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NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ सरकार ने iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के प्रशिक्षण आदेश में संशोधन किया।
- अब अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन कोर्स पूरा न करने पर नहीं काटा जाएगा।
- पहले का आदेश था कि तीन कोर्स पूरे न करने पर अप्रैल का वेतन रोका जाएगा।
- तकनीकी दिक्कतों और पंजीयन समस्याओं के कारण सरकार ने आदेश में राहत दी।
- कर्मचारी बिना दबाव के प्रशिक्षण ले सकेंगे और आर्थिक तनाव से राहत मिली।
NEWS IN DETAIL
Raipur. छत्तीसगढ़ सरकार ने iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म को लेकर जारी अपने पहले के आदेश में बड़ा संशोधन करते हुए प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। नए आदेश के मुताबिक अब सरकार अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण यानी “शऊर” तो सिखाएगी, लेकिन कोर्स पूरा नहीं करने की स्थिति में उनका वेतन नहीं काटा जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस संबंध में संशोधित आदेश जारी कर दिया है, जिससे प्रदेश के करीब 4 लाख 10 हजार कर्मयोगियों को सीधा फायदा मिलेगा।
तीन कोर्स अनिवार्य थे
दरअसल, इससे पहले 3 जनवरी 2026 को जारी आदेश में यह व्यवस्था की गई थी कि प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी को iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर कम से कम तीन कोर्स करना अनिवार्य होगा और ऐसा नहीं करने पर अप्रैल माह का वेतन आहरण नहीं किया जाएगा। इस आदेश के बाद राज्यभर में कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच नाराजगी देखी गई थी। कई विभागों में तकनीकी दिक्कतों और सरकारी ई-मेल आईडी सक्रिय नहीं होने के कारण पंजीयन तक संभव नहीं हो पा रहा था।
द सूत्र की खबर से बदलाव
‘द सूत्र’ द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद सरकार ने स्थिति की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान सामने आया कि बड़ी संख्या में कर्मचारी केवल तकनीकी कारणों से न तो पोर्टल पर पंजीयन कर पा रहे हैं और न ही निर्धारित समय सीमा में कोर्स पूरा कर पा रहे हैं। ऐसे में वेतन रोकने का फैसला व्यावहारिक नहीं माना गया।
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GAD ने जारी किया नया आदेश
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी नए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर तीन कोर्स पूरे करने की शर्त को वेतन आहरण से फिलहाल अलग कर दिया गया है। यह शिथिलीकरण आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगा। हालांकि विभागों की जिम्मेदारी तय की गई है कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को क्षमता निर्माण, कौशल विकास और दक्षता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण के प्रति लगातार प्रोत्साहित करें।
कर्मयोगियों ने ली राहत की सांस
सरकार के इस फैसले को कर्मचारी हित में बड़ा कदम माना जा रहा है। छग कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा का कहना है कि प्रशिक्षण आवश्यक है, लेकिन तकनीकी कमियों और अव्यवस्थित सिस्टम के कारण वेतन पर रोक लगाना अनुचित होता। नए आदेश से न सिर्फ कर्मचारियों का आर्थिक तनाव खत्म होगा, बल्कि वे बिना दबाव के प्रशिक्षण भी ले सकेंगे।
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