कृषि अधिकारी की मौजूदगी में किसानों को बेची जा रही थी एक्सपायर्ड नैनो यूरिया

Krishna Kumar Sikander | Jul 05, 2025, 10:57 IST
Expired nano urea was being sold the sootr
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में किसानों के साथ धोखाधड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है। डौंडी तहसील के कोठारी कृषि केंद्र में कृषि अधिकारी की मौजूदगी में ही किसानों को एक्सपायर्ड नैनो यूरिया बेची जा रही थी। किसानों ने जमकर हंगामा किया।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में किसानों के साथ धोखाधड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है। डौंडी तहसील के कोठारी कृषि केंद्र में कृषि अधिकारी की मौजूदगी में ही किसानों को एक्सपायर्ड नैनो यूरिया बेची जा रही थी। इस बात का पता चलते ही किसानों ने जमकर हंगामा किया, जिसके बाद अधिकारी को एक्सपायर्ड खाद वापस लेने और बदलने का आश्वासन देना पड़ा, तब जाकर मामला शांत हुआ।



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खाद की कमी से जूझ रहे किसान

मॉनसून शुरू होते ही किसान धान की बुवाई में जुटे हैं, लेकिन उन्हें खाद की कमी से भी जूझना पड़ रहा है। सहकारी सोसायटियों में यूरिया और डीएपी खाद उपलब्ध नहीं हैं, जबकि बिचौलियों के पास यह आसानी से मिल रही है। मजबूरन, किसान अधिक दाम देकर निजी केंद्रों से खाद खरीदने को मजबूर हैं, जिसका ताजा उदाहरण कोठारी कृषि केंद्र में हुई यह घटना है।



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जब्त यूरिया को ही सरकारी रेट पर बांटने का खेल!

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हैरानी की बात यह है कि कुछ दिनों पहले ही कृषि विभाग ने कोठारी कृषि केंद्र में दबिश देकर अवैध रूप से भंडारित यूरिया जब्त किया था। अब उसी जब्त यूरिया खाद को किसानों को सरकारी दरों पर बांटा जा रहा है। इसी बीच, एक्सपायर्ड नैनो यूरिया बेचने का यह नया मामला सामने आया है, जिसने कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे प्रकरण के बाद कृषि विभाग के अधिकारी अब दूसरी बार कृषि केंद्र को नोटिस जारी करने की बात कह रहे हैं।



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यह होता है नैनो यूरिया

आइए जानते है कि आखिर नैनो यूरिया क्या है। दरअसल पारंपरिक यूरिया का एक तरल विकल्प नैनो यूरिया है। इसको नैनो तकनीक से विकसित किया गया है, इसलिए इसका नाम नैनो यूरिया दिया गया। नैनो यूरिया पौधों को नाइट्रोजन प्रदान करने का एक प्रभावी तरीका है और इसे स्वदेशी रूप से नैनो बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (कलोल, गुजरात) में विकसित किया गया है।



बालोद की घटना दर्शाती है कि खाद की कमी और बिचौलियों के सक्रिय होने का फायदा उठाकर किस तरह किसानों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, और इसमें सरकारी अधिकारियों की कथित संलिप्तता और भी चिंताजनक है।



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