छत्तीसगढ़ में कागजी हरियाली : 8 करोड़ के चार प्रोजेक्ट फेल, जमीन पर सिर्फ वीरानी

Aishwarya Dwivedi | Jun 05, 2026, 11:09 IST
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छत्तीसगढ़ में विगत वर्षों में 2500 करोड़ खर्च कर 70 करोड़ पौधे लगाने के सरकारी दावे जमीनी हकीकत में नाकाम साबित हुए। चार बड़े प्रोजेक्ट्स में 8 करोड़ फूंकने के बाद भी देखरेख के अभाव में लाखों पौधे सूख गए और अब वहाँ सिर्फ ठूंठ बचे हैं।

NEWS IN SHORT

  • चार बड़े प्रोजेक्ट्स में 8 करोड़ के पौधे नष्ट हुए।
  • राम वन गमन मार्ग पर 2 करोड़ 5 लाख की हरियाली सूखी।
  • डॉ. कलाम का रतनजोत प्रोजेक्ट देखरेख बिना पूरी तरह असफल रहा।
  • कोरिया का ऑक्सीजन पार्क अब एक उजड़ा मैदान बन चुका है।
  • 10 वर्षों में विभागीय बजट से 2,500 करोड़ खर्च हुए।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ में पिछले डेढ़ दशक के दौरान हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए गए। भारी-भरकम बजट के साथ उद्घाटन समारोह हुए और फाइलों में लक्ष्य पूरे होने की गुलाबी रिपोर्ट भी भेज दी गई। लेकिन जब जमीनी हकीकत की पड़ताल की गई, तो सरकारी दावों की पोल खुल गई।

राज्य में न तो 'राम' के नाम की हरियाली बची, न डॉ. कलाम का सपना साकार हुआ और न ही बौद्ध विहार का ऑक्सीजन पार्क जिंदा रह पाया। करोड़ों रुपए फूंककर केवल कागजी हरियाली उगा दी गई है।

छत्तीसगढ़ के रायपुर, धमतरी और कोरिया जिलों के चार बड़े प्रोजेक्ट्स में लगभग 8 करोड़ रुपए खर्च कर एक लाख से अधिक पौधे लगाए गए थे, लेकिन आज अधिकांश जगहों पर सिर्फ ठूंठ, सूखी मिट्टी और खाली गड्ढे ही नजर आते हैं।

इन चार प्रमुख प्रोजेक्ट्स का हुआ बुरा हाल

राम वन गमन मार्ग (धमतरी) : धमतरी से नगरी तक 56 किमी लंबे मार्ग पर साल 2020 में 2 करोड़ 5 लाख रुपए की लागत से 14 हजार पौधे (पीपल, बरगद, नीम, आम) लगाए गए थे। आज सड़क किनारे टूटे ट्री-गार्ड और सूखी मिट्टी के अलावा कुछ नहीं बचा। अधिकारियों का तर्क है कि मुरमयुक्त जमीन पर पौधारोपण व्यावहारिक ही नहीं था।

नवा रायपुर पचेड़ा प्लांटेशन : साल 2019-20 में 3 करोड़ रुपए खर्च कर यहाँ 66 हजार से अधिक औषधीय और छायादार पौधे लगाए गए थे। आज इस प्रोजेक्ट के भीतर जाने पर बड़ी संख्या में कटे हुए पेड़ों के ठूंठ दिखाई देते हैं और देखरेख का पूरी तरह अभाव है।

डॉ. कलाम का रतनजोत अभियान (नवा रायपुर) : सुंदरकेरा गाँव में साल 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने खुद 32 एकड़ में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की थी। 50 लाख रुपए खर्च होने के बाद भी रखरखाव के अभाव में यह पूरी तरह असफल हो गया। बाद में तीन बार और प्रयास हुए, लेकिन सब बेकार रहे।

चिरमिरी ऑक्सीजन पार्क (कोरिया) : सोनावनी बौद्ध विहार की 40 एकड़ भूमि पर 'हरियर छत्तीसगढ़' योजना के तहत 1 करोड़ 5 लाख रुपए खर्च कर दो चरणों में 30 हजार पौधे रोपे गए थे। आज यह ऑक्सीजन पार्क एक उजड़े हुए मैदान में तब्दील हो चुका है।

दावों और हकीकत का बड़ा विरोधाभास

वन विभाग के अपने आंतरिक ऑडिट में यह बात सामने आई है कि राज्यभर में 500 से अधिक स्थानों पर वृक्षारोपण पूरी तरह विफल रहा है। सबसे खराब स्थिति रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग की है। पिछले 10 वर्षों में कैम्पा (CAMPA) और विभागीय बजट को मिलाकर पौधों को लगाने और उनकी सुरक्षा पर 2,500 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है।

आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में अलग-अलग अभियानों के तहत अब तक 65 से 70 करोड़ पौधे लगाने के दावे किए गए हैं। जानकारों का कहना है कि अगर ये पौधे जमीन पर जीवित बच जाते, तो छत्तीसगढ़ का ग्रीन कवर बढ़कर 60% से ऊपर हो जाता। सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि जहाँ जमीन पर हजारों पौधे दम तोड़ चुके हैं, वहीं भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट-2023 में छत्तीसगढ़ को वन एवं वृक्ष आवरण वृद्धि में देश में पहला स्थान दे दिया गया है, जो जमीनी हकीकत से कोसों दूर है।

निष्कर्ष

करोड़ों रुपए और जनभावनाओं को समर्पित छत्तीसगढ़ की ये वृक्षारोपण योजनाएँ प्रशासनिक लापरवाही और देखरेख के अभाव में दम तोड़ चुकी हैं। फाइलों में दर्ज झूठी 'कागजी हरियाली' और जमीन पर बचे सूखे ठूंठ यह साबित करते हैं कि बिना सही योजना और जवाबदेही के पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य कभी पूरा नहीं हो सकता।

FAQ

  1. ISFR-2023 में छत्तीसगढ़ की क्या उपलब्धि रही?
    उत्तर: भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट (ISFR) 2023 के अनुसार, छत्तीसगढ़ को देश में वन एवं वृक्ष आवरण (Tree Cover) वृद्धि में पहला स्थान दिया गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य का वन क्षेत्र बढ़ा है, हालांकि वर्तमान ग्राउंड रिपोर्टों में कई रोपण परियोजनाओं के विफल होने और जमीन पर सिर्फ ठूंठ बचने के कारण इस रिपोर्ट और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा विरोधाभास देखा जा रहा है।
  2. राम वन गमन मार्ग परियोजना क्या है?
    उत्तर: यह छत्तीसगढ़ सरकार की एक सांस्कृतिक और पर्यटन परियोजना है, जिसके तहत भगवान राम के वनवास काल के 51 पौराणिक स्थलों को चिन्हित कर उन्हें पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी योजना के अंतर्गत धमतरी से नगरी तक 56 किमी लंबे मार्ग पर ₹2.5 करोड़ खर्च कर 14 हजार पौधे लगाए गए थे, जो देखरेख और सिंचाई के अभाव में अब लगभग नष्ट हो चुके हैं।
  3. वनीकरण में 'कैम्पा (CAMPA) फंड' की क्या भूमिका है?
    उत्तर: कैम्पा (Compensatory Afforestation Fund) का मुख्य उद्देश्य विकासात्मक कार्यों के लिए काटे गए वनों की क्षतिपूर्ति करना और नए पेड़ लगाना है। छत्तीसगढ़ में पिछले 10 वर्षों में विभागीय बजट और कैम्पा मद को मिलाकर ₹2,500 करोड़ से अधिक की भारी-भरकम राशि पौधों को लगाने, फेंसिंग (सुरक्षा) और उनके रखरखाव पर खर्च की जा चुकी है, जिसके वित्तीय प्रबंधन पर अब सवाल उठ रहे हैं।

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