीवाराम ने उन्हें सलाह दी कि यह बहुत कठिन परीक्षा है, इसलिए किसी अच्छी कोचिंग से तैयारी कर ली जाए। लेकिन रविंद्र का आत्मविश्वास अडिग था। उन्होंने अपने पिता से स्पष्ट कह दिया- "पापा, मैं कोई कोचिंग ज्वाइन नहीं करूंगा। मुझे खुद पर और अपनी किताबों पर पूरा भरोसा है।"

उनकी यह जिद और विश्वास उस समय सच साबित हुई जब उन्होंने बीएससी थर्ड ईयर का रिजल्ट आने से पहले ही यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) दे डाली और उसे पास भी कर लिया। हालांकि उस समय ग्रेजुएशन का फाइनल रिजल्ट न आने के कारण वे मेंस (Mains) परीक्षा नहीं दे पाए, लेकिन इस शुरुआती सफलता ने उनके हौसले को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। इसके बाद जब डिग्री पूरी हुई, तो उन्होंने अपने पहले ही आधिकारिक प्रयास में यूपीएससी क्रैक कर इतिहास रच दिया।


1.5 साल तक घर से दूरी और एकाग्रता की मिसाल

रविंद्र की सफलता के पीछे उनकी कड़ी तपस्या और त्याग की लंबी कहानी है:

साैशियल डिस्टेंसिंग और त्याग: रविंद्र ने सफलता पाने के लिए पिछले डेढ़ साल तक किसी भी शादी-ब्याह, धार्मिक या सामाजिक समारोह में हिस्सा नहीं लिया। वे डेढ़ साल तक अपने घर तक नहीं गए।

रणनीति: प्रीलिम्स परीक्षा से 4 महीने पहले वे पूरी तरह जयपुर में एकाग्र होकर पढ़ने लगे। उनका मेंस परीक्षा का सेंटर दिल्ली आया था, जिसके लिए वे करीब दो महीने दिल्ली में रहे।

984 अंकों का स्कोर: रविंद्र ने UPSC 2023 की मुख्य परीक्षा और व्यक्तित्व परीक्षण में कुल 984 अंक प्राप्त कर अपनी मेहनत का शानदार परिचय दिया।

जब ट्रेनिंग के दौरान आया खुशी का वो फोन कॉल

परिणाम के दिन उनके पिता जीवाराम सिरोही में चुनाव से जुड़ी एक आधिकारिक ट्रेनिंग ले रहे थे। तभी उनके फोन की घंटी बजी। फोन पर खुद रविंद्र थे।

पिता ने जब फोन रिसीव किया और रविंद्र ने अपनी सफलता (IAS बनने) की खबर सुनाई, तो उस सख्त शिक्षक पिता की आंखें खुशी के आंसुओं से भर आईं। ट्रेनिंग हॉल में उनके साथ उनके भाई रमेश बुनकर भी मौजूद थे। यह उनके पूरे परिवार और पूरे क्षेत्र के लिए जिंदगी का सबसे गौरवशाली पल था।


वर्तमान प्रशासनिक दायित्व और राजस्थान कैडर

सफलता के बाद रविंद्र कुमार मेघवाल को 2024 बैच के तहत राजस्थान कैडर आवंटित किया गया। लबासना (LBSNAA) से अपनी शुरुआती और अकादमिक ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वे वर्तमान में राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में सक्रिय रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं:

जिला निर्वाचन कार्यालय, चित्तौड़गढ़: वर्तमान में वे चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) के जिला निर्वाचन कार्यालय में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD / विशेष अधिकारी) के पद पर तैनात हैं।

आईएएस रविंद्र कुमार मेघवाल के जीवन से युवाओं के लिए 4 बड़े सबक

1. कोचिंग सफलता की गारंटी नहीं है:

रविंद्र ने साबित कर दिया कि अगर आपके पास सही किताबें, सिलेबस की समझ और खुद पर अटूट विश्वास है, तो आप बिना किसी महँगी कोचिंग के भी देश की टॉप रैंक ला सकते हैं।

2. असफलता या शुरुआती बाधाओं से घबराएं नहीं:

डिग्री पूरी न होने के कारण भले ही वे पहली बार मेंस न दे पाए हों, लेकिन उस अनुभव ने उन्हें अगले प्रयास में सफल होने की अचूक ऊर्जा दी।

3. त्याग और फोकस ही सफलता की चाबी है:

डेढ़ साल तक घर-परिवार और सामाजिक आयोजनों से दूरी बनाकर केवल अपने लक्ष्य पर फोकस करना ही आपको भीड़ से अलग करता है।

4. पारिवारिक समर्थन सबसे बड़ी ताकत है:

एक शिक्षक पिता और संस्कारी परिवार का साथ जब मिला, तो रविंद्र का रास्ता आसान हो गया। अपनों का भरोसा आपके सबसे बड़े संघर्ष को भी हरा देता है।

सिरोही के एक साधारण शिक्षक परिवार से ताल्लुक रखने वाला और नवोदय विद्यालय में पढ़कर अपनी तकदीर खुद लिखने वाला यह होनहार युवा आज राजस्थान के चित्तौड़गढ़ और रावतभाटा में अपनी प्रशासनिक कुशलता का परिचय दे रहा है।

आईएएस रविंद्र कुमार मेघवाल की यह कहानी देश के उन तमाम ग्रामीण और सामान्य पृष्ठभूमि के युवाओं के लिए एक जीवंत प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी को अपनी असफलता का बहाना बनाते हैं। यह कहानी गवाह है कि अगर इरादे मजबूत हों और खुद पर भरोसा हो, तो गाँव की चौपाल से निकलकर देश के सर्वोच्च प्रशासनिक पदों तक का सफर तय किया जा सकता है।
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