फडणवीस ने लिया ज़मीन फर्जीवाड़े पर संज्ञान, छत्तीसगढ़ सरकार ने नहीं दिया ध्यान
RAIPUR : प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के निर्देश के बाद महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की बिजली उत्पादन कंपनी महाजेनको से जुड़े करीब 110 करोड़ रुपये के भूमि अधिग्रहण अनियमितता मामले की जांच शुरू करने का फैसला किया है। यह मामला छत्तीसगढ़ के गारे पेलमा सेक्टर 2 के कोल ब्लॉक से जुड़ा हुआ है। हैरानी की बात ये है कि फडणवीस सरकार ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। लेकिन जिस छत्तीसगढ़ में ज़मीन फर्जीवाड़े का मामला हुआ है उस सरकार ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया है। यहां के दलालों ने महाज़नको को 110 करोड़ में वो ज़मीन बेच दी जो है ही नहीं। ध्यान यह भी नहीं दिया कि यहां का कैम्पा का पैसा किसकी जेब में जा रहा है।
ये है मामला:
इस मामले में आरोप है कि महाजेनको के लिए अधिग्रहित की गई जमीन की कीमत बाजार मूल्य से कहीं अधिक दिखाई गई। आरोपों के मुताबिक, कुछ बिचौलियों और अधिकारियों की मिलीभगत से भूमि खरीद प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किया गया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा। यह ज़मीन महाज़नको ने कोल ब्लॉक के बदले पेड़ लगाने और अन्य विकास कार्य करने के लिए खरीदी थी।
पीएमओ में हुई शिकायत:
यह मामला तब प्रमुखता से सामने आया जब एक शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंची। शिकायत में दावा किया गया कि भूमि अधिग्रहण के दौरान पारदर्शिता नहीं बरती गई और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। शिकायत का संज्ञान लेते हुए PMO ने महाराष्ट्र सरकार से पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
PMO के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ सरकारने संबंधित विभागों को मामले की विस्तृत जांच के आदेश जारी किए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही, क्या निर्धारित नियमों का पालन किया गया और सरकारी धन के उपयोग में किसी प्रकार की अनियमितता हुई या नहीं।
अधिक दर पर खरीदी ज़मीन:
बताया जा रहा है कि महाजेनको की परियोजना के लिए खरीदी गई जमीन की कीमत वास्तविक बाजार दर से कई गुना अधिक तय की गई थी। आरोप है कि कुछ भूखंडों के मूल्यांकन में जानबूझकर हेरफेर किया गया, जिससे भूमि मालिकों और बिचौलियों को अनुचित आर्थिक लाभ मिला। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 110 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता होने का दावा किया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान भूमि खरीद से जुड़े सभी दस्तावेज, मूल्यांकन रिपोर्ट, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के निर्णयों की समीक्षा की जाएगी। यदि जांच में किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
भ्रष्टाचार का गंभीर मामला:
महाजेनको महाराष्ट्र सरकार की प्रमुख बिजली उत्पादन कंपनी है, जो राज्य में तापीय और अन्य विद्युत परियोजनाओं का संचालन करती है। ऐसे में कंपनी से जुड़े भूमि अधिग्रहण में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीरता बढ़ गई है।
फिलहाल महाराष्ट्र सरकार ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है और संबंधित विभागों से विस्तृत जानकारी मांगी गई है। अब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भूमि अधिग्रहण में वास्तव में किस स्तर पर अनियमितताएं हुईं, कितनी वित्तीय क्षति हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। PMO की निगरानी में शुरू हुई इस जांच पर राज्य प्रशासन, राजनीतिक दलों और आम लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
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