खाली पेन का ढेर देख पास कर ली UPSC, 13वीं रैंक लाकर IAS बनीं मेधा आनंद
Jageshwar prasad | Jul 30, 2026, 21:17 IST
5 बार असफल, छठे प्रयास में AIR 13, मेधा आनंद बनीं IAS
मेधा आनंद की UPSC की यात्रा पांच असफलताओं से भरी रही। लेकिन छठे प्रयास में 2023 में उन्होंने 13वीं रैंक हासिल की। 2024 बैच की IAS अधिकारी मेधा आनंद राजस्थान कैडर में हैं।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। यहां असफलताएं अक्सर उम्मीदवारों का हौसला तोड़ देती हैं। लेकिन कुछ मजबूत इरादों वाले लोग भी होते हैं जो असफलताओं से टूटने के बजाय उनसे सीढ़ियां बनाते हैं।
ऐसी ही एक दिल को छू लेने वाली कहानी है वर्ष 2024 बैच की राजस्थान कैडर की आईएएस अधिकारी मेधा आनंद की। एक घरेलू सहायिका की व्यथा को देखकर समाज बदलने का सपना देखने वाली मेधा ने लगातार झटके खाने के बाद भी हार नहीं मानी। उनके खाली पेन का एक पूरा ढेर और उनके दोस्तों का साथ कैसे उनकी जीत की वजह बना, आइए जानते हैं इस पूरी कहानी को।
मेधा आनंद ने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर ली थी। उन दिनों उनके घर में झाड़ू-पोंछा करने के लिए एक महिला आया करती थी। वह अक्सर अपनी जिंदगी की भारी परेशानियों और मुश्किलों के बारे में मेधा और उनकी मां से जिक्र करती थी।
जब मेधा उसकी उन बेबस भरी बातों को सुनतीं, तो उनके मन में एक गहरा सवाल खड़ा होता- आखिर वह ऐसा क्या करें कि इस महिला और समाज के जैसे अन्य वंचित लोगों की जिंदगी में एक वास्तविक बदलाव आ सके?
जब मेधा ने अपनी इस उलझन को अपनी मां के साथ साझा किया। तो उनकी मां ने उन्हें सही दिशा दिखाते हुए समझाया कि केवल एक आईएएस अधिकारी ही वह शख्स होता है। जो प्रशासनिक ताकत और नीतियों के जरिए समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति की जिंदगी बदल सकता है।
बस! उसी दिन मेधा ने अपने दिल में ठान लिया कि वे आईएएस अधिकारी ही बनेंगी।
सपनों का सफर इतना आसान नहीं था:
पहला प्रयास (2018): मेधा ने पूरी शिद्दत से तैयारी की, लेकिन अपनी पहली कोशिश में वे असफल रहीं।
दूसरा प्रयास (2019): उन्होंने अपनी रणनीति बदली और दोबारा परीक्षा दी। इस बार वे सफल हुईं और 311वीं रैंक हासिल की। इस रैंक के आधार पर उनका चयन भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) में हो गया।
संघर्ष का अगला चरण: मेधा ने IRTS की नौकरी तो ज्वाइन कर ली, लेकिन उनका असली लक्ष्य तो आईएएस बनना था। नौकरी के साथ तैयारी जारी रखना बेहद कठिन था। साल 2020 में उन्होंने तीसरा प्रयास किया, लेकिन वे कट-ऑफ क्लियर नहीं कर पाईं। इसके अगले साल वे प्रीलिम्स की बाधा भी पार नहीं कर पाईं।
पांचवा प्रयास (2022): साल 2022 में उन्होंने पांचवीं बार परीक्षा दी, लेकिन इस बार भी असफलता ही हाथ लगी। लगातार मिल रहे इन झटकों के बावजूद मेधा का हौसला कम नहीं हुआ। उन्होंने एक बार फिर मैदान में उतरने का फैसला किया।
तैयारी के उस लंबे दौर में एक दिलचस्प और अनोखी घटना घटी। मेधा जब भी पढ़ते-पढ़ते कोई पेन खत्म कर देती थीं, तो उसे फेंकने के बजाय अपनी स्टडी टेबल की दराज में रख देती थीं।
एक दिन उनके कुछ दोस्त उनसे मिलने आए। जब उन्होंने मेराज की दराज खोली तो वहां 4-5 खाली पेन रखे मिले, जिन्हें वे उठाकर अपने साथ ले गए। इसके बाद यह एक सिलसिला बन गया।
हर 10-15 दिन में मेधा अपने खाली पेन दराज में डालतीं और उनके दोस्त चुपचाप आकर उन खाली पेन को अपने साथ ले जाते। वे सभी मिलकर मेधा की इस मेहनत के सबूत को सहेज रहे थे।
फिर आया साल 2023, जब मेधा अपनी छठी बार यूपीएससी परीक्षा देने के लिए घर से निकलने की तैयारी कर रही थीं। तभी उनके वही दोस्त अचानक वहां पहुंचे। उन्होंने मेधा के सामने वही खाली पेन का पूरा ढेर लाकर रख दिया, जिसे उन्होंने महीनों से जमा किया था।
दोस्तों ने मेधा से कहा- जब तुम परीक्षा हॉल में बैठोगी, तो इस पेन के ढेर को याद करना। सोचना कि आज के इस दिन तक पहुंचने के लिए तुमने कितनी लंबी और गहरी तपस्या की है। यह मानकर चलना कि तुम मेरिट लिस्ट में जगह बनाने के लिए संघर्ष के एक बहुत बड़े सफर को पार करके यहां तक आई हो।
दोस्तों की इस अनोखे और प्रेरणादायक सरप्राइज ने मेधा के भीतर एक ऐसी ऊर्जा भर दी, जिसने उनके सारे डर को खत्म कर दिया।
मेधा ने परीक्षा पूरी शिद्दत से दी। जब रिजल्ट आया, तो न सिर्फ उनके परिवार और दोस्तों को, बल्कि खुद मेधा को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ।
मेधा ने यूपीएससीसिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 13वीं रैंक (AIR 13) हासिल कर ली थी। उन्हें खुद इस बात का अंदाजा नहीं था कि वे टॉप-20 में जगह बना लेंगी।
उनके एक दोस्त ने जब फोन करके उन्हें इस ऐतिहासिक सफलता की खबर दी, तो खुशी के मारे उनकी आंखें भीग गईं। इसके बाद उन्होंने अपने माता-पिता को यह खुशखबरी दी और पूरे घर में जश्न का माहौल बन गया।
सफलता के बाद मेधा आनंद को 2024 बैच के तहत राजस्थान कैडर आवंटित किया गया। कैडर मिलने के बाद उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग भीलवाड़ा जिले में सहायक कलेक्टर के रूप में हुई। वहां उन्होंने स्थानीय प्रशासन, राजस्व मामलों और जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के तौर-तरीकों को बहुत बारीकी से समझा।
भीलवाड़ा में अपनी तय फील्ड ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद, मेधा जुलाई 2026 में अपनी आगे की अंतिम ट्रेनिंग (Phase-II) को पूरा करने के लिए वापस LBSNAA, मसूरी लौट चुकी हैं। इस प्रशिक्षण के तुरंत बाद उन्हें राजस्थान सरकार द्वारा स्वतंत्र रूप से उप-खंड मजिस्ट्रेट (SDM) या समकक्ष पद पर पहली पूर्णकालिक पोस्टिंग सौंपी जाएगी।
![5 बार असफल, छठे प्रयास में AIR 13, मेधा आनंद बनीं IAS]()
मेधा आनंद ने 5 बार हार देखी, लेकिन 6वीं बार AIR 13 लाकर साबित किया- मेहनत कभी बेकार नहीं जाती, बस उसे पहचानने वाला होना चाहिए। उनके दोस्तों ने उनकी मेहनत को खाली पेनों में पहचाना, और वही पेन उनकी जीत का प्रतीक बने।
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ऐसी ही एक दिल को छू लेने वाली कहानी है वर्ष 2024 बैच की राजस्थान कैडर की आईएएस अधिकारी मेधा आनंद की। एक घरेलू सहायिका की व्यथा को देखकर समाज बदलने का सपना देखने वाली मेधा ने लगातार झटके खाने के बाद भी हार नहीं मानी। उनके खाली पेन का एक पूरा ढेर और उनके दोस्तों का साथ कैसे उनकी जीत की वजह बना, आइए जानते हैं इस पूरी कहानी को।
एक नौकरानी की तकलीफ और IAS बनने का संकल्प
जब मेधा उसकी उन बेबस भरी बातों को सुनतीं, तो उनके मन में एक गहरा सवाल खड़ा होता- आखिर वह ऐसा क्या करें कि इस महिला और समाज के जैसे अन्य वंचित लोगों की जिंदगी में एक वास्तविक बदलाव आ सके?
जब मेधा ने अपनी इस उलझन को अपनी मां के साथ साझा किया। तो उनकी मां ने उन्हें सही दिशा दिखाते हुए समझाया कि केवल एक आईएएस अधिकारी ही वह शख्स होता है। जो प्रशासनिक ताकत और नीतियों के जरिए समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति की जिंदगी बदल सकता है।
बस! उसी दिन मेधा ने अपने दिल में ठान लिया कि वे आईएएस अधिकारी ही बनेंगी।
RTS की नौकरी और नाकामयाबी का लंबा दौर
पहला प्रयास (2018): मेधा ने पूरी शिद्दत से तैयारी की, लेकिन अपनी पहली कोशिश में वे असफल रहीं।
दूसरा प्रयास (2019): उन्होंने अपनी रणनीति बदली और दोबारा परीक्षा दी। इस बार वे सफल हुईं और 311वीं रैंक हासिल की। इस रैंक के आधार पर उनका चयन भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) में हो गया।
संघर्ष का अगला चरण: मेधा ने IRTS की नौकरी तो ज्वाइन कर ली, लेकिन उनका असली लक्ष्य तो आईएएस बनना था। नौकरी के साथ तैयारी जारी रखना बेहद कठिन था। साल 2020 में उन्होंने तीसरा प्रयास किया, लेकिन वे कट-ऑफ क्लियर नहीं कर पाईं। इसके अगले साल वे प्रीलिम्स की बाधा भी पार नहीं कर पाईं।
पांचवा प्रयास (2022): साल 2022 में उन्होंने पांचवीं बार परीक्षा दी, लेकिन इस बार भी असफलता ही हाथ लगी। लगातार मिल रहे इन झटकों के बावजूद मेधा का हौसला कम नहीं हुआ। उन्होंने एक बार फिर मैदान में उतरने का फैसला किया।
दराज में जमे खाली पेन और दोस्त
एक दिन उनके कुछ दोस्त उनसे मिलने आए। जब उन्होंने मेराज की दराज खोली तो वहां 4-5 खाली पेन रखे मिले, जिन्हें वे उठाकर अपने साथ ले गए। इसके बाद यह एक सिलसिला बन गया।
हर 10-15 दिन में मेधा अपने खाली पेन दराज में डालतीं और उनके दोस्त चुपचाप आकर उन खाली पेन को अपने साथ ले जाते। वे सभी मिलकर मेधा की इस मेहनत के सबूत को सहेज रहे थे।
परीक्षा से पहले का वह भावुक पल
दोस्तों ने मेधा से कहा- जब तुम परीक्षा हॉल में बैठोगी, तो इस पेन के ढेर को याद करना। सोचना कि आज के इस दिन तक पहुंचने के लिए तुमने कितनी लंबी और गहरी तपस्या की है। यह मानकर चलना कि तुम मेरिट लिस्ट में जगह बनाने के लिए संघर्ष के एक बहुत बड़े सफर को पार करके यहां तक आई हो।
दोस्तों की इस अनोखे और प्रेरणादायक सरप्राइज ने मेधा के भीतर एक ऐसी ऊर्जा भर दी, जिसने उनके सारे डर को खत्म कर दिया।
जब AIR 13 ने सब कुछ बदल दिया
मेधा ने यूपीएससीसिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 13वीं रैंक (AIR 13) हासिल कर ली थी। उन्हें खुद इस बात का अंदाजा नहीं था कि वे टॉप-20 में जगह बना लेंगी।
उनके एक दोस्त ने जब फोन करके उन्हें इस ऐतिहासिक सफलता की खबर दी, तो खुशी के मारे उनकी आंखें भीग गईं। इसके बाद उन्होंने अपने माता-पिता को यह खुशखबरी दी और पूरे घर में जश्न का माहौल बन गया।
राजस्थान कैडर और वर्तमान प्रशासनिक सफर
भीलवाड़ा में अपनी तय फील्ड ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद, मेधा जुलाई 2026 में अपनी आगे की अंतिम ट्रेनिंग (Phase-II) को पूरा करने के लिए वापस LBSNAA, मसूरी लौट चुकी हैं। इस प्रशिक्षण के तुरंत बाद उन्हें राजस्थान सरकार द्वारा स्वतंत्र रूप से उप-खंड मजिस्ट्रेट (SDM) या समकक्ष पद पर पहली पूर्णकालिक पोस्टिंग सौंपी जाएगी।
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5 बार असफल, छठे प्रयास में AIR 13, मेधा आनंद बनीं IAS
मेधा आनंद ने 5 बार हार देखी, लेकिन 6वीं बार AIR 13 लाकर साबित किया- मेहनत कभी बेकार नहीं जाती, बस उसे पहचानने वाला होना चाहिए। उनके दोस्तों ने उनकी मेहनत को खाली पेनों में पहचाना, और वही पेन उनकी जीत का प्रतीक बने।
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